कर्नाटक में 11 विदेशी नागरिकों के वोटर ID की जांच, FRO ने CEO कार्यालय से मांगी जानकारी
बेंगलुरु। कर्नाटक में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर चल रही जांच के बीच विदेशी नागरिकों के पास कथित तौर पर वोटर ID कार्ड और मतदान का अधिकार पाए जाने का मामला सामने आया है। फॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRO) ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय से ऐसे 11 विदेशी नागरिकों से संबंधित जानकारी मांगी है, जिनके नाम कर्नाटक में मतदाता पहचान पत्र और मतदान के अधिकार से जुड़े पाए गए हैं।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इन 11 विदेशी नागरिकों की पहचान तमिलनाडु में हुई है और उनके खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज बताए जा रहे हैं। शुरुआती जानकारी में उनके मूल रूप से श्रीलंका का नागरिक होने की बात सामने आई है। हालांकि, अधिकारियों के पास फिलहाल इन सभी लोगों की नागरिकता, पहचान और कर्नाटक में उनके मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
SIR के बीच सामने आया मामला
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब कर्नाटक में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत मतदाता सूची की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलत, दोहराए गए या अपात्र नामों की पहचान करना है।
इसी दौरान अधिकारियों का ध्यान उन 11 लोगों की ओर गया, जिनके बारे में विदेशी नागरिक होने की जानकारी सामने आई है, लेकिन उनके पास कथित तौर पर कर्नाटक के वोटर ID कार्ड मौजूद हैं। अब चुनाव अधिकारियों से इन लोगों के मतदाता रिकॉर्ड और मतदान से संबंधित जानकारी साझा करने को कहा गया है।
FRO की ओर से मांगी गई जानकारी के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन लोगों के नाम मतदाता सूची में कब और किस प्रक्रिया के तहत शामिल हुए। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि उनके वोटर ID कार्ड वास्तविक हैं या फर्जी तरीके से तैयार किए गए हैं।
क्या कभी डाला वोट?
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कथित विदेशी नागरिकों ने अपने नाम पर जारी वोटर ID का इस्तेमाल कभी मतदान के लिए किया या नहीं। अधिकारियों की ओर से उनके मतदान संबंधी रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
यदि यह पुष्टि होती है कि किसी विदेशी नागरिक ने भारतीय चुनाव में मतदाता के रूप में वोट डाला है, तो मामला केवल मतदाता पहचान पत्र तक सीमित नहीं रहेगा। इससे मतदाता सूची में नाम शामिल करने की प्रक्रिया, पहचान सत्यापन और मतदान व्यवस्था से जुड़े कई सवाल उठ सकते हैं।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन 11 लोगों में से किसी ने वास्तव में चुनाव में मतदान किया था या नहीं। जांच पूरी होने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
वोटर ID असली या नकली, इसकी भी जांच
अधिकारियों के सामने एक और अहम सवाल वोटर ID कार्ड की प्रामाणिकता का है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि इन लोगों के पास मौजूद कार्ड निर्वाचन विभाग द्वारा आधिकारिक तौर पर जारी किए गए हैं या किसी ने फर्जी दस्तावेज तैयार करके उनका इस्तेमाल किया।
इसके लिए मतदाता सूची के रिकॉर्ड, आवेदन से जुड़े दस्तावेज और पहचान संबंधी जानकारी का मिलान किया जा सकता है। यदि रिकॉर्ड में अनियमितता मिलती है, तो संबंधित अधिकारियों और दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया की भी जांच की आवश्यकता पड़ सकती है।
अधिकारियों के सामने यह भी पता लगाने की चुनौती होगी कि संबंधित लोगों ने मतदाता पहचान पत्र हासिल करने के लिए कौन से दस्तावेज जमा किए थे और उनका सत्यापन किस स्तर पर हुआ था।
श्रीलंका से संबंध की जानकारी
सूत्रों के अनुसार, इन 11 लोगों के मूल रूप से श्रीलंका का रहने वाला होने की बात कही जा रही है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि उनके बारे में अभी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उनकी वास्तविक नागरिकता और भारत में रहने की स्थिति की पुष्टि करना भी जांच का हिस्सा है।
FRO की भूमिका विदेशी नागरिकों के भारत में प्रवेश, ठहरने और संबंधित दस्तावेजों की निगरानी से जुड़ी होती है। ऐसे में विदेशी नागरिकों के कथित तौर पर मतदाता पहचान पत्र हासिल करने के मामले में FRO और चुनाव अधिकारियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता का सवाल
मतदाता सूची में विदेशी नागरिकों के नाम पाए जाने की खबर ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, अधिकारियों ने अभी यह निष्कर्ष नहीं निकाला है कि इन 11 मामलों में किसी तरह की चुनावी धोखाधड़ी हुई है।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ये नाम मतदाता सूची में किस तरह शामिल हुए और क्या किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ। यह भी देखा जाएगा कि यदि पहचान पत्र फर्जी पाए जाते हैं, तो उन्हें तैयार करने या इस्तेमाल करने के पीछे कौन लोग शामिल थे।
जांच के नतीजों पर नजर
SIR प्रक्रिया के दौरान सामने आया यह मामला चुनाव अधिकारियों के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मतदाता सूची में केवल पात्र भारतीय नागरिकों के नाम सुनिश्चित करना चुनाव प्रक्रिया का बुनियादी हिस्सा है। विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में होने की पुष्टि होने पर संबंधित रिकॉर्ड को नियमों के तहत जांचा और आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल FRO ने कर्नाटक के CEO कार्यालय से 11 लोगों के मतदाता पहचान और मतदान से जुड़े विवरण मांगे हैं। अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि उनके वोटर ID कार्ड वास्तविक हैं या फर्जी, मतदाता सूची में उनके नाम किस आधार पर दर्ज हुए और क्या उन्होंने कभी इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर मतदान किया।
जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों से ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ होगी। फिलहाल चुनाव अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करने की प्रक्रिया जारी है। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता या फर्जीवाड़े की पुष्टि होती है, तो उसके आधार पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता तय किया जाएगा।