कर्नाटक की जेल व्यवस्था में बदलाव की तैयारी कानूनी सहायता को मिलेगा बढ़ावा
बेंगलुरु। कर्नाटक के जेल और सुधारात्मक सेवा विभाग ने जेल सुधारों को मजबूत करने और कैदियों को बेहतर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU), बेंगलुरु के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया है।यह समझौता 18 सितंबर को बेंगलुरु स्थित जेल मुख्यालय में हुआ। इसके तहत NLSIU की क्रिमिनल जस्टिस क्लिनिक जेलों में बंद कैदियों को कानूनी मदद, शोध और सुधारात्मक नीतियां तैयार करने में सहयोग करेगी।
कैदियों को मिलेगी कानूनी सहायता
समझौते के अनुसार, NLSIU की क्रिमिनल जस्टिस क्लिनिक अपने वकीलों, छात्रों और शोधकर्ताओं के माध्यम से जेलों में कई महत्वपूर्ण कार्य करेगी।क्लिनिक ऐसे बुजुर्ग कैदियों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कैदियों की पहचान करेगी, जिन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत रिहाई में सहायता की जरूरत हो सकती है।इसके अलावा जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर विचाराधीन कैदियों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का काम भी किया जाएगा।
बुजुर्ग और गंभीर बीमार कैदियों की रिहाई पर मदद
MoU के तहत NLSIU जेल विभाग को बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार कैदियों की समय से पहले रिहाई से जुड़ी नीति तैयार करने में सहयोग करेगा।यह काम सुप्रीम कोर्ट के NALSA बनाम भारत संघ मामले में दिए गए निर्देशों के अनुरूप किया जाएगा।
जेल नीतियों पर होगा शोध
NLSIU कर्नाटक में जेल व्यवस्था से जुड़े कानूनों और नीतियों पर शोध में भी मदद करेगा।इसके तहत जेल सुधार, प्रशासनिक व्यवस्था और कैदियों से जुड़े अन्य मुद्दों पर अध्ययन कर सुझाव दिए जाएंगे।
जेल कर्मचारियों को भी मिलेगा प्रशिक्षण
समझौते के तहत जेल कर्मचारियों, पैरासोशल वर्कर्स और जेल से जुड़े कानूनी कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।NLSIU छात्रों और जेल अधिकारियों को भी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा।
जेल सुधारों को लेकर सरकार का फोकस
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने इससे पहले जेल सुधारों की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने जेलों में भीड़, कैदियों की निगरानी, मानसिक स्वास्थ्य जांच और आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी चुनौतियों का जिक्र किया था।उन्होंने कहा था कि सुधारात्मक संस्थानों में बेहतर व्यवस्था के लिए व्यापक स्तर पर बदलाव जरूरी हैं।
जेलों में भीड़ और सुरक्षा पर चर्चा
गृह मंत्री ने जेल प्रशासन से जुड़े मुद्दों में कैदियों की संख्या बढ़ने, निगरानी व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरे और जेलों में सामान की जांच प्रक्रिया जैसे विषयों का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि जेलों में आने वाली सामग्री, मुलाकातियों की जांच और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य पर जोर
जेल सुधारों में कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कई बार कैदियों के व्यवहार पर उनके पुराने अनुभवों और परिस्थितियों का असर पड़ता है।ऐसे मामलों में काउंसलिंग और पुनर्वास कार्यक्रम मददगार साबित हो सकते हैं।
MoU से जेल व्यवस्था में सुधार की उम्मीद
कर्नाटक जेल विभाग और NLSIU के बीच हुआ यह समझौता जेल प्रशासन को अधिक प्रभावी और मानवीय बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।कानूनी सहायता, प्रशिक्षण, शोध और नीति निर्माण के जरिए जेल व्यवस्था में सुधार लाने का प्रयास किया जाएगा।
अब इस साझेदारी के तहत शुरू होने वाले कार्यक्रमों और उनके प्रभाव पर नजर रहेगी। यह पहल कैदियों के अधिकारों की रक्षा और सुधारात्मक न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।