तिरुवनंतपुरम: केरल हाई कोर्ट ने तीन रेवेन्यू अधिकारियों पर 30,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। इन अधिकारियों पर यह जुर्माना लोकायुक्त के उस आदेश को न मानने के कारण लगाया गया है, जिसमें उन्हें एक ज़मीन मालिक से ज़मीन का टैक्स लेने का निर्देश दिया गया था। जिन अधिकारियों पर जुर्माना लगाया गया है, उनमें तिरुवनंतपुरम के रेवेन्यू डिविज़नल ऑफिसर (RDO), तिरुवनंतपुरम के तहसीलदार (लैंड रिकॉर्ड्स) और वंचियूर के विलेज ऑफिसर शामिल हैं।
रिटायर्ड एडिशनल सेक्रेटरी ए. मैदीन पिल्लई ने लोकायुक्त से शिकायत की थी कि अधिकारी वंचियूर गांव में उनकी 4.151 सेंट ज़मीन के मालिकाना हक और कब्ज़े के बावजूद ज़मीन का टैक्स लेने से इनकार कर रहे थे। मैदीन 2018 तक नियमित रूप से ज़मीन का टैक्स भरते रहे थे। हालांकि, बाद में गांव के अधिकारियों ने पूरी प्रॉपर्टी का टैक्स लेने से इनकार कर दिया, क्योंकि री-सर्वे के बाद रिकॉर्ड में ज़मीन का एरिया घटकर 3.53 सेंट हो गया था।
लोकायुक्त ने बताया कि एक सरकारी आदेश के तहत, अगर री-सर्वे में ज़मीन का रिकॉर्डेड एरिया कम हो जाता है, तो भी अधिकारी पूरी ज़मीन का टैक्स ले सकते हैं। यह तब तक किया जा सकता है जब तक कि सर्वे और बाउंड्रीज़ एक्ट या सिविल कोर्ट के ज़रिए कोई अंतिम फ़ैसला न आ जाए। इसी प्रावधान के आधार पर, लोकायुक्त ने एक अंतरिम आदेश जारी कर रेवेन्यू अधिकारियों को पूरी 4.151 सेंट ज़मीन का टैक्स अस्थायी रूप से लेने का निर्देश दिया।
रेवेन्यू अधिकारियों ने रिट याचिका दायर करके हाई कोर्ट में लोकायुक्त के आदेश को चुनौती दी। हाई कोर्ट ने अधिकारियों की आलोचना की कि वे आम नागरिकों को राहत देने वाले सरकारी आदेश को लागू करने के बजाय कोर्ट चले गए। कोर्ट ने नागरिकों को परेशान करने वाले तरीके से काम करने के लिए अधिकारियों से 30,000 रुपये वसूलने का आदेश दिया। सरकार को निर्देश दिया गया कि वह यह रकम मैदीन पिल्लई को दे और बाद में अधिकारियों से वसूल करे; तीनों अधिकारियों को 10-10 हज़ार रुपये देने होंगे।
जस्टिस डॉ. ए.के. जयशंकरन नांबियार और जस्टिस प्रीता ए.के. की बेंच ने सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह सरकारी आदेशों का पालन न करने के लिए अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई करने पर विचार करे।