बेंगलुरु। चीन-नेपाल सीमा क्षेत्र में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के कारण फंसे कर्नाटक के मानसरोवर यात्रियों ने राज्य सरकार से सुरक्षित निकासी की अपील की है। तिब्बत के सागा और डारचिन इलाकों में फंसे कन्नड़ तीर्थयात्रियों ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से अनुरोध किया है कि उन्हें सड़क मार्ग की बजाय हवाई रास्ते से बाहर निकाला जाए।

तीर्थयात्रियों का कहना है कि चीन-नेपाल सीमा क्षेत्र में खराब मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आगे की यात्रा बेहद जोखिम भरी हो गई है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि नेपाल सीमा तक पहुंचने के बाद उनके लिए एयरलिफ्ट की व्यवस्था की जाए, ताकि वे सुरक्षित अपने घर लौट सकें।

मानसरोवर यात्रा पर गए यात्री फंसे

जानकारी के अनुसार, कर्नाटक के कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए थे। यात्रा के दौरान वे तिब्बत के बेस कैंप क्षेत्रों में फंस गए हैं।

इन यात्रियों को नेपाल बॉर्डर तक पहुंचने के लिए न्यालम मार्ग से करीब 12 से 15 घंटे का सफर तय करना होगा। लेकिन इस रास्ते पर भारी बारिश के कारण स्थिति बेहद खराब हो गई है।

लैंडस्लाइड, कीचड़ और रास्तों पर गिर रहे पत्थरों के कारण यात्रियों को आगे बढ़ने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

सड़क मार्ग बना जोखिम भरा

फंसे हुए यात्रियों ने बताया कि कई जगहों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। घुटनों तक कीचड़ जमा है और पहाड़ी इलाकों में लगातार पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है।

ऐसे हालात में सड़क मार्ग से यात्रा करना खतरनाक साबित हो सकता है। यात्रियों को डर है कि रास्ते में किसी भी समय वे फंस सकते हैं और राहत पहुंचाना मुश्किल हो सकता है।

इसी वजह से उन्होंने हवाई बचाव अभियान की मांग की है।

यात्रियों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार

तीर्थयात्रियों ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से अपील करते हुए कहा कि चीनी इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी होने और नेपाल सीमा तक पहुंचने के बाद उनके लिए एयरलिफ्ट की व्यवस्था की जाए।

उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या नेपाल पहुंचने के बाद उन्हें हवाई बचाव सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है, ताकि वे सुरक्षित वापस लौट सकें।

यात्रियों का कहना है कि उनकी प्राथमिकता जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान तक पहुंचना है।

शिवकुमार ने दिया मदद का भरोसा

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने फंसे हुए तीर्थयात्रियों से हिम्मत बनाए रखने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि सरकार पूरे मामले पर नजर रख रही है और यात्रियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्थिति की जानकारी ली जाए और जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जाए।

दिल्ली पहुंचने वालों के लिए व्यवस्था के निर्देश

डीके शिवकुमार ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि जो कन्नड़ यात्री दिल्ली पहुंचेंगे, उनके रहने और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं का इंतजाम किया जाए।

सरकार का उद्देश्य है कि यात्रियों को वापस लौटने तक किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

खराब मौसम से बढ़ी परेशानी

हिमालयी क्षेत्रों में मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं आम होती हैं, लेकिन इस बार चीन-नेपाल सीमा क्षेत्र में मौसम की स्थिति ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन के कारण कई मार्ग बाधित हो गए हैं। ऐसे में राहत और बचाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं।

प्रशासनिक स्तर पर संपर्क जारी

राज्य सरकार केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है ताकि फंसे हुए यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके।

अधिकारियों से यात्रियों की संख्या, उनकी वर्तमान स्थिति और निकासी के संभावित रास्तों की जानकारी जुटाई जा रही है।

यात्रियों में चिंता का माहौल

कई घंटे से कठिन परिस्थितियों में फंसे यात्रियों में चिंता जरूर है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्द मदद पहुंचाएगी।

उन्होंने बताया कि वे लगातार मौसम और रास्तों की स्थिति पर नजर रख रहे हैं और प्रशासन के निर्देशों का पालन कर रहे हैं।

सुरक्षित वापसी पर सरकार का फोकस

कर्नाटक सरकार का कहना है कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

फिलहाल चीन-नेपाल सीमा क्षेत्र में फंसे कन्नड़ यात्रियों की सुरक्षित निकासी के लिए प्रयास जारी हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि क्या यात्रियों को सड़क मार्ग से निकाला जाएगा या एयरलिफ्ट की व्यवस्था की जाएगी।

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