बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में यातायात जाम की समस्या कम करने के लिए प्रस्तावित हेब्बल शॉर्ट टनल परियोजना को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। बेंगलुरु साउथ के सांसद तेजस्वी सूर्या ने करीब दो किलोमीटर लंबी इस परियोजना को अवैज्ञानिक बताते हुए इसकी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस परियोजना पर 1,350 करोड़ रुपये खर्च करना सार्वजनिक धन की बर्बादी है। सूर्या ने यह भी कहा कि निर्माण के लिए 1,128 पेड़ों को काटना पड़ सकता है, जिससे पर्यावरण और हेब्बल झील के आसपास के क्षेत्र पर असर पड़ने की आशंका है।

तेजस्वी सूर्या ने परियोजना की उपयोगिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर वाहन जंक्शन पर लगने वाले जाम से बचने के लिए सुरंग का इस्तेमाल करते भी हैं, तो उन्हें महज दो किलोमीटर आगे उसी सड़क पर वापस आना होगा। ऐसे में उन्होंने सवाल किया कि क्या इस तरह की छोटी सुरंग यातायात की समस्या का स्थायी समाधान दे पाएगी।

यह परियोजना बेंगलुरु के हेब्बल इलाके में यातायात दबाव कम करने के उद्देश्य से प्रस्तावित की गई है। हालांकि, इसकी लागत, पेड़ों की कटाई, जल निकासी और सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी योजनाओं के साथ तालमेल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

1,350 करोड़ रुपये की लागत पर उठाए सवाल

तेजस्वी सूर्या ने प्रस्तावित हेब्बल शॉर्ट टनल परियोजना की अनुमानित लागत पर सवाल उठाते हुए इसे सरकारी धन का अनुचित इस्तेमाल बताया। उनके मुताबिक, करीब दो किलोमीटर लंबी सुरंग पर 1,350 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना की उपयोगिता पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

सांसद का कहना है कि इतनी बड़ी राशि खर्च करने से पहले यह आकलन किया जाना चाहिए कि परियोजना से यातायात को वास्तव में कितना लाभ मिलेगा। उन्होंने परियोजना को अवैज्ञानिक बताते हुए इसे रोकने या इसकी समीक्षा करने की जरूरत पर जोर दिया है।

हालांकि, परियोजना के समर्थकों का पक्ष और सरकार की ओर से लागत तथा संभावित यातायात लाभ का विस्तृत स्पष्टीकरण उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है। इसलिए परियोजना के वास्तविक लाभ और खर्च की उपयुक्तता का अंतिम आकलन विस्तृत तकनीकी अध्ययन के आधार पर ही किया जा सकता है।

1,128 पेड़ों की कटाई पर जताई चिंता

तेजस्वी सूर्या ने दावा किया कि हेब्बल शॉर्ट टनल परियोजना के निर्माण के लिए 1,128 पेड़ों को काटना पड़ सकता है। उन्होंने इसे पर्यावरण की दृष्टि से गंभीर मुद्दा बताया। उनके मुताबिक, इतने बड़े स्तर पर पेड़ों की कटाई से आसपास के हरित क्षेत्र और प्राकृतिक वातावरण पर असर पड़ सकता है।

बेंगलुरु जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में पेड़ों और जलाशयों का संरक्षण शहरी नियोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में किसी बड़ी आधारभूत संरचना परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई की जरूरत होने पर उसके पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन जरूरी होता है।

सूर्या ने सवाल उठाया कि यातायात की समस्या का समाधान करने के लिए क्या ऐसे विकल्पों पर पर्याप्त विचार किया गया है, जिनसे पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचे। हालांकि, 1,128 पेड़ों की कटाई का आंकड़ा सांसद की ओर से उठाया गया दावा है। परियोजना के तहत अंतिम रूप से कितने पेड़ हटाए जाएंगे, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

हेब्बल झील में बाढ़ और भूजल को लेकर आशंका

सांसद ने परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों पर सवाल उठाते हुए हेब्बल झील के आसपास बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका भी जताई। उन्होंने कहा कि सुरंग निर्माण से भूजल पर भी असर पड़ सकता है।

हेब्बल झील बेंगलुरु के महत्वपूर्ण जलाशयों में शामिल है। ऐसे क्षेत्रों के आसपास बड़े निर्माण कार्यों के दौरान पानी के प्राकृतिक प्रवाह, जल निकासी और भूमिगत जलधाराओं पर संभावित प्रभावों की जांच महत्वपूर्ण होती है।

सूर्या ने परियोजना की वैज्ञानिक समीक्षा की जरूरत पर जोर दिया है। इससे पहले भी हेब्बल शॉर्ट टनल को लेकर जलाशय के प्रवाह, भूजल और यातायात व्यवस्था पर संभावित असर को लेकर आपत्तियां उठती रही हैं।

हालांकि, परियोजना से बाढ़ का खतरा वास्तव में कितना बढ़ेगा या भूजल पर किस तरह का प्रभाव पड़ेगा, इसे लेकर निष्कर्ष संबंधित वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययनों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

दो किलोमीटर आगे फिर उसी सड़क पर लौटेंगे वाहन

तेजस्वी सूर्या ने सुरंग की उपयोगिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि वाहन अगर हेब्बल जंक्शन के जाम से बचकर सुरंग से निकल भी जाते हैं, तो करीब दो किलोमीटर आगे उन्हें उसी सड़क पर वापस आना होगा। उनके मुताबिक, यदि आगे की सड़क पर यातायात का दबाव बना रहता है, तो जंक्शन से जाम हटाने का लाभ सीमित हो सकता है।

उन्होंने परियोजना की योजना बनाते समय वाहन आवागमन, सुरंग के प्रवेश और निकास बिंदुओं तथा आगे के सड़क नेटवर्क पर पड़ने वाले प्रभावों का सही आकलन करने की जरूरत बताई।

यातायात विशेषज्ञों के लिए किसी सुरंग की उपयोगिता का आकलन केवल उसकी लंबाई से नहीं, बल्कि आसपास की सड़कों की क्षमता, वाहनों की संख्या और प्रवेश-निकास की व्यवस्था से भी जुड़ा होता है। इसलिए परियोजना से यातायात में कितना सुधार होगा, यह संबंधित तकनीकी आंकड़ों और अध्ययन से स्पष्ट होना चाहिए।

फ्लाईओवर योजना और ट्रैफिक जाम पर भी विवाद

राज्य सरकार यातायात जाम कम करने के लिए एक फ्लाईओवर कॉरिडोर बनाने की भी योजना बना रही है। इसी संदर्भ में सूर्या ने आशंका जताई है कि शॉर्ट टनल परियोजना से जाम समाप्त होने के बजाय आसपास के हिस्सों में यातायात का दबाव और बढ़ सकता है।

बेंगलुरु में सार्वजनिक परिवहन के विस्तार को लेकर भी बहस जारी है। सूर्या ने मेट्रो और उपनगरीय रेल जैसी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता देने की जरूरत पर जोर दिया है। उनका तर्क है कि यातायात समस्या के समाधान में सार्वजनिक परिवहन की क्षमता का अधिक प्रभावी इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

फिलहाल हेब्बल शॉर्ट टनल परियोजना की लागत, पेड़ों की कटाई, जलाशय पर प्रभाव और यातायात लाभ को लेकर विवाद बना हुआ है। तेजस्वी सूर्या ने परियोजना को अवैज्ञानिक बताते हुए इसकी समीक्षा की मांग उठाई है। अब परियोजना के भविष्य को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया और तकनीकी अध्ययनों के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

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