बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र मंगलवार को भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) JD(S) अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे, जिसके चलते सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई। विपक्ष योजना, कार्यक्रम निगरानी और सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध खत्म करने के लिए बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक बुलाई गई थी, लेकिन इसमें भी कोई सहमति नहीं बन सकी। विपक्ष ने मंत्री बी. नागेंद्र को पद से हटाने की मांग दोहराई, जबकि सरकार की ओर से इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनी।

बैठक के बाद जब विधानसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो BJP विधायकों ने विरोध दर्ज कराने के लिए काले शॉल पहनकर सदन में प्रवेश किया। विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए सरकार पर सवाल उठाए और मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखा।

विपक्ष का आरोप, सरकार नहीं कर रही कार्रवाई

विपक्षी दलों का कहना है कि मंत्री बी. नागेंद्र से जुड़े मुद्दे पर सरकार को जवाब देना चाहिए और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्हें पद से हटाना चाहिए।

BJP नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार गंभीर मामलों पर जवाब देने से बच रही है। विपक्ष का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी, तब तक वे विधानसभा में अपना विरोध जारी रखेंगे।

वहीं, सत्तारूढ़ दल का कहना है कि विपक्ष सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है और जरूरी मुद्दों पर चर्चा नहीं होने दे रहा है।

मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने स्पीकर से की अपील

विपक्ष की नारेबाजी के बीच बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने विधानसभा अध्यक्ष जी.एस. पाटिल से आग्रह किया कि बिना पूर्व सूचना के की गई टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया जाए।

उन्होंने कहा कि विधानसभा की गरिमा बनाए रखने के लिए जरूरी है कि सभी सदस्य नियमों का पालन करें। उन्होंने अध्यक्ष से आग्रह किया कि सदन की कार्यवाही तय प्रक्रिया के अनुसार संचालित की जाए।

स्थगन प्रस्ताव को लेकर भी BJP नाराज

विधानसभा में एक अन्य मुद्दे को लेकर भी BJP विधायकों ने नाराजगी जताई। मामला JD(S) विधायक और पूर्व मंत्री एचडी रेवन्ना द्वारा सूखे के प्रभाव पर चर्चा के लिए लाए गए स्थगन प्रस्ताव से जुड़ा था।

स्पीकर जीएस पाटिल ने इस स्थगन प्रस्ताव को सामान्य चर्चा में बदल दिया था। BJP विधायकों ने इस फैसले का विरोध किया।

BJP विधायकों का तर्क था कि किसी स्थगन प्रस्ताव को सामान्य चर्चा में तब्दील करने का फैसला तब तक नहीं लिया जा सकता, जब तक संबंधित विधायक खुद इसे सदन के सामने रखने की सहमति न दें।

सदन में नियमों को लेकर बहस

इस मुद्दे पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बहस हुई। BJP नेताओं ने कहा कि विधानसभा की प्रक्रियाओं और नियमों का पालन किया जाना चाहिए।

वहीं, सरकार पक्ष ने कहा कि अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही संचालित करने और विषयों को उचित तरीके से आगे बढ़ाने का अधिकार है।

इस मुद्दे पर भी दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी, जिससे सदन का माहौल तनावपूर्ण बना रहा।

विधानसभा सत्र पर असर

लगातार दूसरे दिन हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही प्रभावित हुई। कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी। विपक्षी दलों ने साफ संकेत दिए हैं कि वे अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

वहीं, सरकार चाहती है कि सदन की कार्यवाही सामान्य तरीके से चले और राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हो।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा के अंदर बढ़ता गतिरोध आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। विपक्ष इस मुद्दे को लगातार उठाकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है।

आगे भी जारी रह सकता है टकराव

कर्नाटक विधानसभा में मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। विपक्ष जहां इसे जवाबदेही का मामला बता रहा है, वहीं सरकार इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति करार दे रही है।

आने वाले दिनों में विधानसभा की कार्यवाही किस तरह आगे बढ़ती है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर कोई समाधान निकलता है या नहीं।

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