मुवत्तुपुझा: पिछले कुछ दिनों में आई बाढ़ ने कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचाया है। बाढ़ और तेज हवाओं के कारण इलाके में केले, कप्पा और धान की फसलें बड़े पैमाने पर खराब हो गई हैं। कृषि विभाग के शुरुआती आकलन के अनुसार, मुवत्तुपुझा क्षेत्र में खेती को करीब 29.19 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
इस प्राकृतिक आपदा से क्षेत्र के 157 किसानों की आजीविका प्रभावित हुई है। किसानों का कहना है कि महीनों की मेहनत और खर्च के बाद तैयार हुई फसल बर्बाद हो जाने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मुवत्तुपुझा के असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ एग्रीकल्चर के अधिकार क्षेत्र में फसल नुकसान का आकलन किया गया है। इसमें सबसे अधिक नुकसान केले की खेती को हुआ है। बाढ़ के पानी और तेज हवाओं के कारण हजारों केले के पौधे नष्ट हो गए हैं।
केले की खेती करने वाले किसानों को सबसे बड़ा झटका लगा है। कई जगहों पर तैयार हो चुकी फसल, जिसे काटकर बाजार भेजने की तैयारी थी, पानी में खराब हो गई। वहीं कई खेतों में अभी कच्चे केले के गुच्छे भी बर्बाद हो गए।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 110 किसानों की केले की खेती प्रभावित हुई है। अकेले केले की फसल में लगभग 25.40 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। यह कुल कृषि नुकसान का सबसे बड़ा हिस्सा है।
किसानों का कहना है कि केले की खेती में उन्हें बीज, खाद, मजदूरी और देखभाल पर काफी खर्च करना पड़ता है। फसल तैयार होने के समय हुए इस नुकसान से उनकी पूरी आय प्रभावित हो गई है। कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी और अब उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
केले के अलावा कप्पा (टैपिओका) और धान की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ का पानी खेतों में भरने से पौधों को नुकसान पहुंचा और कई जगहों पर तैयार फसल खराब हो गई। धान किसानों को भी नुकसान का सामना करना पड़ा है।
कृषि अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर नुकसान का विवरण तैयार किया है। विभाग की ओर से किसानों को हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई के लिए भेजी जा रही है।
बाढ़ प्रभावित किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदा के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे दोबारा खेती शुरू कर सकें।
किसानों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में मौसम में बदलाव के कारण खेती लगातार जोखिम भरी होती जा रही है। कभी अत्यधिक बारिश तो कभी सूखे जैसी परिस्थितियां फसलों को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में कृषि सुरक्षा योजनाओं और आपदा सहायता को और मजबूत करने की जरूरत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ जैसी घटनाओं से सबसे अधिक नुकसान उन फसलों को होता है जो खेतों में लंबे समय तक तैयार होती हैं। केले जैसी फसलों में एक बार पौधे खराब होने के बाद किसानों को दोबारा उत्पादन शुरू करने में समय और अतिरिक्त खर्च लगता है।
स्थानीय कृषि विभाग ने किसानों को नुकसान की जानकारी दर्ज कराने और आवश्यक दस्तावेज जमा करने की अपील की है, ताकि सरकारी सहायता योजनाओं के तहत उन्हें राहत मिल सके।
फिलहाल प्रभावित किसान अपनी खराब हुई फसलों को हटाने और खेतों को दोबारा तैयार करने में जुटे हैं। हालांकि, बड़ी संख्या में फसल नष्ट होने के कारण किसानों को सामान्य स्थिति में लौटने में समय लग सकता है।
बाढ़ से हुआ करीब 30 लाख रुपये का कृषि नुकसान क्षेत्र के किसानों के लिए बड़ी चिंता बन गया है। अब किसानों की नजर सरकार की ओर से मिलने वाली राहत और मुआवजे पर है।