बेंगलुरु। आयकर विभाग के अधिकारियों ने मंगलवार रात होसुर रोड पर एक SUV को रोककर करीब 9 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी जब्त की। बताया जा रहा है कि वाहन में तमिलनाडु का एक ज्वैलर सवार था और वह बेंगलुरु से होसुर की ओर जा रहा था। नकदी को लेकर संतोषजनक दस्तावेज या वैध स्रोत नहीं बताए जाने के बाद आयकर अधिकारियों ने उसे अपने कब्जे में ले लिया।
यह कार्रवाई बेंगलुरु के इलेक्ट्रॉनिक सिटी इलाके में की गई। आयकर विभाग को कथित तौर पर सूचना मिली थी कि बड़ी मात्रा में नकदी को गैर-कानूनी तरीके से तमिलनाडु की ओर ले जाया जा रहा है। सूचना मिलने के बाद विभाग के अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस की मदद से वाहन को रोकने की योजना बनाई।
गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार, बेंगलुरु में आयकर विभाग की यूनिट-22 के डिप्टी डायरेक्टर जगदीश को नकदी के अवैध परिवहन के बारे में जानकारी मिली थी। सूचना की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक सिटी पुलिस स्टेशन के नाइट पेट्रोलिंग स्टाफ से संपर्क किया और वाहन की तलाश शुरू की गई।
मंगलवार रात करीब 10:30 बजे पुलिस ने BETL टोल पार करने के बाद होसुर रोड पर एक सिग्नल के पास संदिग्ध SUV को रोक लिया। वाहन का नंबर KL 20 T 8629 बताया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, वाहन बेंगलुरु से होसुर की दिशा में जा रहा था।
वाहन की तलाशी के दौरान अधिकारियों को बड़ी मात्रा में नकदी मिली। शुरुआती जांच में नकदी की कुल राशि करीब 9 करोड़ रुपये बताई गई। इतनी बड़ी रकम के संबंध में वाहन में मौजूद लोगों से पूछताछ की गई।
दो लोगों को पुलिस स्टेशन ले जाया गया
SUV में दो लोग सवार थे। वाहन और दोनों लोगों को पूछताछ के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिटी पुलिस स्टेशन ले जाया गया। इसके बाद आयकर विभाग के अधिकारियों ने नकदी से जुड़े दस्तावेजों और उसके स्रोत के बारे में जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू की।
अधिकारियों के सामने मुख्य सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकदी कहां से आई और इसे बेंगलुरु से तमिलनाडु क्यों ले जाया जा रहा था। नकदी के वैध स्रोत और उसके इस्तेमाल से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
आयकर विभाग यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या जब्त रकम किसी कारोबारी लेनदेन से जुड़ी है या इसका संबंध किसी अन्य वित्तीय गतिविधि से है। जांच पूरी होने के बाद ही नकदी की वास्तविक प्रकृति और उसके स्रोत को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ज्वैलरी कारोबार से जुड़े व्यक्ति से पूछताछ
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, वाहन में सवार व्यक्ति तमिलनाडु का ज्वैलर बताया जा रहा है। इसी वजह से आयकर विभाग की जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना है कि क्या जब्त नकदी ज्वैलरी कारोबार से संबंधित है।
जांच अधिकारी कारोबारी रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, बिक्री और खरीद से जुड़े दस्तावेजों तथा अन्य वित्तीय कागजात की जांच कर सकते हैं। यदि नकदी का स्रोत वैध कारोबारी लेनदेन से जुड़ा पाया जाता है और उसके पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध होते हैं, तो आगे की कार्रवाई उसी आधार पर तय होगी। वहीं, यदि रकम का कोई संतोषजनक स्रोत नहीं मिलता है तो आयकर कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
चुनावी या अन्य वित्तीय गतिविधि से संबंध की जांच
इतनी बड़ी मात्रा में नकदी की बरामदगी के बाद जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि कहीं इसका संबंध किसी अवैध वित्तीय गतिविधि से तो नहीं है। हालांकि, फिलहाल अधिकारियों की ओर से रकम को किसी विशेष उद्देश्य से जोड़कर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि नकदी के परिवहन से जुड़े कोई दस्तावेज मौजूद थे या नहीं। वाहन में मौजूद लोगों के बयान और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
होसुर रोड पर रात में हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई रात के समय हुई, जब पुलिस का नियमित नाइट पेट्रोलिंग अभियान चल रहा था। आयकर विभाग की सूचना के बाद पुलिस टीम ने संदिग्ध वाहन को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। BETL टोल पार करने के बाद वाहन को सिग्नल के पास रोका गया।
स्थानीय पुलिस और आयकर विभाग के बीच समन्वय के चलते इतनी बड़ी रकम को कथित तौर पर तमिलनाडु ले जाने से पहले ही रोका जा सका। मामले की जांच अब आयकर विभाग के स्तर पर आगे बढ़ाई जा रही है।
नकदी के स्रोत की जांच अहम
करीब 9 करोड़ रुपये की नकदी की बरामदगी ने वित्तीय लेनदेन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इतनी बड़ी रकम को नकद रूप में एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने के पीछे वैध कारण और दस्तावेज होना आवश्यक है। यही वजह है कि आयकर अधिकारी रकम के स्रोत और संभावित उपयोग की जांच कर रहे हैं।
अधिकारियों के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि नकदी से संबंधित खातों और कारोबारी रिकॉर्ड में कोई विसंगति है या नहीं। यदि दस्तावेजों और वास्तविक नकदी के बीच अंतर मिलता है, तो मामला आगे जांच और कानूनी कार्रवाई की ओर बढ़ सकता है।
फिलहाल जब्त रकम आयकर विभाग के कब्जे में है और वाहन में सवार दोनों लोगों से पूछताछ जारी है। विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 9 करोड़ रुपये की यह नकदी किस स्रोत से आई थी और इसे होसुर की ओर क्यों ले जाया जा रहा था।
मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर तय की जाएगी। इस बरामदगी ने एक बार फिर अंतरराज्यीय मार्गों पर बड़ी मात्रा में नकदी के परिवहन की निगरानी को लेकर सुरक्षा और जांच एजेंसियों की भूमिका को रेखांकित किया है।