शिवमोग्गा। कर्नाटक में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर उठ रहे सवालों के बीच अब कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी (KSOU) के शिवमोग्गा क्षेत्रीय कार्यालय में कथित परीक्षा धांधली का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां स्नातक और स्नातकोत्तर परीक्षाओं में छात्रों से प्रति विषय 1,000 रुपये लेकर नकल करने की अनुमति दी जा रही है। पैसे देने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा कक्ष के अंदर मोबाइल फोन और किताबों का इस्तेमाल करके उत्तर लिखने की छूट मिलने का दावा किया गया है। इस कथित व्यवस्था को 'वीआईपी सुविधा' बताया जा रहा है। क्षेत्रीय कार्यालय के प्रशासन और परीक्षा संचालन से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, शिवमोग्गा के इस विशेष मामले में रिश्वत लेकर नकल कराने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी अधिकारी की संलिप्तता अभी सिद्ध नहीं हुई है।

प्रति विषय 1000 रुपये लेकर नकल कराने का आरोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिवमोग्गा स्थित कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी के क्षेत्रीय परीक्षा केंद्र में कथित तौर पर एक ऐसी व्यवस्था संचालित होने का आरोप है, जिसमें पैसे देने वाले छात्रों को परीक्षा के दौरान अनुचित सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

आरोप है कि प्रत्येक विषय के लिए एक हजार रुपये देने वाले विद्यार्थियों को किताबों और मोबाइल फोन की मदद से प्रश्नों के उत्तर लिखने की अनुमति मिलती है।

सामान्य परिस्थितियों में विश्वविद्यालय की निर्धारित परीक्षा में बिना अनुमति अध्ययन सामग्री या मोबाइल फोन का इस्तेमाल अनुचित साधनों की श्रेणी में आ सकता है।

यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।

स्नातक और स्नातकोत्तर परीक्षाओं पर सवाल

कथित धांधली का मामला स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की परीक्षाओं से जुड़ा बताया जा रहा है।

कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित करती है। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी भी शामिल होते हैं, जो नौकरी या अन्य जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई करते हैं।

विश्वविद्यालय के परीक्षा पोर्टल पर अक्टूबर और नवंबर 2026 की स्नातक तथा स्नातकोत्तर परीक्षाओं से संबंधित प्रवेश पत्र और अन्य सूचनाएं उपलब्ध हैं।

ऐसे में परीक्षा केंद्रों की निगरानी और निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

क्षेत्रीय कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

शिवमोग्गा क्षेत्रीय कार्यालय की देखरेख में कथित अनियमितताएं होने का आरोप भी लगाया गया है।

हालांकि, किसी विशेष अधिकारी ने व्यक्तिगत रूप से धन लिया या विद्यार्थियों को नकल कराने का निर्देश दिया, इसका सत्यापित प्रमाण सामने नहीं आया है।

विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर शिवमोग्गा क्षेत्रीय केंद्र का विवरण उपलब्ध है।

मामले में निष्पक्ष जांच के लिए परीक्षा की ड्यूटी सूची, कक्ष निरीक्षकों की भूमिका, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और संबंधित प्रशासनिक दस्तावेजों का परीक्षण महत्वपूर्ण हो सकता है।

पहले भी सामने आए थे नकल कराने के आरोप

कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी से संबंधित परीक्षा अनियमितताओं के आरोप पहले भी सामने आ चुके हैं।

मई 2026 में बेलगावी जिले के अथनी स्थित एक परीक्षा केंद्र पर पैसे लेकर सामूहिक नकल कराने का मामला चर्चा में आया था।

उस समय सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, कुछ छात्रों को प्रति विषय 1,000 से 1,500 रुपये लेकर मोबाइल फोन और किताबों से उत्तर लिखने की अनुमति देने के आरोप लगे थे।

कथित घटनाक्रम का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें परीक्षा कक्ष में पैसे के लेनदेन और नकल कराने की शिकायत की गई थी।

हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाली गतिविधियों और आरोपित कर्मचारियों की जिम्मेदारी की पुष्टि जांच के आधार पर ही की जा सकती थी।

कोलार परीक्षा केंद्र में भी हुई थी शिकायत

बेलगावी के अलावा कोलार स्थित विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय परीक्षा केंद्र में भी विद्यार्थियों ने गंभीर आरोप लगाए थे।

कुछ छात्रों का कहना था कि उनसे प्रत्येक विषय के लिए एक हजार रुपये मांगे जा रहे थे।

इस संबंध में विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक को लिखित शिकायत भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी।

