चीनी और अंडों की बढ़ती कीमतों से बेकरी उद्योग पर संकट

Update: 2026-07-27 09:41 GMT

केरल : बढ़ती महंगाई का असर अब बेकरी उद्योग पर भी साफ दिखाई देने लगा है। चीनी और अंडों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने बेकरी कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उद्योग से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि कच्चे माल की लागत बढ़ने से केक, बिस्कुट, लड्डू, जलेबी और अन्य मिठाइयों का उत्पादन महंगा हो गया है। इसके अलावा पहले से बढ़ी हुई कुकिंग गैस की कीमतों ने भी कारोबारियों पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है।

बेकरी उत्पादों में चीनी और अंडे सबसे अहम सामग्री माने जाते हैं। केक, पेस्ट्री, बिस्कुट और कई तरह की मिठाइयों को तैयार करने में इनकी बड़ी भूमिका होती है। ऐसे में इन दोनों चीजों की कीमत बढ़ने से सीधे तौर पर उत्पादन लागत बढ़ रही है।

व्यापारियों के अनुसार, कुछ समय पहले तक चीनी की थोक कीमत करीब 44 रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर 50 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच गई है। इसी तरह अंडों की थोक कीमत भी बढ़कर 7.50 रुपये प्रति अंडे से अधिक हो गई है। कीमतों में इस बढ़ोतरी ने छोटे और मध्यम स्तर के बेकरी संचालकों की चिंता बढ़ा दी है।

बेकरी कारोबारियों का कहना है कि वे पहले ही गैस सिलेंडर, बिजली, मजदूरी और अन्य खर्चों में बढ़ोतरी का सामना कर रहे हैं। अब चीनी और अंडों की कीमत बढ़ने से उत्पादन लागत में और इजाफा हो गया है। ऐसे में यदि कीमतें नियंत्रित नहीं हुईं तो उन्हें अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं।

कारोबारियों का कहना है कि बेकरी उत्पाद रोजमर्रा की जरूरतों के साथ-साथ त्योहारों और विशेष अवसरों का भी हिस्सा बन चुके हैं। जन्मदिन, शादी समारोह और अन्य कार्यक्रमों में केक और मिठाइयों की मांग बनी रहती है। लेकिन उत्पादन लागत बढ़ने से आने वाले समय में ग्राहकों को भी अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

चीनी कारोबार से जुड़े व्यापारियों के मुताबिक, कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं। इनमें गन्ने की उपलब्धता और चीनी उत्पादन से जुड़े बदलाव प्रमुख हैं। व्यापारियों का कहना है कि पेट्रोल में मिलाने के लिए इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ने की मांग प्रभावित हुई है। गन्ना चीनी उत्पादन का मुख्य कच्चा माल है और इसके इस्तेमाल में बदलाव का असर चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ रहा है।

इथेनॉल मिश्रित ईंधन नीति के तहत पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे गन्ने का एक हिस्सा इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। व्यापारियों का मानना है कि इसका असर चीनी बाजार पर पड़ रहा है और कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

बेकरी उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि छोटे कारोबारियों के लिए लागत बढ़ने का असर सबसे ज्यादा महसूस किया जा रहा है। बड़े उद्योग कुछ हद तक बढ़ी हुई लागत को संभाल सकते हैं, लेकिन छोटे दुकानदारों के लिए कीमतों में लगातार वृद्धि मुश्किलें पैदा कर रही है।

कुछ कारोबारियों का कहना है कि यदि वे उत्पादों के दाम नहीं बढ़ाते हैं तो मुनाफा कम हो जाएगा और कारोबार चलाना कठिन हो सकता है। वहीं, कीमत बढ़ाने की स्थिति में ग्राहकों की संख्या प्रभावित होने की चिंता भी बनी हुई है।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि बेकरी क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए कच्चे माल की कीमतों पर नजर रखना जरूरी है। साथ ही छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए ऐसी नीतियों की आवश्यकता है, जिससे उत्पादन लागत को नियंत्रित किया जा सके।

आम उपभोक्ताओं पर भी इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है। खास मौकों और त्योहारों पर मिठाइयों और बेकरी उत्पादों की मांग बढ़ती है, लेकिन कीमतों में बढ़ोतरी से लोगों का बजट प्रभावित हो सकता है।

फिलहाल बेकरी उद्योग से जुड़े कारोबारी चीनी और अंडों की कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि कच्चे माल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले दिनों में केक, मिठाइयों और अन्य बेकरी उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी करना उनकी मजबूरी बन सकती है।

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