पलक्कड़। वरिष्ठ भाजपा नेता और रेलवे की पैसेंजर अमेनिटीज कमेटी के पूर्व अध्यक्ष पीके कृष्णदास ने रविवार को रेलवे बोर्ड के उस फैसले का बचाव किया, जिसमें पलक्कड़ डिवीजन के पुनर्गठन के साथ मंगलुरु जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों को मैसूरु डिवीजन के अंतर्गत लाने का निर्णय किया गया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले को केवल किसी एक क्षेत्र के प्रशासनिक बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इससे केरल में रेलवे के विकास को गति मिलने की संभावना है।

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कृष्णदास ने कहा कि भारतीय रेलवे एक समग्र वित्तीय व्यवस्था के तहत काम करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी एक डिवीजन में होने वाले राजस्व में बदलाव को सीधे तौर पर रेलवे के लिए नुकसान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, रेलवे की आय और खर्च को व्यापक स्तर पर देखा जाता है और अलग-अलग डिवीजनों के आधार पर इसके प्रभाव का आकलन करना उचित नहीं होगा।

पलक्कड़ डिवीजन के पुनर्गठन को लेकर केरल में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। खासकर मंगलुरु जैसे महत्वपूर्ण रेलवे केंद्रों को मैसूरु डिवीजन में शामिल किए जाने के फैसले को लेकर कुछ वर्गों ने चिंता जताई है। आलोचकों का कहना है कि इससे पलक्कड़ डिवीजन के राजस्व और प्रशासनिक महत्व पर असर पड़ सकता है। हालांकि, कृष्णदास ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए इसे विकास के व्यापक नजरिए से देखने की अपील की।

उन्होंने कहा कि रेलवे का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देना और रेल नेटवर्क का विस्तार करना है। उनके मुताबिक, प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव अपने आप में रेलवे की सेवाओं को कमजोर नहीं करता। इसके उलट, नए ढांचे के तहत कुछ क्षेत्रों में निवेश, बुनियादी ढांचे के विकास और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के अवसर पैदा हो सकते हैं।

कृष्णदास ने रेलवे की वित्तीय व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि रेलवे एक ही वित्तीय खाते के तहत काम करता है। ऐसे में किसी खास डिवीजन से होने वाली आय में कमी को पूरे रेलवे के राजस्व में नुकसान के रूप में देखना सही नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि रेलवे का निवेश और विकास किसी एक डिवीजन की आय तक सीमित नहीं होता।

मंगलुरु स्टेशन और आसपास के रेल क्षेत्रों को मैसूरु डिवीजन में स्थानांतरित किए जाने के फैसले को लेकर केरल और कर्नाटक के बीच रेलवे प्रशासन से जुड़े सवाल सामने आए हैं। पलक्कड़ डिवीजन लंबे समय से दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण रेल प्रशासनिक क्षेत्रों में शामिल रहा है। इसके पुनर्गठन से जुड़े प्रस्ताव ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चर्चा को तेज कर दिया है।

भाजपा नेता का कहना है कि रेलवे से जुड़े फैसलों को क्षेत्रीय भावनाओं के बजाय विकास की जरूरतों के आधार पर देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रशासनिक बदलाव से रेल सेवाओं का विस्तार होता है और नए प्रोजेक्ट तेजी से लागू किए जा सकते हैं, तो इसका लाभ यात्रियों और आम जनता को मिलना चाहिए।

कृष्णदास रेलवे से जुड़े मामलों का अनुभव रखने वाले भाजपा नेताओं में शामिल हैं। वह रेलवे की पैसेंजर अमेनिटीज कमेटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। यह समिति भारतीय रेलवे के तहत यात्रियों की सुविधाओं से संबंधित मामलों पर सलाह देने वाली संस्था है। रेलवे के कामकाज और यात्री सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

