बेहतरीन निजी स्कूल अपनाएं सरकारी स्कूल, ग्रामीण बच्चों को भी मिले गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: CM
चित्रदुर्ग : कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने राज्य में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक नई पहल का सुझाव देते हुए कहा कि शहरी क्षेत्रों के प्रतिष्ठित निजी स्कूलों को उन सरकारी स्कूलों को गोद लेना चाहिए जहां शिक्षकों की कमी है। उन्होंने कहा कि यदि निजी स्कूल अपने संसाधनों और अनुभव का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों के विकास में करें, तो शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने शनिवार को चित्रदुर्ग जिले के हिरियूर स्थित वेदावती साइंस कॉलेज स्टेडियम में मीडिया से बातचीत के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच शिक्षा के स्तर में मौजूद अंतर को कम करना है, ताकि गांवों के बच्चों को भी उसी स्तर की शिक्षा मिल सके जो शहरों के प्रतिष्ठित निजी स्कूलों में उपलब्ध है।
शिक्षकों की कमी दूर करने पर जोर
सीएम शिवकुमार ने कहा कि राज्य के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में यदि सक्षम निजी स्कूल सामाजिक दायित्व के तहत आगे आएं और इन विद्यालयों में योग्य शिक्षकों की व्यवस्था करें, तो छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सकेगी।
उन्होंने कहा कि यह केवल शिक्षकों की नियुक्ति का मामला नहीं है, बल्कि शिक्षण की गुणवत्ता, आधुनिक शिक्षण पद्धति, डिजिटल संसाधनों और समग्र शैक्षणिक वातावरण को बेहतर बनाने का प्रयास भी होना चाहिए।
ग्रामीण बच्चों को शहरों की ओर न जाना पड़े
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त करने के लिए शहरों की ओर पलायन नहीं करना चाहिए। यदि गांवों के सरकारी स्कूलों को मजबूत बनाया जाए और वहां भी उच्च गुणवत्ता की शिक्षा उपलब्ध हो, तो बच्चों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर अवसर मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार केवल शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। राज्य सरकार चाहती है कि हर बच्चे को समान अवसर मिले, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में रहता हो।
निजी स्कूलों की आपत्तियों पर दिया जवाब
जब पत्रकारों ने निजी स्कूलों द्वारा सरकारी स्कूलों को गोद लेने के प्रस्ताव पर उठाई गई आपत्तियों के बारे में सवाल पूछा, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विषय पर वह सीधे संबंधित संस्थानों से बातचीत करेंगे।
उन्होंने कहा, "प्राइवेट स्कूलों को इस बारे में मुझे बताने दें, फिर मैं जवाब दूँगा। यह मेरे और उनके बीच का समझौता है। इसका मतलब यह नहीं है कि सभी निजी स्कूलों को सरकारी स्कूल गोद लेने होंगे। इसके लिए कुछ नियम और शर्तें तय की जाएंगी।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था स्वैच्छिक होगी और केवल वे संस्थान इसमें भाग लेंगे जो निर्धारित मानकों और शर्तों को पूरा करेंगे।
सीएसआर फंड का बेहतर उपयोग करने की अपील
मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत खर्च किए जाने वाले धन का उपयोग यदि सरकारी स्कूलों के विकास में किया जाए, तो प्राथमिक शिक्षा को मजबूत बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कई निजी संस्थान और कंपनियां सामाजिक कार्यों पर बड़ी राशि खर्च करती हैं। यदि इस धन का एक हिस्सा ग्रामीण सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं, स्मार्ट क्लास, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं और शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने में लगाया जाए, तो इसका सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा।
शिक्षा में साझेदारी का मॉडल
सीएम शिवकुमार ने कहा कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में साझेदारी के मॉडल को बढ़ावा देना चाहती है। उनका मानना है कि सरकार, निजी शैक्षणिक संस्थान और कॉरपोरेट क्षेत्र मिलकर काम करें तो सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है, लेकिन समाज और निजी संस्थानों की भागीदारी से यह लक्ष्य अधिक प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकता है।
ग्रामीण शिक्षा को मिलेगी नई दिशा
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यदि यह पहल सफल होती है तो राज्य के हजारों सरकारी स्कूलों को इसका लाभ मिलेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर सुधरेगा, छात्रों का सीखने का स्तर बेहतर होगा और भविष्य में उन्हें उच्च शिक्षा तथा रोजगार के अधिक अवसर प्राप्त होंगे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और आने वाले समय में ऐसे कई कदम उठाए जाएंगे, जिनसे सरकारी स्कूलों को अधिक सक्षम और आधुनिक बनाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है। सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच शैक्षणिक असमानता समाप्त हो तथा राज्य का प्रत्येक छात्र बेहतर भविष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सके।