Karnataka : अलमट्टी बांध में घटा पानी, नहरों के लिए किसानों का प्रदर्शन

Update: 2026-07-14 05:10 GMT

विजयपुरा : कर्नाटक के अलमट्टी जलाशय में पानी की आवक लगातार कम होती जा रही है। सोमवार को बांध में पानी का प्रवाह घटकर 56,765 क्यूसेक रह गया। कुछ दिन पहले तक जलाशय में बड़ी मात्रा में पानी आ रहा था। जुलाई के पहले सप्ताह में महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के बाद अलमट्टी बांध में पानी की आवक बढ़ गई थी, लेकिन अब इसमें लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार, पांच दिन पहले अलमट्टी जलाशय में पानी की आवक 1.5 लाख क्यूसेक से अधिक थी। भारी बारिश के कारण कृष्णा नदी में जलस्तर बढ़ गया था और बांध में तेजी से पानी जमा हुआ था। फिलहाल जलाशय में लगभग 70 टीएमसीएफटी (TMCFT) पानी उपलब्ध बताया जा रहा है।

पानी की आवक कम होने के बीच सोमवार को किसानों के दो संगठनों ने अलमट्टी क्षेत्र में अलग-अलग विरोध प्रदर्शन किए। किसानों की मुख्य मांग थी कि कमांड एरिया में खेती के लिए नहरों में जल्द से जल्द पानी छोड़ा जाए, ताकि फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।

अखंड कर्नाटक रैथा संघ के सदस्यों ने कृष्णा बैकवाटर क्षेत्र में दो घंटे से अधिक समय तक प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और जल संसाधन विभाग से मांग की कि किसानों की समस्या को देखते हुए सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था तत्काल की जाए।

वहीं, कर्नाटक राज्य रैथा संघ और हसीरू सेने के कार्यकर्ताओं ने अलमट्टी स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों को कुछ समय के लिए अंदर ही रोक दिया। इस दौरान किसानों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और प्रशासन से तुरंत निर्णय लेने की मांग की।

किसान संगठनों का कहना है कि खरीफ सीजन में फसलों की बुआई और शुरुआती विकास के लिए पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। यदि समय पर नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कई किसान पहले ही खेती पर बड़ी रकम खर्च कर चुके हैं। बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री पर खर्च करने के बाद अब फसलों को बचाने के लिए सिंचाई पानी की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि किसानों की परेशानी को देखते हुए जल्द कदम उठाया जाए।

कृषि क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि मानसून के शुरुआती दौर में पानी की उपलब्धता फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि बारिश में कमी आती है या सिंचाई व्यवस्था में देरी होती है तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है।

अलमट्टी जलाशय कृष्णा नदी पर बना एक महत्वपूर्ण बांध है, जो कर्नाटक के कई क्षेत्रों में सिंचाई और जल प्रबंधन के लिए अहम भूमिका निभाता है। इसके पानी का उपयोग बड़ी संख्या में किसान खेती के लिए करते हैं।

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जलाशय में उपलब्ध पानी, नदी के प्रवाह और क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पानी छोड़ने का निर्णय लिया जाता है। अधिकारियों की ओर से अभी तक नहरों में पानी छोड़ने को लेकर अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया है।

किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। उनका कहना है कि किसानों की आजीविका खेती पर निर्भर है और पानी की कमी से उनकी मेहनत पर असर पड़ सकता है।

प्रदर्शन के बाद प्रशासन और किसान संगठनों के बीच बातचीत की संभावना जताई जा रही है। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्द ही सिंचाई पानी छोड़ने को लेकर सकारात्मक निर्णय लेगी।

फिलहाल, अलमट्टी जलाशय में पानी की स्थिति और किसानों की मांग दोनों पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में जल संसाधन विभाग का फैसला क्षेत्र के हजारों किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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