Karnataka कर्नाटक: राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस. साहूकारा को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद और अधिकारों का कथित तौर पर दुरुपयोग करते हुए अपनी दो बेटियों को सरकारी नौकरी दिलाने में मदद की।
राज्यपाल के आदेश के बाद KPSC चेयरमैन के खिलाफ लगे आरोपों की जांच का रास्ता साफ हो गया है। राज्यपाल ने राष्ट्रपति से सिफारिश की है कि शिवशंकरप्पा साहूकारा के खिलाफ लगे आरोपों को जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट भेजा जाए।
राज्यपाल के आदेश में कहा गया है कि जांच पूरी होने तक KPSC के एक वरिष्ठ सदस्य को अंतरिम अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा गया है। यह व्यवस्था अगले आदेश तक लागू रहेगी।
शिवशंकरप्पा एस. साहूकारा पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया और अपनी बेटियों की सरकारी नियुक्ति प्रक्रिया में अनुचित सहायता पहुंचाई। आरोपों के अनुसार, उनकी दो बेटियों की नियुक्ति इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन ऑफिसर के पद पर हुई थी।
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए परिवार की वार्षिक आय से जुड़े प्रमाण पत्र में कथित रूप से गलत जानकारी दी गई। आरोप है कि चेयरमैन ने अपनी बेटी को लाभ पहुंचाने के लिए आय प्रमाण पत्र में गलत विवरण देने में मदद की।
राज्यपाल के आदेश में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया यह पाया गया है कि चेयरमैन ने अपने पद की गरिमा और जिम्मेदारियों के विपरीत काम किया। इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई जरूरी मानी गई।
कर्नाटक लोक सेवा आयोग राज्य की सबसे महत्वपूर्ण भर्ती संस्थाओं में से एक है। आयोग राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए परीक्षाएं और चयन प्रक्रिया आयोजित करता है। ऐसे में आयोग के शीर्ष पद पर बैठे अधिकारी पर लगे आरोपों ने प्रशासनिक हलकों में चिंता पैदा कर दी है।
सरकारी सेवाओं में भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। KPSC जैसी संस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर हमेशा विशेष ध्यान दिया जाता है। ऐसे में चेयरमैन पर लगे आरोपों को गंभीरता से लिया गया है।
राज्यपाल की ओर से की गई कार्रवाई के बाद अब मामले की विस्तृत जांच सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर होने की संभावना है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि क्या नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ था और क्या चेयरमैन ने अपने पद का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया।
फिलहाल शिवशंकरप्पा साहूकारा को पद से निलंबित कर दिया गया है। उनके स्थान पर KPSC के वरिष्ठ सदस्य को अंतरिम जिम्मेदारी दी गई है ताकि आयोग का कामकाज प्रभावित न हो।
इस मामले ने कर्नाटक में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर बहस शुरू कर दी है। विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों की ओर से भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग की जाती रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी भर्ती संस्थानों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच जरूरी है। यदि आरोप साबित होते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
राज्यपाल के इस फैसले के बाद अब सभी की नजरें आगे की जांच प्रक्रिया पर हैं। सुप्रीम कोर्ट की जांच और उसके निष्कर्षों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि KPSC चेयरमैन के खिलाफ लगे आरोपों में कितनी सच्चाई है।
फिलहाल सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता KPSC के कामकाज को सुचारू बनाए रखना और भर्ती प्रक्रिया में विश्वास बनाए रखना है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।