बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। जनता दल सेक्युलर (JDS) की युवा इकाई के प्रदेश अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को राज्य की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए विधान सौधा के भीतर कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब सरकार के वरिष्ठ मंत्री खुद स्टिंग ऑपरेशन की आशंका जता रहे हैं और एक-दूसरे को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि सरकार के भीतर आखिर क्या चल रहा है। निखिल कुमारस्वामी ने कहा कि इस पूरे मामले का फैसला जनता पर छोड़ देना चाहिए। उन्होंने सरकार से कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की भी मांग की।
हासन जिले के चन्नारायपटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए निखिल कुमारस्वामी ने कहा कि सत्ताधारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने स्वयं विधानसभा के भीतर स्टिंग ऑपरेशन को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां हैं, जिनके कारण मंत्रियों को इस तरह की चेतावनी दी जा रही है।निखिल ने कहा कि यदि सरकार के मंत्रियों को स्टिंग ऑपरेशन से सावधान रहने के लिए कहा जा रहा है, तो यह केवल सामान्य चेतावनी नहीं मानी जा सकती। उनके अनुसार, इससे सरकार के भीतर चल रही गतिविधियों को लेकर सवाल उठते हैं।
निखिल कुमारस्वामी ने मंत्रियों की चेतावनी पर उठाए सवाल
निखिल कुमारस्वामी ने अपने बयान में कहा, "दुनिया जानती है कि स्टिंग ऑपरेशन के बारे में सबसे ज्यादा जानकारी किसे है। आपने देखा है कि उसी पार्टी के वरिष्ठ मंत्रियों, ऐसे अनुभवी नेता जो अक्सर विधान सौधा के गलियारों में घूमते रहे हैं, ने सदन के अंदर स्टिंग ऑपरेशन को लेकर चिंता जताई है। सदन में इसका रिकॉर्ड मौजूद है। आइए, इस मामले का फैसला जनता पर छोड़ दें।"उन्होंने आगे कहा कि जब मंत्रियों को चेतावनी दी जाती है कि सावधान रहें, कोई स्टिंग ऑपरेशन कर सकता है, तो इससे कई सवाल खड़े होते हैं।निखिल कुमारस्वामी ने पूछा कि क्या मंत्रियों को जनता के हित में काम करने पर ध्यान नहीं देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के भीतर व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता दिए जाने की आशंका पैदा हो रही है।हालांकि, निखिल कुमारस्वामी के इन बयानों को राजनीतिक आरोपों के रूप में देखा जा रहा है। कथित स्टिंग ऑपरेशन होने या उसमें किसी मंत्री की भूमिका के संबंध में स्वतंत्र रूप से पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आए हैं।
खुफिया विभाग की भूमिका पर भी सवाल
निखिल कुमारस्वामी ने राज्य के खुफिया विभाग की जिम्मेदारी को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि खुफिया विभाग मुख्यमंत्री के अधीन काम करता है और इस तरह के आरोप सामने आने पर संबंधित विभाग की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों तथा सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।उन्होंने कहा कि यह राज्य सरकार का मामला है और जवाब भी सरकार को ही देना चाहिए।निखिल ने सवाल उठाया कि यदि विधान सौधा या मंत्रियों से संबंधित गतिविधियों की गोपनीय निगरानी होने की आशंका है, तो इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है।उनके अनुसार, सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि स्टिंग ऑपरेशन को लेकर दी गई चेतावनियों का आधार क्या है और किन परिस्थितियों में मंत्रियों को सतर्क रहने के लिए कहा गया।
मुख्यमंत्री की चेतावनी के बाद बढ़ा विवाद
कर्नाटक में यह विवाद उस समय सामने आया, जब मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की ओर से मंत्रिमंडल के सदस्यों को संभावित स्टिंग ऑपरेशन के प्रति सावधान रहने की सलाह दिए जाने की खबरें सामने आईं।रिपोर्टों के अनुसार, 6 अक्टूबर को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री ने कुछ मंत्रियों को संभावित गुप्त रिकॉर्डिंग और स्टिंग ऑपरेशन को लेकर सतर्क रहने के लिए कहा था।बताया गया कि कुछ निजी एजेंसियों द्वारा मंत्रियों की बातचीत, बैठकों और गतिविधियों की गोपनीय रिकॉर्डिंग किए जाने की आशंका जताई गई थी।उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर और मंत्री एचसी बालकृष्ण ने भी मंत्रिमंडल की बैठक में इस विषय पर चर्चा होने की पुष्टि की थी। हालांकि, संभावित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
