Karnataka : मानसून की देरी से बुवाई प्रभावित, पैदावार पर असर की आशंका

Update: 2026-06-17 07:24 GMT

Karnataka कर्नाटक : कर्नाटक में इस वर्ष मानसून के देर से आने के कारण कृषि गतिविधियों पर बड़ा असर देखने को मिल रहा है। राज्य में खरीफ सीजन की बुवाई लक्ष्य के मुकाबले काफी पीछे चल रही है, जिससे आने वाले समय में फसलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अब तक राज्य में कुल बुवाई लक्ष्य का केवल लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा ही पूरा हो सका है। बारिश में देरी और अपेक्षाकृत कम वर्षा के कारण खेतों की तैयारी और बुवाई का काम प्रभावित हुआ है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस सीजन में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया था, जिसका सीधा असर कृषि कार्यों पर दिखाई दे रहा है। समय पर बारिश न होने से कई क्षेत्रों में बुवाई की गति धीमी पड़ गई है और किसानों को अपनी खेती की योजना में बदलाव करना पड़ रहा है।

जानकारों का कहना है कि इस देरी का असर केवल बुवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव पूरी फसल चक्र पर पड़ सकता है। जिन किसानों ने लंबे समय में तैयार होने वाली फसलों की योजना बनाई थी, उन्हें अब परिस्थितियों को देखते हुए कम अवधि वाली फसलों की ओर रुख करना पड़ सकता है। इससे उत्पादन की मात्रा और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

कृषि विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 24.43 लाख हेक्टेयर सिंचित भूमि में बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसमें से अब तक 5.86 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है। यह लक्ष्य का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा है, जो मौजूदा स्थिति को दर्शाता है।

इसी तरह बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां कुल 59.68 लाख हेक्टेयर भूमि में बुवाई का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक केवल 11.23 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुवाई हो पाई है। इससे साफ है कि मानसून की अनिश्चितता ने खेती के काम को काफी प्रभावित किया है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो किसानों को फसल पैटर्न बदलना पड़ सकता है। इसका सीधा असर उत्पादन, आय और बाजार में आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

कई इलाकों में किसान अभी भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि बचे हुए खेतों में बुवाई पूरी की जा सके। हालांकि देरी के चलते समय सीमा कम होती जा रही है, जिससे फसल उत्पादन के लिए उपलब्ध समय भी घट रहा है।

इस स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसानों को मौसम के अनुसार फसल चयन करने की सलाह दी जा रही है।

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