कडावल्लूर: केरल के कडावल्लूर पंचायत में बिल्डिंग टैक्स जमा करने के नाम पर कथित वित्तीय धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि पंचायत के एक क्लर्क ने स्थानीय लोगों द्वारा जमा किए गए बिल्डिंग टैक्स की राशि को अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कर लिया और लाखों रुपये का गबन किया।
पंचायत अधिकारियों के मुताबिक, यह धोखाधड़ी स्थानीय निकायों की सेवाओं के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले K-Smart ऐप की तकनीकी खामी का फायदा उठाकर की गई। मामले की जानकारी सामने आने के बाद पंचायत प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी क्लर्क ने बिल्डिंग मालिकों से प्राप्त टैक्स राशि को पंचायत खाते में जमा करने के बजाय कथित तौर पर अपने निजी बैंक खाते में ट्रांसफर किया। इसके लिए K-Smart ऐप में एक फर्जी UPI ID का इस्तेमाल किया गया।
बताया जा रहा है कि धोखाधड़ी का तरीका ऐसा था कि टैक्स जमा करने वाले लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी। आरोपी कथित रूप से टैक्स भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ऐप से असली टैक्स रसीद डाउनलोड कर बिल्डिंग मालिकों को दे देता था। चूंकि लोगों को आधिकारिक रसीद मिल रही थी, इसलिए उन्हें किसी तरह की गड़बड़ी का संदेह नहीं हुआ।
पंचायत अधिकारियों का कहना है कि ऐप में ऐसी व्यवस्था नहीं थी, जिससे यह पुष्टि की जा सके कि टैक्स के रूप में जमा की गई राशि वास्तव में पंचायत के बैंक खाते में पहुंची है या नहीं। इसी तकनीकी कमी का फायदा उठाकर कथित तौर पर यह धोखाधड़ी की गई।
मामले की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कितने समय से यह गतिविधि चल रही थी और कुल कितनी राशि का गबन किया गया है। अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेजों और भुगतान रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है।
K-Smart ऐप का इस्तेमाल केरल की स्थानीय सरकारी संस्थाओं में विभिन्न सेवाओं को डिजिटल बनाने के लिए किया जाता है। इसके जरिए नागरिक टैक्स भुगतान, प्रमाण पत्र और अन्य स्थानीय निकाय सेवाओं का ऑनलाइन लाभ उठा सकते हैं। डिजिटल प्रणाली से लोगों को सुविधा तो मिली है, लेकिन इस मामले ने ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था में निगरानी और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पंचायत अधिकारियों के अनुसार, अब भुगतान प्रणाली की समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे हर भुगतान सीधे संबंधित सरकारी खाते में पहुंचने की पुष्टि हो सके।
स्थानीय लोगों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि टैक्स जमा करने के बाद उन्हें रसीद तो मिल गई, लेकिन यदि राशि सरकारी खाते में नहीं पहुंची तो यह व्यवस्था की गंभीर कमी को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ मजबूत निगरानी तंत्र भी जरूरी है। केवल ऑनलाइन रसीद जारी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भुगतान की अंतिम पुष्टि और ऑडिट व्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए।
फिलहाल पंचायत प्रशासन मामले की जांच कर रहा है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही K-Smart ऐप की इस तकनीकी कमी को दूर करने के लिए संबंधित विभागों को जानकारी दी जाएगी।
कडावल्लूर पंचायत का यह मामला डिजिटल सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत को फिर से सामने लाता है। आने वाले समय में ऐसी व्यवस्थाओं में अतिरिक्त सत्यापन और निगरानी उपायों को लागू करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।