भारी बारिश से पूर्वी पहाड़ी इलाकों में तबाही, भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बढ़ा

Update: 2026-08-02 09:58 GMT

केरल : पूर्वी पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। कई क्षेत्रों में जलभराव, नदी के उफान और भूस्खलन के खतरे के कारण प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। आर्यनकावु और थेनमाला पंचायतों के पहाड़ी तथा बागान क्षेत्रों में कई स्थानों पर भूस्खलन की आशंका बनी हुई है। लगातार बारिश के कारण मिट्टी कमजोर हो गई है, जिससे पहाड़ी ढलानों पर रहने वाले लोगों और यात्रियों के लिए खतरा बढ़ गया है।

स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है जहां पहले भी भूस्खलन की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। बारिश जारी रहने की स्थिति में और अधिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

नदियों में बढ़ा जलस्तर, कई इलाकों में बाढ़

भारी बारिश का असर क्षेत्र की प्रमुख नदियों पर भी दिखाई दे रहा है। कल्लादयार, कझुथुरत्तियार और अचनकोविल नदियों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ गया है। नदी किनारे बसे कई इलाकों में पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बन गई है, जिससे खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।

कई किसानों ने बताया कि अचानक बढ़े जलस्तर के कारण खेती वाले क्षेत्रों में पानी घुस गया, जिससे सब्जियों, धान और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक नुकसान की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

थेनमाला परप्पर बांध को लेकर अधिकारियों ने दी राहत की जानकारी

बारिश के कारण थेनमाला परप्पर बांध में भी पानी का स्तर बढ़ गया है। हालांकि, KIP (केरल इरिगेशन प्रोजेक्ट) के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बांध की स्थिति नियंत्रण में है और फिलहाल किसी तरह का खतरा नहीं है।

अधिकारियों के अनुसार, बांध में पानी की निगरानी लगातार की जा रही है। जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए आवश्यक सुरक्षा उपायों को तैयार रखा गया है। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।

झरनों और पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की आवाजाही रोकी गई

भारी बारिश के कारण क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी असर पड़ा है। पलारुवि और अचनकोविल कुंबावुरुट्टी जैसे प्रसिद्ध झरनों में पानी का प्रवाह अचानक बढ़ गया है। तेज बहाव और सुरक्षा जोखिम को देखते हुए प्रशासन ने इन जलप्रपातों को बंद कर दिया है।

पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए झरनों के आसपास प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि पानी का बहाव सामान्य होने और स्थिति सुरक्षित पाए जाने के बाद ही पर्यटकों को दोबारा प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

इसी तरह कुट्टालम क्षेत्र में भी जलस्तर बढ़ने के कारण पर्यटकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। बारिश के मौसम में झरनों और जलधाराओं के पास दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए सुरक्षा के तहत यह कदम उठाया गया है।

मंदिर में बाढ़, क्षेत्रों में फसलों को नुकसान

भारी बारिश का असर धार्मिक स्थलों पर भी पड़ा है। करावलूर पनायम महादेव मंदिर परिसर में बाढ़ का पानी घुस गया, जिससे मंदिर को नुकसान पहुंचा है। स्थानीय लोगों और मंदिर प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

इसके अलावा करावलूर पंचायत के नीलममल और अनाविला क्षेत्रों में जलधाराओं के उफान पर आने से बड़े पैमाने पर फसलें प्रभावित हुई हैं। खेतों में पानी भर जाने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द राहत और सहायता की मांग की है।

प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी, लोगों से सतर्क रहने की अपील

मौसम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने पहाड़ी और नदी किनारे वाले क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। राहत एवं बचाव दलों को भी तैयार रखा गया है ताकि किसी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे तेज बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी और जलधाराओं के पास न जाएं तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतें।

पूर्वी पहाड़ी क्षेत्रों में जारी बारिश ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को उजागर कर दिया है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और प्रभावित इलाकों में जल्द से जल्द राहत पहुंचाना है। मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए आने वाले दिनों में भी स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी।

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