कर्नाटक विधान परिषद के स्पीकर बसवराज होरट्टी देंगे इस्तीफा

Update: 2026-08-06 07:13 GMT

बेंगलुरु: कर्नाटक विधान परिषद के सभापति (स्पीकर) बसवराज होरट्टी ने अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश की है। कांग्रेस आलाकमान की ओर से विधान परिषद के सभापति पद के लिए सलीम अहमद के नाम की घोषणा के बाद यह राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार द्वारा होरट्टी से पद छोड़ने का अनुरोध किए जाने के बाद उन्होंने 14 अगस्त को इस्तीफा देने की घोषणा की है।

बसवराज होरट्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) से विधान परिषद के सदस्य हैं और लंबे समय से कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वह विधान परिषद के सबसे अनुभवी सदस्यों में शामिल हैं। उनके नाम परिषद सदस्य के रूप में लगातार 46 वर्षों से अधिक समय तक सेवा करने का रिकॉर्ड दर्ज है।

होरट्टी ने अपने लंबे राजनीतिक कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह कई बार विधान परिषद के सभापति रह चुके हैं और सदन की कार्यवाही को संचालित करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनके अनुभव और संसदीय परंपराओं की समझ के लिए उन्हें व्यापक रूप से जाना जाता है।

राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि सभापति पद में बदलाव का मुख्य कारण विधान परिषद में कांग्रेस का बहुमत होना है। वर्तमान में परिषद में कांग्रेस के पास संख्या बल अधिक है, जिसके चलते पार्टी अपने उम्मीदवार को सभापति पद पर लाना चाहती है।

कांग्रेस आलाकमान ने सभापति पद के लिए सलीम अहमद के नाम को आगे बढ़ाया है। सलीम अहमद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी संगठन में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। उनके नाम की घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में यह बदलाव तेजी से चर्चा का विषय बन गया।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने होरट्टी से बातचीत कर उनसे सभापति पद छोड़ने का अनुरोध किया था। इसके बाद होरट्टी ने इस्तीफा देने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि वह 14 अगस्त को अपना इस्तीफा सौंप देंगे।

हालांकि, होरट्टी का इस्तीफा केवल एक राजनीतिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह कर्नाटक विधान परिषद के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है। लंबे समय तक सदन का नेतृत्व करने वाले नेता के रूप में उनके कार्यकाल को याद किया जाएगा।

विधान परिषद में सभापति का पद संवैधानिक रूप से महत्वपूर्ण होता है। सभापति सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि नियमों के अनुसार चर्चा और निर्णय प्रक्रिया आगे बढ़े। ऐसे में नए सभापति के चयन को लेकर राजनीतिक दलों की रुचि स्वाभाविक है।

कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही विधान परिषद में अपने प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। विधानसभा के साथ-साथ विधान परिषद में भी संख्या बल राजनीतिक फैसलों को प्रभावित करता है। इसी क्रम में सभापति पद पर बदलाव को कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

विपक्षी दलों की ओर से इस घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। बीजेपी के लिए होरट्टी का इस्तीफा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव है, क्योंकि वह पार्टी से जुड़े वरिष्ठ विधान परिषद सदस्य रहे हैं। हालांकि, होरट्टी का लंबा अनुभव और सभी दलों के नेताओं के साथ उनके संबंध उन्हें अलग पहचान देते हैं।

बसवराज होरट्टी ने अपने राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। शिक्षक समुदाय से जुड़े मुद्दों से लेकर राज्य की राजनीति तक उन्होंने लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई है। विधान परिषद में उनकी मौजूदगी को एक स्थिर और अनुभवी नेतृत्व के रूप में देखा जाता रहा है।

अब सभी की नजरें 14 अगस्त के बाद की प्रक्रिया पर होंगी, जब होरट्टी औपचारिक रूप से इस्तीफा सौंपेंगे और नए सभापति के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यदि सलीम अहमद का चुनाव होता है, तो यह कर्नाटक विधान परिषद के नेतृत्व में एक नया राजनीतिक अध्याय होगा।

कुल मिलाकर, कर्नाटक विधान परिषद में होने वाला यह बदलाव राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है। जहां कांग्रेस अपने बहुमत के आधार पर नेतृत्व परिवर्तन की ओर बढ़ रही है, वहीं बसवराज होरट्टी का लंबा कार्यकाल राज्य की संसदीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज रहेगा।

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