बेंगलुरु। सरकारी पार्कों की जमीन के सार्वजनिक इस्तेमाल के नाम पर बिक्री की अनुमति देने के कर्नाटक सरकार के प्रस्ताव का विरोध तेज हो गया है। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कर्नाटक कैबिनेट की ओर से सरकारी पार्क (संरक्षण) अधिनियम, 1975 में संशोधन को मंजूरी दिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस फैसले को चिंताजनक बताते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को पत्र लिखकर प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
सरकार की ओर से मंजूर किए गए संशोधन विधेयक के तहत सरकारी पार्कों की कुल भूमि के पांच प्रतिशत हिस्से को सार्वजनिक उपयोग के लिए बेचे जाने की अनुमति देने का प्रावधान किया गया है। इसी प्रावधान को लेकर तेजस्वी सूर्या ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शहरों में खुले और हरित क्षेत्रों की उपलब्धता पहले ही सीमित है और ऐसे में पार्कों की जमीन को बिक्री के दायरे में लाना भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकता है।
भाजपा सांसद ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में इस प्रस्ताव पर दोबारा विचार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक पार्क केवल खाली जमीन के टुकड़े नहीं हैं, बल्कि शहरों के पर्यावरणीय संतुलन और नागरिकों के स्वस्थ जीवन के लिए बेहद जरूरी हैं। पार्कों में लोग सुबह-शाम टहलने, व्यायाम करने और बच्चों के साथ समय बिताने जाते हैं। ऐसे खुले स्थान शहरी जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
तेजस्वी सूर्या ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए राज्य के लोगों से भी प्रतिक्रिया मांगी। उन्होंने पूछा कि आखिर लोगों का जमीर उन्हें सरकारी पार्कों की जमीन को बेचने की अनुमति देने वाले ऐसे फैसले को स्वीकार करने की इजाजत कैसे देगा। सांसद के इस बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
सांसद का तर्क है कि एक बार सार्वजनिक पार्क की जमीन किसी अन्य उपयोग के लिए चली गई तो भविष्य में उसे दोबारा हरित क्षेत्र में बदलना मुश्किल होगा। बढ़ती आबादी और तेजी से हो रहे शहरीकरण के बीच खुले स्थानों की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मौजूदा पार्कों की जमीन का संरक्षण करना सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
उन्होंने सरकार से यह भी आग्रह किया कि किसी भी तरह के संशोधन को लागू करने से पहले इसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का व्यापक अध्ययन किया जाए। स्थानीय नागरिकों, पर्यावरण विशेषज्ञों और शहरी नियोजन से जुड़े विशेषज्ञों की राय भी ली जानी चाहिए। उनका कहना है कि केवल वर्तमान जरूरतों को देखते हुए लिया गया फैसला आने वाली पीढ़ियों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
कर्नाटक में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण पार्क और खुले स्थान पहले से ही महत्वपूर्ण मुद्दा हैं। खासतौर पर बेंगलुरु जैसे महानगर में जनसंख्या और यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सार्वजनिक पार्क लोगों को प्रदूषण और भीड़भाड़ के बीच राहत देने वाले स्थान उपलब्ध कराते हैं। इन्हीं कारणों से पार्कों की जमीन से जुड़े किसी भी बदलाव को लेकर नागरिकों में संवेदनशीलता रहती है।
तेजस्वी सूर्या ने अपने विरोध के जरिए सरकार के फैसले को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि विधेयक के प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए और पार्कों की जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि सरकार को विकास और सार्वजनिक सुविधाओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए।
भाजपा सांसद के विरोध के बाद सरकार के सामने इस प्रस्ताव को लेकर विपक्षी सवालों का जवाब देने की चुनौती भी बढ़ सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से इस संशोधन को लेकर विस्तृत प्रतिक्रिया और पांच प्रतिशत जमीन की बिक्री के प्रावधान के पीछे बताए गए कारणों पर अंतिम स्थिति सामने आना बाकी है।
तेजस्वी सूर्या ने यह मुद्दा ऐसे समय उठाया है जब शहरों में हरित क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थानों के संरक्षण को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। पर्यावरणविदों का भी लंबे समय से कहना रहा है कि शहरी विकास की योजनाओं में पेड़-पौधों और खुले क्षेत्रों के संरक्षण को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। पार्कों की जमीन का इस्तेमाल बदलने से पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।
सांसद ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि सरकार इस प्रस्ताव को जल्दबाजी में आगे न बढ़ाए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े किसी भी फैसले में पारदर्शिता और व्यापक जनहित को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनके मुताबिक, पार्कों का उद्देश्य नागरिकों को खुला और हरित वातावरण उपलब्ध कराना है और इसे व्यावसायिक या अन्य उपयोग के लिए सीमित करने से पहले गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
इस पूरे विवाद में अब सरकार की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। यदि संशोधन विधेयक विधानसभा में लाया जाता है तो वहां भी इस मुद्दे पर चर्चा और राजनीतिक बहस होने की संभावना है। भाजपा इसे जनहित और पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा बनाकर सरकार को घेर सकती है।
फिलहाल तेजस्वी सूर्या के विरोध ने सरकारी पार्कों की जमीन के उपयोग और संरक्षण को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सांसद ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पांच प्रतिशत पार्क भूमि को बिक्री की अनुमति देने वाले प्रावधान के पक्ष में नहीं हैं। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र के जरिए उन्होंने सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। अब यह देखना होगा कि सरकार इस आपत्ति पर क्या रुख अपनाती है और प्रस्तावित संशोधन को लेकर आगे क्या फैसला लिया जाता है।