बेंगलुरु : केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जुलूस में शामिल होने के आरोप में दो सरकारी शिक्षकों के निलंबन को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केवल एक जुलूस में शामिल होने के कारण शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं है।
कुमारस्वामी ने सवाल किया कि आखिर शिक्षकों ने RSS मार्च में शामिल होकर ऐसी कौन सी बड़ी गलती कर दी, जिसके कारण उन्हें निलंबित किया गया। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या शिक्षकों के जुलूस में शामिल होने से राज्य में कोई हिंसा, नुकसान या किसी तरह की अव्यवस्था पैदा हुई थी।
दो सरकारी शिक्षकों पर हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, कर्नाटक के यादगीर जिले में स्कूल शिक्षा विभाग ने दो सरकारी शिक्षकों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है।
बताया जा रहा है कि दोनों शिक्षकों पर आरोप था कि वे RSS के एक कार्यक्रम या जुलूस में शामिल हुए थे। इस मामले में 20 अगस्त को यादगीर स्कूल शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर चन्नाबसप्पा मुधोल ने निलंबन आदेश जारी किया था।
विभाग की ओर से की गई इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।
कुमारस्वामी ने सरकार से मांगा जवाब
केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का आधार स्पष्ट होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर किसी कार्यक्रम में शामिल होने से कोई कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा नहीं हुई, किसी तरह की हिंसा नहीं हुई और सरकारी कामकाज प्रभावित नहीं हुआ, तो फिर इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों की गई।
उन्होंने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब देने की मांग की।
राजनीतिक रंग लेने लगा मामला
शिक्षकों के निलंबन का मामला अब राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। विपक्षी नेताओं ने इसे लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि सरकार को इस तरह के मामलों में निष्पक्षता बरतनी चाहिए और किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए।
सरकारी कर्मचारियों के आचरण नियमों का मुद्दा
वहीं, इस मामले में शिक्षा विभाग की ओर से कार्रवाई सरकारी कर्मचारियों के आचरण नियमों से जुड़ी बताई जा रही है।
सरकारी कर्मचारियों के लिए सेवा नियमों में राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी को लेकर कुछ प्रतिबंध तय किए गए हैं। विभाग इसी आधार पर कार्रवाई करने की बात कह सकता है।
हालांकि, इस मामले में शिक्षकों की ओर से क्या पक्ष रखा गया है, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
शिक्षकों के समर्थन में उठी आवाज
निलंबन के बाद कुछ संगठनों और नेताओं ने शिक्षकों के समर्थन में आवाज उठाई है। उनका कहना है कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करते समय परिस्थितियों और घटना की गंभीरता को ध्यान में रखना चाहिए।
समर्थकों का तर्क है कि यदि किसी कार्यक्रम में शामिल होने से कोई सार्वजनिक नुकसान नहीं हुआ तो केवल भागीदारी के आधार पर निलंबन उचित नहीं है।
विभागीय जांच की संभावना
मामले में आगे विभागीय जांच की संभावना जताई जा रही है। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि शिक्षकों ने किन परिस्थितियों में कार्यक्रम में भाग लिया और क्या उन्होंने किसी सेवा नियम का उल्लंघन किया है।
जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।
कर्नाटक में बढ़ी राजनीतिक हलचल
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कर्नाटक में सरकारी कर्मचारियों की गतिविधियों और उनके अधिकारों को लेकर बहस चल रही है।
कुमारस्वामी के बयान के बाद यह मुद्दा और चर्चा में आ गया है। अब सभी की नजर शिक्षा विभाग की आगे की कार्रवाई और जांच के परिणाम पर है।
फिलहाल दो सरकारी शिक्षकों के निलंबन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। जहां विभाग इसे नियमों के तहत की गई कार्रवाई बता सकता है, वहीं विरोध करने वाले नेता इसे अनुचित कदम बता रहे हैं।