बेंगलुरु। कैदियों को रिहाई के बाद आत्मनिर्भर जीवन जीने के लिए तैयार करने और सरकार के लिए राजस्व जुटाने के उद्देश्य से बैंगलोर सेंट्रल जेल (परप्पना अग्रहारा) में एक नई पहल शुरू की गई है। जेल परिसर में 'नवा संकल्प बेकरी' नाम की नई बेकरी यूनिट का शुभारंभ किया गया है।

इस बेकरी यूनिट का उद्घाटन जेल और सुधार सेवाओं के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) आलोक कुमार ने 17 सितंबर को किया। इस पहल का उद्देश्य जेल में बंद कैदियों को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार का अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे भविष्य में समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।

इसके साथ ही HCL फाउंडेशन के सहयोग से परप्पना अग्रहारा की मैक्सिमम सिक्योरिटी जेल में 'नवा संकल्प बेकरी ऑन व्हील्स' यानी मोबाइल बेकरी सेवा की भी शुरुआत की गई है।

जेल प्रशासन के अनुसार, यह पहल सुधारात्मक सेवाओं का हिस्सा है, जिसमें कैदियों को केवल सजा भुगतने वाले व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि कौशल विकसित करने वाले नागरिक के रूप में तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।

'नवा संकल्प बेकरी' के माध्यम से कैदियों को बेकरी उत्पाद तैयार करने, पैकेजिंग और बिक्री से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। इससे उन्हें एक नया हुनर सीखने का अवसर मिलेगा, जो रिहाई के बाद रोजगार हासिल करने में मददगार साबित हो सकता है।

जेल प्रशासन का मानना है कि कौशल प्रशिक्षण और रोजगार आधारित गतिविधियां कैदियों के पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और वे रिहाई के बाद सम्मानजनक जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

बेकरी यूनिट से तैयार होने वाले उत्पादों की बिक्री के जरिए राजस्व भी प्राप्त होगा। इससे जेल प्रशासन की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी और साथ ही कैदियों की मेहनत को एक सकारात्मक दिशा मिलेगी।

मोबाइल बेकरी सेवा शुरू करने का उद्देश्य तैयार उत्पादों को लोगों तक पहुंचाना और बेकरी यूनिट की पहुंच बढ़ाना है। इसके जरिए जेल में तैयार उत्पादों को विभिन्न स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।

DGP आलोक कुमार ने इस अवसर पर सुधारात्मक कार्यक्रमों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जेल व्यवस्था का उद्देश्य केवल अनुशासन बनाए रखना नहीं, बल्कि कैदियों को बेहतर भविष्य के लिए तैयार करना भी है।

जेल प्रशासन समय-समय पर कैदियों के लिए विभिन्न प्रशिक्षण और रोजगार कार्यक्रम संचालित करता रहा है। इनमें कौशल विकास, हस्तकला, कृषि और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां शामिल हैं।

'नवा संकल्प बेकरी' इसी दिशा में एक और कदम माना जा रहा है। इसके माध्यम से कैदियों को व्यावहारिक अनुभव मिलेगा और वे अपने अंदर छिपी प्रतिभा को विकसित कर सकेंगे।

HCL फाउंडेशन के सहयोग से शुरू की गई मोबाइल बेकरी सेवा को भी इसी उद्देश्य से जोड़ा गया है। इससे कैदियों द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।

जेल अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की पहल से कैदियों में सकारात्मक सोच विकसित होती है और समाज में वापस लौटने के बाद उनके लिए नए अवसर पैदा होते हैं।

बैंगलोर सेंट्रल जेल की यह पहल सुधार और पुनर्वास की अवधारणा को मजबूत करती है। रोजगार से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से कैदियों को जिम्मेदार और आत्मनिर्भर नागरिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

'नवा संकल्प बेकरी' आने वाले समय में जेल सुधार कार्यक्रमों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। इससे कैदियों को प्रशिक्षण, रोजगार और आत्मनिर्भरता के साथ-साथ समाज में दोबारा स्थापित होने का अवसर मिलेगा।

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