केरल : जिले में संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और समय पर पहचान के लिए शिक्षण संस्थानों में बच्चों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को मजबूत करने की पहल शुरू की गई है। इसी दिशा में स्कूलों में डिजीज रजिस्टर (बीमारी से जुड़े रिकॉर्ड) को बेहतर तरीके से तैयार करने और नियमित रूप से अपडेट करने को लेकर विभिन्न विभागों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई।

बैठक की अध्यक्षता डिप्टी कलेक्टर एस.एस. अल्फा ने की। इसमें स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में राष्ट्रीय महामारी रोकथाम दिवस, स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए किए जा रहे उपायों की समीक्षा की गई।

अधिकारियों ने कहा कि स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी व्यवस्थित रूप से दर्ज होना बेहद जरूरी है। विशेष रूप से आवासीय स्कूलों में, जहां बड़ी संख्या में बच्चे एक साथ रहते हैं, वहां बीमारी के शुरुआती लक्षणों की पहचान और तुरंत कार्रवाई से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि सभी शिक्षण संस्थानों में बच्चों की बीमारी से संबंधित रिकॉर्ड नियमित रूप से तैयार किए जाएं। इसमें बच्चों को होने वाली सामान्य और संक्रामक बीमारियों, बीमारी की अवधि, उपचार और स्वास्थ्य संबंधी अन्य जरूरी जानकारियों को दर्ज किया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, डिजीज रजिस्टर के माध्यम से स्कूलों में स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों की निगरानी आसान होगी। यदि किसी स्कूल में किसी बीमारी के मामले बढ़ते हैं तो स्वास्थ्य विभाग समय रहते आवश्यक कदम उठा सकेगा। इससे बीमारी के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

बैठक में संक्रामक बीमारियों जैसे मौसमी बुखार, वायरल संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर सतर्कता बढ़ाने पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि बच्चों में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य जांच और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

डिप्टी कलेक्टर एस.एस. अल्फा ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि स्कूलों में स्वास्थ्य रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य सुरक्षित रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसके लिए शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

बैठक में यह भी चर्चा की गई कि शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन को स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित किया जाए। उन्हें बच्चों में बीमारी के शुरुआती संकेतों को पहचानने और आवश्यक सूचना संबंधित विभाग तक पहुंचाने के लिए तैयार किया जाएगा।

आवासीय स्कूलों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने बताया कि इन संस्थानों में बच्चे लंबे समय तक एक साथ रहते हैं, इसलिए संक्रमण फैलने की संभावना अधिक होती है। ऐसे में नियमित स्वास्थ्य निगरानी, साफ-सफाई और समय पर उपचार व्यवस्था जरूरी है।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बीमारियों की रोकथाम के लिए केवल इलाज ही नहीं, बल्कि बचाव के उपायों पर भी ध्यान देना जरूरी है। स्कूल स्तर पर सही रिकॉर्ड रखने से बीमारी के पैटर्न को समझने और भविष्य की रणनीति तैयार करने में सहायता मिलेगी।

बैठक में राष्ट्रीय महामारी रोकथाम दिवस के महत्व पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि महामारी जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पहले से तैयारी और विभागों के बीच समन्वय बेहद आवश्यक है।

बैठक के दौरान सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए कि वे अपने स्तर पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें और स्कूलों में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाएं। प्रशासन का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना है।

इस पहल से जिले के स्कूलों में स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने की उम्मीद है। डिजीज रजिस्टर के प्रभावी उपयोग से न केवल बीमारियों की पहचान समय पर हो सकेगी, बल्कि संक्रामक रोगों के फैलाव को रोकने में भी मदद मिलेगी।

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