उन्होंने कहा कि रेलवे की प्राथमिकता यात्री सुविधाओं, बुनियादी ढांचे और बेहतर संपर्क व्यवस्था को मजबूत करना होनी चाहिए। यदि प्रशासनिक पुनर्गठन से इन लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलती है तो इसे सकारात्मक कदम के रूप में देखा जाना चाहिए।

पलक्कड़ डिवीजन को लेकर उठ रही चिंताओं में सबसे प्रमुख मुद्दा राजस्व का है। कुछ लोगों का तर्क है कि मंगलुरु जैसे अधिक आय वाले क्षेत्रों के बाहर जाने से पलक्कड़ डिवीजन की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है। इसके जवाब में कृष्णदास ने कहा कि रेलवे को एक ही वित्तीय खाते के रूप में देखा जाता है और किसी विशेष डिवीजन के राजस्व को अलग करके पूरे रेलवे के वित्तीय स्वास्थ्य का आकलन नहीं किया जा सकता।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि विकास परियोजनाओं और निवेश के लिए रेलवे के पास व्यापक स्तर पर संसाधन उपलब्ध होते हैं। इसलिए किसी डिवीजन के प्रशासनिक पुनर्गठन का अर्थ यह नहीं है कि उस क्षेत्र में रेलवे विकास रुक जाएगा।

केरल में रेलवे के विकास को लेकर लंबे समय से अधिक निवेश और बेहतर सेवाओं की मांग होती रही है। राज्य में रेल यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है और यात्रियों की संख्या के साथ नई रेल सेवाओं, स्टेशनों के आधुनिकीकरण तथा ट्रैक क्षमता बढ़ाने की जरूरत भी महसूस की जाती रही है। ऐसे में कृष्णदास ने पुनर्गठन को राज्य में रेलवे के विकास से जोड़कर देखा है।

उनका कहना है कि रेलवे के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव को लेकर तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय इसके दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन किया जाना चाहिए। यदि नए डिवीजनल ढांचे के जरिए परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी मिलती है और उनका क्रियान्वयन बेहतर होता है, तो इसका लाभ अंततः यात्रियों को ही मिलेगा।

मंगलुरु जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन के स्थानांतरण को लेकर हालांकि बहस जारी है। स्टेशन की भौगोलिक स्थिति और यात्री आवागमन के कारण यह क्षेत्र रेलवे के लिए महत्वपूर्ण है। इसके प्रशासनिक नियंत्रण में बदलाव से संबंधित विभिन्न पक्ष अपने-अपने तर्क दे रहे हैं।

कृष्णदास ने अपने बयान के जरिए उन आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की है जिनमें पलक्कड़ डिवीजन के कमजोर होने की बात कही जा रही है। उन्होंने विकास और यात्री सुविधाओं को इस बहस का केंद्र बनाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि रेलवे को राजनीतिक या क्षेत्रीय सीमाओं से ऊपर उठकर एक एकीकृत परिवहन व्यवस्था के रूप में देखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि किसी क्षेत्र के विकास के लिए केवल प्रशासनिक नियंत्रण महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि वहां होने वाला वास्तविक निवेश, परियोजनाओं का क्रियान्वयन और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाएं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

फिलहाल पलक्कड़ डिवीजन के पुनर्गठन को लेकर चर्चा जारी है। एक ओर इस फैसले के समर्थक इसे रेलवे प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने वाला कदम बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आलोचक इसके संभावित वित्तीय और क्षेत्रीय प्रभावों पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में पीके कृष्णदास का बयान इस बहस में भाजपा का पक्ष स्पष्ट करता है।

कृष्णदास ने भरोसा जताया कि प्रस्तावित बदलावों से रेलवे के विकास पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा और इसके बजाय केरल में रेल बुनियादी ढांचे तथा यात्री सुविधाओं को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने राजस्व के सवाल पर भी स्पष्ट किया कि रेलवे की वित्तीय व्यवस्था समग्र है, इसलिए किसी एक डिवीजन के आंकड़ों को अलग करके नुकसान का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

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