बेंगलुरु। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की महत्वाकांक्षी और लोकप्रिय ‘शक्ति योजना’ भले ही महिलाओं के बीच काफी सफल रही हो, लेकिन अब यही योजना राज्य की परिवहन एजेंसियों के लिए आर्थिक चुनौती बनती जा रही है। मुफ्त बस यात्रा योजना के तहत खर्च की गई राशि का बड़ा हिस्सा अभी तक परिवहन निगमों को नहीं मिल पाया है।

सरकार पर चारों परिवहन निगमों की कुल 5,650.95 करोड़ रुपये की सब्सिडी राशि बकाया है। वित्त विभाग की ओर से अतिरिक्त फंड उपलब्ध कराने में असमर्थता जताए जाने के बाद परिवहन निगमों की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

मुफ्त बस यात्रा योजना से बढ़ा खर्च

कर्नाटक सरकार ने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 11 जून 2023 को ‘शक्ति योजना’ की शुरुआत की थी।

इस योजना के तहत राज्य की महिलाओं को सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई। योजना शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाओं ने इसका लाभ उठाया।

हालांकि, योजना के संचालन के लिए परिवहन निगमों को टिकट किराये के बराबर राशि सरकार की ओर से सब्सिडी के रूप में दी जानी थी। अब इसी भुगतान में देरी ने परिवहन एजेंसियों के सामने आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है।

20,955 करोड़ रुपये खर्च हुए

परिवहन मंत्री बैराती सुरेश ने हाल ही में विधान परिषद सत्र के दौरान दिए गए लिखित जवाब में योजना से जुड़े आंकड़े साझा किए।

उन्होंने बताया कि 11 जून 2023 से लेकर 31 जुलाई 2026 तक चारों परिवहन निगमों ने शक्ति योजना के तहत कुल 20,955.96 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

इसके मुकाबले सरकार की ओर से अब तक 15,305.01 करोड़ रुपये ही जारी किए गए हैं। यानी कुल 5,650.95 करोड़ रुपये की राशि अभी भी लंबित है।

चार परिवहन निगमों पर पड़ा असर

कर्नाटक में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था मुख्य रूप से चार परिवहन निगमों के माध्यम से संचालित होती है।

शक्ति योजना के तहत मुफ्त यात्रा का खर्च इन्हीं निगमों को उठाना पड़ रहा है। सरकार से मिलने वाली सब्सिडी में देरी के कारण इन निगमों की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो रही है।

परिवहन निगमों को कर्मचारियों के वेतन, बसों के रखरखाव, ईंधन खर्च और अन्य संचालन संबंधी खर्चों का भी सामना करना पड़ता है।

वित्त विभाग ने जताई असमर्थता

मामले में परेशानी तब और बढ़ गई जब वित्त विभाग ने बकाया राशि के भुगतान के लिए अतिरिक्त धन उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई।

वित्त विभाग के इस रुख के बाद परिवहन निगमों के सामने सवाल खड़ा हो गया है कि लंबित राशि की भरपाई कैसे की जाएगी।

परिवहन विभाग अब सरकार से जल्द भुगतान की उम्मीद कर रहा है, ताकि निगमों की आर्थिक स्थिति को संभाला जा सके।

योजना को मिला था व्यापक समर्थन

शक्ति योजना को कांग्रेस सरकार की प्रमुख गारंटी योजनाओं में शामिल किया गया था। चुनाव के दौरान किए गए वादों के तहत लागू इस योजना को महिलाओं के बीच काफी लोकप्रियता मिली।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाओं ने मुफ्त बस यात्रा सुविधा का लाभ उठाया। इससे महिलाओं की आवाजाही आसान हुई और उन्हें आर्थिक राहत मिली।

सरकार ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया था।

आर्थिक संतुलन बड़ी चुनौती

हालांकि, योजना की लोकप्रियता के साथ-साथ इसके वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।

परिवहन निगमों का कहना है कि मुफ्त यात्रा योजना का खर्च समय पर नहीं मिलने से उनकी कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।

बस संचालन, नई बसों की खरीद, कर्मचारियों से जुड़े खर्च और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए पर्याप्त धन की जरूरत होती है।

सरकार के सामने भुगतान की चुनौती

अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबित सब्सिडी राशि का भुगतान करना है। 5,650 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी करना राज्य के वित्तीय प्रबंधन के लिए भी महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

सरकार को एक ओर अपनी गारंटी योजनाओं को जारी रखना है, वहीं दूसरी ओर सरकारी संस्थानों पर पड़ रहे आर्थिक दबाव को भी कम करना है।

आगे की रणनीति पर नजर

परिवहन निगमों की वित्तीय स्थिति को देखते हुए आने वाले समय में सरकार और विभाग के बीच इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो सकती है।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार लंबित राशि के भुगतान के लिए क्या कदम उठाती है और परिवहन निगमों को आर्थिक राहत कब तक मिलती है।

शक्ति योजना ने जहां महिलाओं को बड़ी सुविधा दी है, वहीं इसके वित्तीय बोझ ने सरकार के सामने संतुलन बनाए रखने की चुनौती खड़ी कर दी है।

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