गणेश चतुर्थी पर मांस बिक्री पूरी तरह बंद होटल और रेस्तरां भी आए दायरे में
मैसूर। गणेश चतुर्थी के अवसर पर मैसूर नगर निगम (एमसीसी) ने 14 सितंबर को अपने अधिकार क्षेत्र में मांस की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। इस एक दिवसीय प्रतिबंध के तहत मांस की दुकानों, चिकन-मटन स्टॉल, मछली बाजार और बूचड़खानों को बंद रखना होगा। होटल और रेस्तरां भी उस दिन मांस से तैयार कोई खाद्य सामग्री न तो बना सकेंगे और न ही ग्राहकों को परोस सकेंगे।
नगर निगम के मुताबिक, यह आदेश शहर में शांति और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने तथा गणेश चतुर्थी से जुड़े धार्मिक रीति-रिवाजों की पवित्रता का सम्मान करने के उद्देश्य से जारी किया गया है। संबंधित व्यापारियों, होटल संचालकों और रेस्तरां मालिकों को प्रतिबंध का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। निगम ने स्पष्ट किया है कि आदेश उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी इलाकों में लागू रहेगा।
गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा। इसी दिन घरों, मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। पूजा-अर्चना के साथ गणेश उत्सव की शुरुआत होगी। शहर में विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों की ओर से कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है। इसे देखते हुए नगर निगम ने मांस की बिक्री तथा मांसाहारी भोजन तैयार करने पर एक दिन के लिए रोक लगाने का फैसला किया है।
आदेश के अनुसार, 14 सितंबर को शहर में संचालित मांस की सभी लाइसेंसी दुकानें बंद रहेंगी। इसमें बकरे और भेड़ के मांस की दुकानें, चिकन सेंटर, मछली बेचने वाले स्टॉल तथा अन्य मांसाहारी सामग्री बेचने वाले प्रतिष्ठान शामिल हैं। निगम सीमा में संचालित बूचड़खानों में भी पशुवध की अनुमति नहीं होगी। संबंधित संचालकों से एक दिन पहले ही आवश्यक व्यवस्था कर दुकानें बंद रखने को कहा गया है।
प्रतिबंध केवल दुकानों और बाजारों तक सीमित नहीं रहेगा। नगर निगम ने होटल, ढाबे, भोजनालय और रेस्तरां संचालकों के लिए भी निर्देश जारी किए हैं। इन प्रतिष्ठानों में 14 सितंबर को किसी प्रकार का मांसाहारी भोजन तैयार करने, भंडारित सामग्री से व्यंजन बनाने या ग्राहकों को परोसने की अनुमति नहीं होगी। होटल संचालकों को आदेश लागू रहने के दौरान केवल शाकाहारी भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
नगर निगम ने मांस के परिवहन पर भी रोक लगाने की बात कही है। प्रतिबंधित दिन निगम क्षेत्र में मांस लेकर आने, एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने या अवैध रूप से उसका वितरण करने वालों के विरुद्ध नियमों के तहत कदम उठाए जाएंगे। स्थानीय स्तर पर सामान पहुंचाने वाले विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं को भी प्रतिबंध के दायरे में रखा गया है।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि कोई दुकानदार या होटल संचालक आदेश का उल्लंघन करते पाया गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। संबंधित दुकान या प्रतिष्ठान का व्यापारिक लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। इसके अतिरिक्त निगम के प्रचलित नियमों के अनुसार जुर्माना लगाने और मांस जब्त करने जैसी कार्रवाई भी संभव है।
आदेश के अनुपालन की निगरानी के लिए नगर निगम की टीमों को अलग-अलग क्षेत्रों का निरीक्षण करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग, बाजार शाखा और अन्य संबंधित अधिकारियों की टीमें मांस की दुकानों, मछली बाजारों, बूचड़खानों, होटलों तथा रेस्तरां की जांच कर सकती हैं। प्रतिबंध के बावजूद गतिविधि संचालित होने की सूचना मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठान पर कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम ने मांस विक्रेताओं और होटल कारोबारियों से प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यह रोक केवल एक दिन के लिए लागू की जा रही है। 14 सितंबर के बाद प्रतिष्ठान सामान्य नियमों और निर्धारित समय के अनुसार अपना कारोबार शुरू कर सकेंगे। निगम ने व्यापारियों से भ्रम या अफवाहों पर ध्यान न देते हुए आधिकारिक आदेश का पालन करने को कहा है।
गणेश चतुर्थी के दौरान शहर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में पहुंचते हैं। प्रतिमा स्थापना के साथ शोभायात्राएं और धार्मिक आयोजन भी होते हैं। कई क्षेत्रों में स्थानीय समितियां सामूहिक पूजा तथा प्रसाद वितरण की व्यवस्था करती हैं। प्रशासन की कोशिश है कि त्योहार के दौरान सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हों और किसी प्रकार का विवाद पैदा न हो।
आदेश जारी होने के बाद मांस विक्रेताओं को अपने कारोबार की योजना में बदलाव करना पड़ेगा। जिन व्यापारियों के पास जल्दी खराब होने वाली सामग्री रहती है, उन्हें प्रतिबंध की तारीख ध्यान में रखते हुए खरीद और भंडारण की व्यवस्था करनी होगी। होटल और रेस्तरां को भी पहले से ग्राहकों को सूचना देने तथा अपने मेन्यू में एक दिन के लिए बदलाव करने की जरूरत होगी।
निगम के आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए दुकानों और प्रतिष्ठानों को पहले से सूचना उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा। इससे व्यापारियों को सामान की आपूर्ति रोकने और आर्थिक नुकसान कम करने का समय मिल सकेगा। इसके साथ ही नागरिकों को भी यह जानकारी होनी चाहिए कि प्रतिबंध निर्धारित दिन के लिए है और इसका उद्देश्य त्योहार के दौरान व्यवस्था तथा सद्भाव बनाए रखना बताया गया है।
हालांकि, मांस की बिक्री पर इस तरह के प्रतिबंध को लेकर कई बार व्यक्तिगत खानपान की स्वतंत्रता और व्यापारियों की आजीविका से जुड़े सवाल भी उठते हैं। ऐसे में निगम के सामने आदेश को पारदर्शी, समान और निर्धारित अवधि तक लागू करने की जिम्मेदारी होगी। किसी विशेष व्यक्ति या प्रतिष्ठान के साथ भेदभाव न हो, इसके लिए निरीक्षण दलों को स्पष्ट दिशा-निर्देशों के तहत काम करना होगा।
नगर निगम ने नागरिकों से भी प्रतिबंध के पालन में सहयोग करने की अपील की है। यदि किसी क्षेत्र में चोरी-छिपे मांस की बिक्री या परिवहन दिखाई देता है तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी जा सकती है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार के विवाद से बचने को कहा है।
फिलहाल 14 सितंबर को लागू होने वाले आदेश को लेकर संबंधित विभाग तैयारी में जुटे हैं। कारोबारियों से अपने प्रतिष्ठान बंद रखने और होटल-रेस्तरां संचालकों से मांसाहारी व्यंजन नहीं परोसने को कहा गया है। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कदम उठाने के साथ लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी दी गई है।