पलक्कड़ । भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के नेशनल काउंसिल सेक्रेटरी बिनॉय विश्वम ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के जारी विरोध के बीच विश्वम ने ज्ञानेश कुमार को लेकर बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया और उन्हें “भ्रष्ट, तानाशाही और लोकतंत्र-विरोधी अधिकारी” बताया। यह बयान ऐसे समय आया है जब केरल में ज्ञानेश कुमार के 2006 के कार्यकाल से जुड़े आरोपों को लेकर विजिलेंस जांच के आदेश दिए गए हैं।
बिनॉय विश्वम ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ केरल में जिस मामले की जांच का आदेश दिया गया है, वह उनके राज्य के लोक निर्माण विभाग यानी PWD में सचिव रहते हुए कार्यकाल से जुड़ा है। उन्होंने इस जांच का हवाला देते हुए ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली और उनके मौजूदा पद पर बने रहने को लेकर सवाल उठाए।विश्वम ने कहा, “CEC केरल में दर्ज एक मामले में आरोपी हैं। यह भ्रष्टाचार का मामला है। एक भ्रष्ट अधिकारी, एक तानाशाही अधिकारी, एक लोकतंत्र-विरोधी अधिकारी—ज्ञानेश कुमार ऐसे ही अधिकारी हैं।” हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये विश्वम के राजनीतिक आरोप हैं और जांच पूरी होने से पहले आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जिस मामले का उल्लेख किया जा रहा है, उसका संबंध 2006 में उनके केरल सरकार में लोक निर्माण विभाग के सचिव के रूप में कार्यकाल से बताया जा रहा है। केरल में इस पुराने मामले पर विजिलेंस जांच के आदेश के बाद राजनीतिक विवाद फिर तेज हो गया है।मामला मौजूदा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से अलग पुराने प्रशासनिक कार्यकाल से जुड़ा है। इसी कारण इस विषय पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी दो स्तरों पर सामने आ रही हैं। एक ओर विपक्षी नेता पुराने मामले की जांच को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ गंभीर सवाल के रूप में पेश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि जांच का संबंध उनके वर्तमान CEC पद से सीधे नहीं है।
बिनॉय विश्वम का बयान उस समय आया जब INDIA गठबंधन के विभिन्न दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विरोध कर रहे हैं। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त से जवाबदेही की मांग की है।मंगलवार को दिल्ली में विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च भी किया। पुलिस द्वारा उन्हें आगे बढ़ने से रोके जाने के बाद कई नेताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालय के पास विरोध जारी रखा। इस राजनीतिक माहौल के बीच बिनॉय विश्वम ने केरल की विजिलेंस जांच का मुद्दा उठाते हुए ज्ञानेश कुमार पर अपना हमला तेज किया।
CPI नेता का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था का नेतृत्व करने वाले अधिकारी पर यदि गंभीर आरोप हैं तो उन पर पारदर्शी तरीके से जांच होनी चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए और विपक्ष की ओर से की जा रही मांगों का समर्थन किया।विपक्षी दल पिछले कुछ समय से SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने और वोटर रजिस्ट्रेशन से जुड़े फैसलों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। कई विपक्षी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर चुके हैं।
दूसरी ओर चुनाव आयोग का रुख रहा है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है। आयोग के अनुसार मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या अन्य अपात्र प्रविष्टियों को हटाना और पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है।ऐसे में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ केरल में पुराने मामले को लेकर विजिलेंस जांच के आदेश ने पहले से जारी राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है। विपक्ष इस मुद्दे को चुनाव आयोग की विश्वसनीयता से जोड़ रहा है, जबकि जांच का वास्तविक दायरा 2006 के प्रशासनिक कार्यकाल से संबंधित बताया जा रहा है।
बिनॉय विश्वम ने अपने बयान में आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त का रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए।उनके इस बयान के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। CPI पहले भी चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर विपक्षी दलों के साथ आवाज उठाती रही है। अब केरल की जांच को लेकर पार्टी ने अपने हमले को और तीखा कर दिया है।
हालांकि कानूनी दृष्टि से विजिलेंस जांच का आदेश किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं होता। जांच एजेंसी को संबंधित दस्तावेजों, पुराने प्रशासनिक रिकॉर्ड और आरोपों से जुड़ी परिस्थितियों का परीक्षण करना होगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितना आधार है।फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद दो मोर्चों पर आगे बढ़ रहा है। एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली और SIR को लेकर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर केरल में उनके पुराने प्रशासनिक कार्यकाल से जुड़े मामले की विजिलेंस जांच को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।बिनॉय विश्वम के ताजा बयान ने इसी विवाद को और धार दी है। CPI नेता ने जांच का हवाला देते हुए ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि मामले की अंतिम सच्चाई विजिलेंस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से ही सामने आएगी।