हनूर फायरिंग में तीन नागरिकों की मौत पर भड़के कुमारस्वामी, जांच की पारदर्शिता पर उठाए सवाल
बेंगलुरु। कर्नाटक के चामराजनगर जिले के हनूर तालुक में वन विभाग के कर्मचारियों की कथित गोलीबारी में तीन नागरिकों की मौत के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। केंद्रीय मंत्री H. D. Kumaraswamy ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए सवाल उठाया कि जंगल क्षेत्र में गए लोगों को जिंदा गिरफ्तार करने की कोशिश क्यों नहीं की गई। उन्होंने राज्य की कांग्रेस सरकार की कार्रवाई और मामले की जांच की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े किए हैं।
बागलकोट जिले के गुलेदागुड्डा में मीडिया से बातचीत करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि हनूर में हुई गोलीबारी की घटना निंदनीय है और इसके पीछे कई तरह के संदेह पैदा हो रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि कथित रूप से शिकार करने के लिए जंगल में गए लोग क्या कुख्यात अपराधी वीरप्पन जैसे थे कि उनके खिलाफ इतनी कठोर कार्रवाई जरूरी हो गई।
कुमारस्वामी ने कहा कि अगर वन विभाग के कर्मचारियों को संदेह था कि ये लोग अवैध शिकार जैसी गतिविधि में शामिल हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कर्मचारियों के पास आरोपियों को जिंदा पकड़ने का कोई दूसरा विकल्प नहीं था। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आपात स्थिति में भी जान लेने वाली कार्रवाई अंतिम विकल्प होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि परिस्थितियां इतनी गंभीर थीं कि गोली चलाना जरूरी हो गया था तो भी उन्हें काबू करने के दूसरे तरीके अपनाए जा सकते थे। कुमारस्वामी के अनुसार आरोपियों को पकड़ने के लिए गैर-घातक विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए था। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने की मांग की।
कुमारस्वामी ने मामले की तुलना कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन से करते हुए पूछा कि जंगल में गए नागरिक आखिर कितने खतरनाक थे। वीरप्पन लंबे समय तक कर्नाटक और तमिलनाडु के जंगलों में सक्रिय रहा था और उसके खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामले थे। कुमारस्वामी ने इसी संदर्भ में सवाल उठाया कि क्या हनूर में मारे गए लोग इतने गंभीर खतरे का प्रतिनिधित्व कर रहे थे कि उन्हें गिरफ्तार करने के बजाय गोलीबारी की नौबत आई।
केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार से घटना से जुड़े सभी तथ्यों को स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि तीन लोगों की जान गई है, इसलिए मामले को सामान्य घटना मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। यह पता लगाया जाना चाहिए कि वन विभाग की टीम किन परिस्थितियों में वहां पहुंची, गोलीबारी क्यों हुई और उससे पहले क्या घटनाक्रम हुआ था।
उन्होंने इस कथित मुठभेड़ के पीछे कई संदेह होने की बात कही। कुमारस्वामी ने कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि मृतकों के परिवारों के साथ-साथ आम जनता को भी वास्तविक घटनाक्रम का पता चल सके।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल गोली चलाए जाने की परिस्थितियों को लेकर है। जांच में यह स्पष्ट करना होगा कि वन कर्मचारियों को किसी तरह का तत्काल खतरा था या नहीं और यदि था तो उसकी प्रकृति क्या थी। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि घटना के दौरान निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का पालन किया गया या नहीं।
तीन नागरिकों की मौत होने के कारण मामले की संवेदनशीलता काफी बढ़ गई है। ऐसी परिस्थितियों में घटनास्थल से मिले साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वन विभाग के कर्मचारियों के बयान जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इनके आधार पर ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
कुमारस्वामी ने कहा कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों के पास किसी संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेने और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की प्रक्रिया होती है। किसी व्यक्ति पर अवैध शिकार का संदेह होने भर से उसकी जान लेने वाली कार्रवाई को उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने जोर दिया कि सरकार को इस मामले में जवाबदेही तय करनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री के बयान के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है। उन्होंने सीधे राज्य की कांग्रेस सरकार की भूमिका और जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी दलों के बीच बयानबाजी और तेज हो सकती है।
वन क्षेत्रों में अवैध शिकार रोकना वन विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए वन कर्मचारियों को कई बार कठिन और जोखिम भरी परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। इसके बावजूद किसी अभियान में बल प्रयोग की परिस्थितियां और उसकी आवश्यकता जांच के दायरे में आ सकती हैं, खासकर तब जब उसमें लोगों की मौत हुई हो।
हनूर तालुक का क्षेत्र वन और वन्यजीव गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। ऐसे क्षेत्रों में वन विभाग की टीमें गश्त और निगरानी करती रहती हैं। अवैध शिकार या अन्य गैरकानूनी गतिविधि की सूचना मिलने पर कार्रवाई की जाती है। हालांकि ताजा घटना में वास्तव में क्या परिस्थितियां बनीं, इसका निर्धारण जांच से ही होगा।
कुमारस्वामी ने राज्य सरकार से केवल विभागीय पक्ष पर निर्भर रहने के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि तीन लोगों की मौत से जुड़े मामले में किसी भी तरह का संदेह बाकी नहीं रहना चाहिए।
मृतकों के जंगल में जाने का वास्तविक उद्देश्य क्या था, उनके पास क्या सामान था, वन कर्मचारियों से उनका सामना कैसे हुआ और किस परिस्थिति में गोलियां चलाई गईं—ये सभी सवाल जांच के लिए महत्वपूर्ण होंगे। जांच के निष्कर्ष आने से पहले घटना से जुड़े आरोपों को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।
फिलहाल कुमारस्वामी के तीखे सवालों ने हनूर गोलीबारी मामले को राज्य की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर संबंधित लोग किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल भी थे तो उन्हें गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश किया जाना चाहिए था। तीन नागरिकों की मौत के बाद अब राज्य सरकार पर घटना की परिस्थितियों को स्पष्ट करने और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ गया है।