एचडी कुमारस्वामी ने भी लगाए गंभीर आरोप
इस विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने भी कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर आरोप लगाए हैं।बुधवार को बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कुमारस्वामी ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पद से हटाने के पीछे कथित स्टिंग ऑपरेशन की भूमिका रही थी।कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि डीके शिवकुमार ने एक कथित स्टिंग ऑपरेशन से प्राप्त सामग्री का इस्तेमाल कांग्रेस नेतृत्व के सामने किया था, जिसके बाद सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा।हालांकि, उन्होंने इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई पुष्ट साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज किया है।कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया एवं संचार विभाग के अध्यक्ष रमेश बाबू ने कुमारस्वामी के आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित और निराधार बताया।
सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज
कर्नाटक में कथित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़ा मामला अब सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है।जेडीएस नेताओं का कहना है कि मंत्रियों को दी गई चेतावनी के पीछे की परिस्थितियां स्पष्ट होनी चाहिए। उनका सवाल है कि यदि किसी प्रकार की गोपनीय रिकॉर्डिंग की जानकारी मिली है, तो सरकार को इससे संबंधित तथ्य सामने रखने चाहिए।दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं ने विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर आपत्ति जताई है। पार्टी ने मुख्यमंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए विपक्ष पर राजनीतिक विवाद पैदा करने का आरोप लगाया है।इस मामले में फिलहाल कथित स्टिंग ऑपरेशन की वास्तविकता, उसकी प्रकृति और इसमें किसी व्यक्ति या एजेंसी की संलिप्तता को लेकर पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
विधान सौधा में कथित गतिविधियों को लेकर सवाल
विधान सौधा कर्नाटक सरकार और राज्य की विधायी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में इसके भीतर कथित गोपनीय रिकॉर्डिंग या स्टिंग ऑपरेशन से संबंधित आशंकाओं ने राजनीतिक स्तर पर सवाल खड़े किए हैं।राजनीतिक दलों के बीच स्टिंग ऑपरेशन और गोपनीय रिकॉर्डिंग को लेकर पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में आरोपों की सत्यता स्थापित करने के लिए रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और संबंधित परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण होती है।निखिल कुमारस्वामी ने कहा कि जनता को इस विषय पर अपना निर्णय लेने देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की जिम्मेदारी सार्वजनिक हित में काम करना है और उससे जुड़े सवालों का जवाब देना आवश्यक है।
सरकार के जवाब पर टिकी नजर
कर्नाटक में कथित स्टिंग ऑपरेशन का विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब राज्य की राजनीति में कांग्रेस और जेडीएस के बीच कई मुद्दों पर मतभेद जारी हैं।निखिल कुमारस्वामी के बयान और एचडी कुमारस्वामी के आरोपों के बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार तथा कांग्रेस नेतृत्व पर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।हालांकि, कथित स्टिंग ऑपरेशन होने या उसके पीछे किसी विशेष व्यक्ति की भूमिका का दावा अभी प्रमाणित नहीं हुआ है।फिलहाल निखिल कुमारस्वामी ने सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग करते हुए कहा है कि इस पूरे मामले का फैसला जनता पर छोड़ देना चाहिए। अब देखना होगा कि राज्य सरकार कथित स्टिंग ऑपरेशन से संबंधित आशंकाओं और विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देती है।
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