बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुविधा का दायरा बढ़ाते हुए आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना-मुख्यमंत्री आरोग्य कर्नाटक (AB-PMJAY-CM’s ArK) में असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) से जुड़े उपचारों को शामिल करने का फैसला किया है। इस कदम के बाद पात्र परिवारों को IVF, ICSI और FET जैसे प्रजनन उपचारों की सुविधा योजना के तहत मिल सकेगी।
सरकार का यह फैसला उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो आर्थिक कारणों से महंगे प्रजनन उपचार का खर्च वहन नहीं कर पाते। ART उपचार की लागत आम परिवारों के लिए काफी अधिक हो सकती है। ऐसे में सरकारी स्वास्थ्य योजना के दायरे में इन सेवाओं को लाने से जरूरतमंद दंपतियों को बड़ी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य मंत्री ने दी जानकारी
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर ने कर्नाटक विधान परिषद में MLC डॉ. धनंजय सरजी के सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने AB-PMJAY-CM’s ArK योजना के तहत ART उपचारों को शामिल किया है।
सरकार के इस फैसले के तहत पात्र लाभार्थियों को विभिन्न प्रकार की प्रजनन संबंधी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इनमें इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF), इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (ICSI) और फ्रोजन एम्ब्रियो ट्रांसफर (FET) जैसे उपचार शामिल हैं।
इन तकनीकों का इस्तेमाल उन दंपतियों के उपचार में किया जाता है जिन्हें सामान्य तरीके से गर्भधारण करने में कठिनाई होती है। उपचार की प्रक्रिया जटिल होने के साथ-साथ महंगी भी हो सकती है, जिसके कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सुविधा हासिल करना मुश्किल होता है।
एक साल के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरुआत
सरकार ने इस पहल को शुरुआती तौर पर एक साल की पायलट योजना के रूप में लागू किया है। पहले चरण में 120 प्रायोरिटी हाउसहोल्ड (PHH) और गरीबी रेखा से नीचे (BPL) राशन कार्ड धारक परिवारों को इसका लाभ दिया जाएगा।
पायलट परियोजना का उद्देश्य योजना की व्यवहारिकता का आकलन करना और यह देखना है कि पात्र परिवारों को ART सेवाएं किस तरह उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इस दौरान उपचार की मांग, मरीजों की संख्या, चिकित्सा परिणाम और योजना के संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का मूल्यांकन किया जा सकता है।
यदि पायलट परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में इसके दायरे को बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है। इससे अधिक संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्रजनन उपचार की सुविधा उपलब्ध होने का रास्ता खुल सकता है।
IVF और अन्य उपचार क्या हैं?
IVF यानी इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन ऐसी प्रक्रिया है जिसमें महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को प्रयोगशाला में निषेचित किया जाता है। इसके बाद विकसित भ्रूण को महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है।
वहीं, ICSI में एक शुक्राणु को सीधे अंडाणु में इंजेक्ट किया जाता है। यह तकनीक कुछ विशेष प्रकार की पुरुष बांझपन संबंधी समस्याओं के मामलों में उपयोग की जाती है।
FET यानी फ्रोजन एम्ब्रियो ट्रांसफर में पहले से संरक्षित किए गए भ्रूण को बाद में महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है। ART के तहत उपचार का चुनाव मरीज की चिकित्सकीय स्थिति और डॉक्टर की सलाह के आधार पर किया जाता है।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए महत्वपूर्ण कदम
ART उपचार को सरकारी स्वास्थ्य योजना में शामिल करने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को महंगे उपचार का पूरा खर्च खुद नहीं उठाना पड़ेगा। कई परिवार प्रजनन संबंधी समस्याओं के बावजूद इलाज इसलिए नहीं करा पाते क्योंकि निजी अस्पतालों में इसकी लागत उनकी आर्थिक क्षमता से बाहर होती है।
सरकारी योजना के तहत इन उपचारों को शामिल किए जाने से पात्र परिवारों के लिए चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच आसान हो सकती है। इससे आर्थिक स्थिति के कारण इलाज से वंचित रहने वाले दंपतियों को उम्मीद मिलेगी।
सरकार का यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं को केवल गंभीर बीमारियों के इलाज तक सीमित रखने के बजाय प्रजनन स्वास्थ्य को भी व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
योजना के तहत पात्रता महत्वपूर्ण
हालांकि, ART उपचार का लाभ सभी लोगों को स्वतः नहीं मिलेगा। पहले चरण में इसे विशेष रूप से PHH और BPL राशन कार्ड धारकों के लिए लागू किया गया है। लाभार्थियों को योजना के तहत निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा।
सरकार की ओर से पायलट चरण में लाभार्थियों की संख्या 120 तय की गई है। इसलिए शुरुआती दौर में उपचार की सुविधा सीमित संख्या में परिवारों तक पहुंचेगी। पायलट परियोजना के अनुभव के आधार पर भविष्य में पात्र लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने का फैसला लिया जा सकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में कदम
कर्नाटक सरकार पहले से ही AB-PMJAY-CM’s ArK के माध्यम से पात्र परिवारों को विभिन्न स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही है। अब ART उपचारों को इसमें शामिल करने से योजना का दायरा और व्यापक हो गया है।
यह फैसला ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बांझपन और उससे संबंधित उपचार को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के विकास ने ऐसे दंपतियों के लिए उपचार के विकल्प बढ़ाए हैं, लेकिन इनकी लागत अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
सरकार का प्रयास है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी आधुनिक चिकित्सा तकनीक का लाभ मिल सके। ART को योजना में शामिल करना इसी दिशा में एक कदम है।
पायलट योजना के परिणाम पर रहेगी नजर
अब सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि एक साल की पायलट परियोजना किस तरह काम करती है। सरकार को इसके दौरान मरीजों की जरूरत, उपचार की सफलता, लागत और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता जैसे पहलुओं का आकलन करना होगा।
यदि पायलट परियोजना से सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं तो ART सेवाओं को बड़े स्तर पर लागू करने का रास्ता साफ हो सकता है। इससे भविष्य में अधिक PHH और BPL परिवारों को IVF और अन्य प्रजनन उपचार उपलब्ध कराने की संभावना बढ़ेगी।
फिलहाल 120 पात्र परिवारों के लिए शुरू की गई यह पहल कर्नाटक में आर्थिक रूप से कमजोर दंपतियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा के रूप में देखी जा रही है। सरकार का यह कदम प्रजनन उपचार को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में अहम साबित हो सकता है।