बेंगलुरु: राजधानी बेंगलुरु में चिकन पसंद करने वालों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। शहर में इस महीने की 3 और 4 तारीख को हजारों चिकन की दुकानें बंद रहने वाली हैं। चिकन वेस्ट (मुर्गे के कचरे) को इकट्ठा करने और उसके लिए वसूली जा रही फीस के विरोध में चिकन दुकानदारों ने दो दिन के बंद का ऐलान किया है।
बताया जा रहा है कि बेंगलुरु के करीब 6 से 7 हजार चिकन दुकान मालिक इस विरोध में शामिल होंगे। दुकानदारों का आरोप है कि बैंगलोर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड (BSWML) की नई व्यवस्था से उनके कारोबार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
चिकन वेस्ट कलेक्शन नीति को लेकर विवाद
मामला चिकन दुकानों से निकलने वाले कचरे के निपटारे से जुड़ा है। चिकन काटने के बाद निकलने वाले पंख, हड्डियां और अन्य अवशेषों को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करने के लिए BSWML ने नई व्यवस्था लागू की है।
इसके तहत चिकन वेस्ट को इकट्ठा करने और उसका निपटारा करने के लिए निजी एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन अब यही व्यवस्था मीट व्यापारियों और प्रशासन के बीच विवाद का कारण बन गई है।
5 रुपये प्रति किलो फीस का विरोध
चिकन दुकान मालिकों का कहना है कि निजी एजेंसियां वेस्ट कलेक्शन के लिए उनसे 5 रुपये प्रति किलो के हिसाब से शुल्क वसूल रही हैं।
व्यापारियों का कहना है कि पहले ही कारोबार में कई तरह के खर्च बढ़ गए हैं। ऐसे में चिकन वेस्ट के लिए अतिरिक्त शुल्क देना उनके लिए आर्थिक परेशानी पैदा कर रहा है।
दुकानदारों ने मांग की है कि इस फीस व्यवस्था पर दोबारा विचार किया जाए और व्यापारियों को राहत दी जाए।
दुकानदारों ने किया दो दिन बंद का ऐलान
विरोध स्वरूप चिकन दुकान मालिकों ने 3 और 4 तारीख को दुकानें बंद रखने का फैसला किया है।
व्यापारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करना है। वे चाहते हैं कि BSWML और संबंधित एजेंसियां उनकी मांगों पर बातचीत करें और कोई समाधान निकाला जाए।
ग्राहकों पर पड़ सकता है असर
दो दिन के बंद का असर चिकन खरीदने वाले ग्राहकों पर भी पड़ सकता है। शहर में बड़ी संख्या में चिकन दुकानें बंद रहने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, यह साफ नहीं है कि बंद का असर पूरे शहर में किस स्तर तक रहेगा, लेकिन 6 से 7 हजार दुकानदारों के शामिल होने की बात कही जा रही है।
BSWML की व्यवस्था का उद्देश्य
BSWML का उद्देश्य चिकन वेस्ट को खुले में फेंके जाने से रोकना और उसका सही तरीके से निपटारा करना है।
शहर में मीट दुकानों से निकलने वाले कचरे को यदि सही तरीके से नष्ट नहीं किया जाए तो इससे बदबू, गंदगी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए वेस्ट कलेक्शन की व्यवस्था लागू की गई है।
व्यापारियों का कहना है नहीं मिल रही राहत
चिकन दुकानदारों का कहना है कि वे भी साफ-सफाई और कचरे के सही निपटारे के पक्ष में हैं, लेकिन फीस की मौजूदा व्यवस्था उनके लिए मुश्किल पैदा कर रही है।
उनका कहना है कि सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए जिसमें व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े और शहर की स्वच्छता व्यवस्था भी बेहतर बनी रहे।
समाधान के लिए बातचीत की उम्मीद
मामले को देखते हुए अब व्यापारियों और प्रशासन के बीच बातचीत की संभावना जताई जा रही है।
अगर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है तो बंद को लेकर स्थिति बदल सकती है। फिलहाल चिकन दुकानदार अपने फैसले पर कायम हैं और 3 व 4 तारीख को विरोध प्रदर्शन के तौर पर दुकानें बंद रखने की तैयारी कर रहे हैं।
बेंगलुरु में चिकन वेस्ट कलेक्शन फीस को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब बड़े व्यापारिक विरोध में बदल गया है। आने वाले दिनों में प्रशासन और व्यापारियों के बीच बातचीत से ही इस मामले का समाधान निकलने की उम्मीद है।