कर्नाटक विधान परिषद चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज, JD(S) विधायकों को रिसॉर्ट में रखा गया

Update: 2026-06-18 05:33 GMT

Karnataka कर्नाटक: विधान परिषद की सात सीटों के लिए होने वाले चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मतदान से पहले क्रॉस-वोटिंग की आशंका को देखते हुए जनता दल (सेक्युलर) ने अपने विधायकों को बुधवार को एक रिसॉर्ट में स्थानांतरित कर दिया। पार्टी को आशंका है कि कहीं उसके विधायक कांग्रेस के पक्ष में मतदान न कर दें, जिससे चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

इस चुनाव में कुल सात सीटों के लिए आठ उम्मीदवार मैदान में हैं। जीत के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को 28 वोटों की आवश्यकता होगी। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार कांग्रेस के चार और भारतीय जनता पार्टी के दो उम्मीदवारों की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।

कांग्रेस के जिन चार उम्मीदवारों की स्थिति अपेक्षाकृत सुरक्षित बताई जा रही है, उनमें बी के हरिप्रसाद, टिप्पन्नाप्पा कामाकनूर, पी वी मोहन और शिवन्ना मालवल्ली शामिल हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी की ओर से रघु कौटिल्य और लिंगराज पाटिल की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

हालांकि, सातवीं सीट को लेकर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है, जहां कांग्रेस के विनय कार्तिक और JD(S) के गोविंदराजू के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिल रहा है। इस सीट का परिणाम ही चुनावी समीकरणों को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकता है।

कांग्रेस उम्मीदवार विनय कार्तिक की जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी को अभी पांच अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता है। इसके लिए कांग्रेस ने रणनीतिक रूप से निर्दलीय विधायकों के समर्थन पर भरोसा जताया है। इनमें लता मल्लिकार्जुन और के एच पुट्टास्वामी गौड़ा जैसे निर्दलीय विधायक शामिल हैं। इसके अलावा सर्वोदय कर्नाटक पक्ष के विधायक दर्शन पुट्टनैया और बीजेपी से निष्कासित दो विधायकों एस टी सोमशेखर और शिवराम हेब्बार के समर्थन पर भी कांग्रेस की नजर है, जिन्हें पार्टी के करीब माना जाता है।

इसी राजनीतिक हलचल के बीच बुधवार को कांग्रेस ने भी अपने विधायकों की एक अहम बैठक बेंगलुरु के पास एक रिसॉर्ट में आयोजित की। बैठक में चुनावी रणनीति, मतदान प्रबंधन और संभावित क्रॉस-वोटिंग रोकने के उपायों पर चर्चा की गई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में हर वोट बेहद महत्वपूर्ण है और छोटी सी चूक भी परिणाम बदल सकती है। ऐसे में सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और अंतिम समय तक समर्थन सुनिश्चित करने की कोशिश में लगे हैं।

JD(S) द्वारा विधायकों को रिसॉर्ट में भेजे जाने के कदम को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे पार्टी अपने वोट बैंक को सुरक्षित रख सके और किसी भी तरह की राजनीतिक सेंधमारी को रोका जा सके।

फिलहाल, कर्नाटक विधान परिषद चुनाव का यह मुकाबला बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है और सभी की नजरें अब मतदान और अंतिम परिणाम पर टिकी हुई हैं।

Tags:    

Similar News