शिकायत में परीक्षा कर्मचारियों द्वारा धन लेने और उत्तर पुस्तिकाओं से संबंधित दस्तावेजों में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे।

विद्यार्थियों ने दावा किया था कि पैसे नहीं देने वाले छात्रों को भी परेशान किया जा रहा था।

ये शिकायतें परीक्षा केंद्रों की निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती हैं।

कुलपति ने पहले दिए थे जांच के निर्देश

अथनी परीक्षा केंद्र पर कथित सामूहिक नकल का मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर शरणप्पा वी. हलसे ने जांच के निर्देश दिए थे।

उन्होंने परीक्षा नियंत्रक आनंद कुमार को पूरे घटनाक्रम की पड़ताल करके विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा था।

कुलपति ने उस समय कहा था कि जांच में तथ्य सामने आने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, वह जांच अथनी केंद्र के आरोपों से संबंधित थी। उसे शिवमोग्गा में सामने आए वर्तमान आरोपों की जांच या पुष्टि नहीं माना जा सकता।

शिवमोग्गा के मामले में विश्वविद्यालय की किसी नई आधिकारिक जांच रिपोर्ट या अनुशासनात्मक कार्रवाई की पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

ईमानदारी से परीक्षा देने वाले छात्रों के भविष्य पर असर

किसी भी विश्वविद्यालय की परीक्षा में नकल या पैसे के बदले अनुचित सुविधा उपलब्ध कराने की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय होती हैं।

यदि कुछ विद्यार्थियों को पैसे के बदले अतिरिक्त सुविधाएं मिलती हैं, तो इसका सीधा असर उन छात्रों के साथ निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा पर पड़ सकता है, जो नियमित अध्ययन करके परीक्षा देते हैं।

ऐसी गतिविधियों से परीक्षा परिणामों की विश्वसनीयता प्रभावित होने का खतरा रहता है।

साथ ही विश्वविद्यालय की डिग्री और मूल्यांकन प्रणाली को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, परीक्षा केंद्रों में स्पष्ट नियम, प्रशिक्षित निरीक्षक और प्रभावी निगरानी व्यवस्था आवश्यक है।

विश्वविद्यालय पहले से अन्य आरोपों की जांच के घेरे में

कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के पुराने आरोपों को लेकर भी जांच की प्रक्रिया चल चुकी है।

अक्टूबर 2026 में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, जांच समिति ने अस्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति, पदोन्नति, क्षेत्रीय केंद्रों की स्थापना और निजी अध्ययन केंद्रों के आवंटन जैसी प्रक्रियाओं में प्रथम दृष्टया अनियमितताओं की ओर संकेत किया था।

समिति ने कुछ मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराने की सिफारिश भी की थी।

हालांकि, इन पुराने प्रशासनिक मामलों को शिवमोग्गा की कथित परीक्षा धांधली से सीधे जोड़ने वाला कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

परीक्षा केंद्रों पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत

इस प्रकार के आरोपों की जांच के लिए परीक्षा केंद्रों पर उपलब्ध सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, कर्मचारियों की ड्यूटी और छात्रों की शिकायतों की जांच उपयोगी हो सकती है।

विश्वविद्यालय प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना होगा कि परीक्षा केंद्रों में मोबाइल फोन और पुस्तकों के इस्तेमाल से संबंधित नियमों का पालन किस प्रकार सुनिश्चित किया जाता है।

यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ पैसे लेकर नकल कराने के प्रमाण मिलते हैं, तो विश्वविद्यालय के नियमों और लागू कानूनों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

इसके अलावा विद्यार्थियों की शिकायतों के लिए सुरक्षित और पारदर्शी व्यवस्था भी आवश्यक है।

निष्पक्ष जांच और आधिकारिक जवाब का इंतजार

कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी के शिवमोग्गा क्षेत्रीय केंद्र में प्रति विषय 1,000 रुपये लेकर नकल कराने के आरोपों ने परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर नए सवाल पैदा किए हैं।

पहले अन्य परीक्षा केंद्रों से इसी प्रकार की शिकायतें सामने आने के कारण इन आरोपों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

फिलहाल शिवमोग्गा के संबंध में किसी विशिष्ट कर्मचारी या अधिकारी की दोषसिद्धि, गिरफ्तारी अथवा निलंबन की पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और संभावित जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना आवश्यक है। जांच से ही स्पष्ट होगा कि कथित 'वीआईपी' नकल व्यवस्था वास्तव में संचालित हो रही थी या नहीं।

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