दक्षिण कन्नड़ डीसी के सरकारी आवास की नेमप्लेट पर पत्नी का नाम, जांच की मांग
मंगलुरु। दक्षिण कन्नड़ के डिप्टी कमिश्नर दर्शन के सरकारी आवास की नेमप्लेट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य प्रतिभा कुलाई ने कर्नाटक सरकार के मुख्य सचिव से मामले की जांच कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने यह पता लगाने की मांग की है कि क्या सरकारी आवास की नेमप्लेट पर डिप्टी कमिश्नर की पत्नी का नाम लिखने के लिए सरकारी धन का इस्तेमाल किया गया था।
प्रतिभा कुलाई ने मुख्य सचिव को भेजे पत्र में सरकारी आवास की नेमप्लेट पर जीवनसाथी का नाम दर्ज किए जाने पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि सरकारी आवास अधिकारियों को उनके पद के आधार पर आवंटित किए जाते हैं। ऐसे में प्रशासनिक शिष्टाचार और सरकारी नियमों के अनुसार नेमप्लेट पर संबंधित अधिकारी का नाम और पद ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
नेमप्लेट पर पत्नी का नाम लिखने पर सवाल
प्रतिभा कुलाई ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि सरकारी आवास की नेमप्लेट पर अधिकारी की पत्नी का नाम शामिल करना सरकारी नियमों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने मुख्य सचिव से इस पूरे मामले की जांच करने की मांग की है।
उनका कहना है कि सरकारी आवास किसी अधिकारी की निजी संपत्ति नहीं होता, बल्कि पद से जुड़ी सरकारी सुविधा होती है। ऐसे में वहां लगाई जाने वाली नेमप्लेट को भी सरकारी प्रोटोकॉल और प्रशासनिक परंपराओं के अनुरूप होना चाहिए।
कुलाई ने इस बात की भी जांच की मांग की है कि नेमप्लेट तैयार कराने और लगाने में यदि सरकारी संसाधनों या धन का इस्तेमाल हुआ है, तो उसका भुगतान किस मद से किया गया।
सरकारी आवास पद के आधार पर आवंटित
सरकारी अधिकारियों को आवास उनके पद और सरकारी सेवा से जुड़ी जिम्मेदारियों के आधार पर आवंटित किए जाते हैं। ऐसे आवासों में अधिकारी के पदनाम और नाम का उल्लेख आमतौर पर प्रशासनिक पहचान के लिए किया जाता है।
प्रतिभा कुलाई ने इसी व्यवस्था का हवाला देते हुए सवाल उठाया है कि यदि आवास डिप्टी कमिश्नर के पद के आधार पर आवंटित है, तो नेमप्लेट पर अधिकारी के नाम के साथ उनकी पत्नी का नाम किस नियम के तहत लगाया गया।
उन्होंने मुख्य सचिव से संबंधित नियमों की समीक्षा करने और यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया है कि ऐसी नेमप्लेट के लिए कोई आधिकारिक अनुमति या प्रावधान मौजूद है या नहीं।
सरकारी फंड के इस्तेमाल की जांच की मांग
मामले में दूसरा महत्वपूर्ण सवाल सरकारी धन के संभावित इस्तेमाल को लेकर उठाया गया है। प्रतिभा कुलाई ने अपने पत्र में मुख्य सचिव से यह पता लगाने का अनुरोध किया है कि नेमप्लेट को तैयार कराने, खरीदने या लगाने के लिए सरकारी फंड का इस्तेमाल किया गया था या नहीं।
यदि सरकारी धन का इस्तेमाल हुआ है, तो उसकी मंजूरी किस स्तर पर दी गई और किस मद से भुगतान किया गया, इसकी भी जांच की मांग की गई है।
कुलाई का कहना है कि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल केवल निर्धारित नियमों और आधिकारिक कार्यों के लिए होना चाहिए। इसलिए नेमप्लेट से जुड़े खर्च की जांच किए जाने की जरूरत है।
प्रशासनिक शिष्टाचार का मुद्दा
प्रतिभा कुलाई ने इसे केवल नेमप्लेट का मामला न मानकर प्रशासनिक शिष्टाचार से जुड़ा विषय बताया है। उनके अनुसार, सरकारी भवनों और आवासों की पहचान से जुड़ी व्यवस्थाओं में निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा है कि सरकारी आवास पर अधिकारी के नाम और पद का उल्लेख प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है। यदि इसमें किसी अन्य व्यक्ति का नाम जोड़ा जाता है, तो उसके लिए नियम और अनुमति स्पष्ट होनी चाहिए।
उनका आरोप है कि जीवनसाथी का नाम शामिल करना सरकारी नियमों के खिलाफ हो सकता है। इसी वजह से उन्होंने सरकार से मामले की आधिकारिक जांच कराने की मांग की है।
मुख्य सचिव से मांगी गई स्पष्टता
कुलाई ने मुख्य सचिव से इस पूरे मामले में तथ्यों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया है। जांच में यह देखा जा सकता है कि नेमप्लेट किसने बनवाई, उसे लगाने का आदेश किस स्तर पर दिया गया और इसके लिए धन कहां से आया।
इसके अलावा सरकारी आवासों की नेमप्लेट से जुड़े मौजूदा नियमों और प्रोटोकॉल की भी समीक्षा की जा सकती है।
यदि जांच में किसी तरह की नियमविरुद्ध प्रक्रिया सामने आती है तो उसके लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठ सकती है।
मामला बना चर्चा का विषय
दक्षिण कन्नड़ के डिप्टी कमिश्नर के सरकारी आवास की नेमप्लेट को लेकर उठे सवाल ने प्रशासनिक हलकों में चर्चा शुरू कर दी है। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी अधिकारियों के आवास और सुविधाएं सरकारी नियमों और प्रोटोकॉल के तहत संचालित होती हैं।
प्रतिभा कुलाई ने सरकार से जांच की मांग कर यह सवाल उठाया है कि सरकारी आवास की पहचान से जुड़े मामले में नियमों का पालन हुआ या नहीं। खासतौर पर सरकारी फंड के इस्तेमाल की जांच की मांग ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
अब जांच के फैसले पर नजर
फिलहाल मुख्य सचिव के स्तर से मामले में क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर नजर रहेगी। यदि सरकार जांच का आदेश देती है तो नेमप्लेट की अनुमति, उसके निर्माण और खर्च से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा सकती है।
साथ ही यह भी स्पष्ट हो सकता है कि सरकारी आवासों की नेमप्लेट को लेकर लागू नियमों में अधिकारी के जीवनसाथी का नाम शामिल करने की अनुमति है या नहीं।
प्रतिभा कुलाई की शिकायत के बाद अब पूरे मामले में सरकार की प्रतिक्रिया और संभावित जांच महत्वपूर्ण हो गई है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नेमप्लेट लगाने में किसी नियम का उल्लंघन हुआ था या नहीं और सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है।