बेंगलुरु। कर्नाटक में उपभोक्ताओं को दूध की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है। राज्य की प्रमुख दूध यूनियनों ने नंदिनी दूध की कीमत में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक वृद्धि करने का प्रस्ताव राज्य सरकार और कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) के सामने रखा है।
दूध यूनियनों का कहना है कि डेयरी किसानों की मौजूदा आर्थिक स्थिति और उत्पादन लागत को देखते हुए कीमत बढ़ाना जरूरी हो गया है। कर्नाटक मिल्क प्रोड्यूसर्स फेडरेशन (KMF) और बेंगलुरु मिल्क फेडरेशन (BAMUL) ने संयुक्त रूप से यह मांग रखी है।
बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में BAMUL रामनगर निर्वाचन क्षेत्र के निदेशक पी. नागराजू ने कहा कि डेयरी किसान और दूध यूनियन लंबे समय से आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को राहत देने और डेयरी क्षेत्र को नुकसान से बचाने के लिए नंदिनी दूध की कीमत में तत्काल बढ़ोतरी की आवश्यकता है।
उन्होंने मांग की कि दूध की कीमत में कम से कम 8 से 10 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की जाए। यूनियनों का कहना है कि दूध उत्पादन में आने वाली लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों और डेयरी संगठनों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
दूध यूनियनों ने राज्य सरकार को इस मांग पर विचार करने के लिए समय सीमा भी दी है। उन्होंने कहा है कि यदि सरकार जल्द फैसला नहीं लेती है तो राज्यभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा।
यूनियनों के अनुसार, किसानों को उचित मूल्य दिलाना जरूरी है, क्योंकि दूध उत्पादन से जुड़े खर्चों में बढ़ोतरी हुई है। पशुओं के चारे, रखरखाव और अन्य खर्च बढ़ने से डेयरी किसानों की आय प्रभावित हो रही है।
दूध संघों का कहना है कि कीमत बढ़ोतरी से मिलने वाली अतिरिक्त राशि का लाभ किसानों तक पहुंचाया जाना चाहिए। उनका उद्देश्य डेयरी क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत करना और दूध उत्पादन को बढ़ावा देना है।
वहीं, दूध की कीमत बढ़ने की संभावना से आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त खर्च का असर पड़ सकता है। नंदिनी दूध कर्नाटक में बड़ी संख्या में लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है और कीमत में बदलाव का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ सकता है।
दूध यूनियनों ने सरकार से किसानों और उपभोक्ताओं के हितों के बीच संतुलन बनाते हुए निर्णय लेने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि किसानों को उचित कीमत नहीं मिलेगी तो डेयरी क्षेत्र पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
इसके अलावा किसान संगठनों ने 22 सितंबर को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी की है। इस प्रदर्शन के जरिए वे सरकार से दूध की कीमत बढ़ाने और किसानों की समस्याओं के समाधान की मांग करेंगे।
कर्नाटक में दूध की कीमतों को लेकर इससे पहले भी कई बार चर्चा होती रही है। राज्य सरकार और KMF समय-समय पर दूध की कीमत, किसानों को मिलने वाले भुगतान और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए फैसले लेते रहे हैं।
फिलहाल दूध यूनियनों के प्रस्ताव पर राज्य सरकार और KMF की ओर से अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। अब सभी की नजरें सरकार के रुख पर टिकी हैं।
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो नंदिनी दूध की नई कीमतें लागू हो सकती हैं। वहीं, सरकार को यह भी ध्यान रखना होगा कि कीमत वृद्धि से आम उपभोक्ताओं पर कितना प्रभाव पड़ेगा।
दूध यूनियनों की मांग और किसान संगठनों के विरोध के बीच आने वाले दिनों में कर्नाटक में नंदिनी दूध की कीमतों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।