कोच्चि। पूर्व भारतीय क्रिकेटर एस. श्रीसंत के पिता वी. संथाकुमारन नायर का निधन हो गया है। वह 89 वर्ष के थे और कोच्चि के निजी लिसी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। परिवार के सूत्रों ने शनिवार को उनके निधन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नायर ने शुक्रवार रात करीब 9.45 बजे अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर को फिलहाल अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया है। रिश्तेदारों के पहुंचने के बाद रविवार को पार्थिव शरीर को कोथमंगलम स्थित परिवार के घर ले जाया जाएगा।

परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, विदेश में रहने वाले कुछ रिश्तेदारों के आने का इंतजार किया जा रहा है। रविवार को सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक पार्थिव शरीर घर पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद शाम चार बजे अंतिम संस्कार होगा। इस दौरान परिवार के सदस्य और परिचित उन्हें अंतिम विदाई दे सकेंगे। नायर भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी में जोनल मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके परिवार में पत्नी टी. एन. सावित्रीदेवी और चार बच्चे दीपु, निवेदिता, दिव्या तथा श्रीसंत हैं।  

नायर के निधन के साथ श्रीसंत के परिवार के जीवन का एक लंबा अध्याय समाप्त हो गया है। क्रिकेट के मैदान पर अपनी पहचान बनाने वाले श्रीसंत के पिता पहले भी अपने बेटे से जुड़े महत्वपूर्ण अवसरों पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते रहे थे। खासकर वर्ष 2015 में सामने आए उनके बयान से यह पता चला था कि बेटे के जीवन में आए कठिन दौर को परिवार ने कितनी निकटता से महसूस किया था। उस समय नायर और उनकी पत्नी ने अदालत के फैसले के बाद अपनी भावनाएं साझा की थीं।

जुलाई 2015 में दिल्ली की एक अदालत से श्रीसंत को आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में आरोपमुक्त किए जाने के बाद उनके माता-पिता ने राहत जताई थी। पिता संथाकुमारन नायर ने बेटे के लिए प्रार्थना करने वाले और उसकी बेगुनाही साबित करने में सहयोग देने वाले लोगों का आभार व्यक्त किया था। मां सावित्रीदेवी ने भी बताया था कि फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद परिवार तनाव में था और लगातार प्रार्थना कर रहा था। उस समय की तस्वीरों में दोनों को कोच्चि में मिठाई बांटते हुए देखा गया था। 

यह प्रसंग नायर को केवल एक प्रसिद्ध क्रिकेटर के पिता के रूप में देखने से आगे जाकर उनके पारिवारिक जीवन की झलक देता है। बेटे के करियर से जुड़े उतार-चढ़ाव उनके लिए भी निजी अनुभव थे। अदालत के फैसले पर उनकी प्रतिक्रिया में राहत के साथ उन लोगों के प्रति कृतज्ञता भी थी, जिन्होंने परिवार का साथ दिया था। अब उनके निधन की खबर के बीच वह पुराना अवसर पिता और पुत्र के रिश्ते से जुड़ी एक सार्वजनिक स्मृति के रूप में सामने आता है।

श्रीसंत भारतीय क्रिकेट के उन तेज गेंदबाजों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने टेस्ट, एकदिवसीय और टी20 अंतरराष्ट्रीय, तीनों प्रारूपों में देश का प्रतिनिधित्व किया। वह वर्ष 2007 में पहला टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। इसके बाद वर्ष 2011 में एकदिवसीय विश्व कप जीतने वाली टीम में भी शामिल रहे। दो विश्व कप विजेता टीमों से जुड़ाव उनके क्रिकेट करियर की प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता है। केरल से निकलकर राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने की उनकी यात्रा ने उन्हें देशभर के क्रिकेट दर्शकों के बीच पहचान दिलाई।

अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में श्रीसंत ने भारत के लिए 27 टेस्ट, 53 एकदिवसीय और 10 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। मार्च 2022 में उन्होंने भारतीय घरेलू क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की थी। इसके साथ उनके सक्रिय घरेलू क्रिकेट करियर का समापन हुआ। तेज गेंदबाजी और मैदान पर अपने उत्साहपूर्ण अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले श्रीसंत की क्रिकेट यात्रा में उपलब्धियों के साथ कठिन दौर भी आए। हालांकि, पिता के निधन की इस खबर का केंद्र परिवार की व्यक्तिगत क्षति और उन्हें अंतिम विदाई देने की तैयारियां हैं। 

नायर के निधन को लेकर उपलब्ध शुरुआती जानकारी परिवार के सूत्रों के हवाले से सामने आई है। अस्पताल में उनका इलाज चलने की पुष्टि हुई है, लेकिन बीमारी की प्रकृति और उपचार की अवधि का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए निधन के कारण को लेकर किसी विशेष बीमारी का उल्लेख करना उचित नहीं होगा। इसी तरह श्रीसंत या परिवार के किसी सदस्य की ओर से ऐसा कोई व्यक्तिगत संदेश उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है, जिसे उनके बयान के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

फिलहाल परिवार की प्राथमिकता बाहर से आने वाले रिश्तेदारों के पहुंचने और रविवार को निर्धारित अंतिम दर्शन तथा अंतिम संस्कार की व्यवस्था है। कोथमंगलम स्थित घर पर पार्थिव शरीर रखे जाने से परिचितों को विदाई देने का अवसर मिलेगा। परिवार द्वारा साझा कार्यक्रम के अनुसार अंतिम दर्शन के लिए चार घंटे का समय निर्धारित है। इसके बाद शाम को अंतिम संस्कार किया जाएगा। संथाकुमारन नायर अपने पीछे पत्नी, चार बच्चों और उनसे जुड़ी पारिवारिक स्मृतियों को छोड़ गए हैं।

 

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