तिरुमाला मंदिर में कर्नाटक के लिए नया प्रोटोकॉल लाएगी सरकार

Update: 2026-07-13 05:08 GMT

Karnataka कर्नाटक: सरकार जल्द ही एक नया प्रोटोकॉल ऑर्डर जारी करने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत राज्य के चुने हुए प्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य विशिष्ट लोगों को तिरुमाला स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में कर्नाटक की ओर से पहली रोजाना आरती लेने का अवसर मिल सकता है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने रविवार को इसकी जानकारी दी।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बनशंकरी फेज-6 के लिंगाधिरनाहल्ली में श्री षणमुख सुब्रमण्य मंदिर के निर्माण कार्य के शिलान्यास कार्यक्रम के बाद यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था के अनुसार तिरुमाला मंदिर में कर्नाटक की ओर से नियुक्त विशेष अधिकारी पहली आरती लेने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नए प्रोटोकॉल के लागू होने के बाद कर्नाटक की ओर से तिरुमाला मंदिर जाने वाले मंत्रियों, विधायकों, वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों, न्यायाधीशों तथा अन्य पात्र विशिष्ट लोगों को भी यह सम्मान प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस संबंध में जल्द ही आधिकारिक आदेश जारी करेगी। इसका उद्देश्य कर्नाटक से जुड़े महत्वपूर्ण व्यक्तियों को मंदिर में विशेष धार्मिक अवसरों में भाग लेने का अवसर उपलब्ध कराना है।

वर्तमान व्यवस्था के तहत तिरुमाला मंदिर में विशेष प्रार्थना और पहली आरती से जुड़ी कुछ सुविधाएं सीमित लोगों को ही मिलती हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, अभी केवल मुख्यमंत्री को ही मंदिर के मुख्य द्वार के पास खड़े होकर विशेष प्रार्थना करने की अनुमति है।

डी.के. शिवकुमार ने कहा कि यदि नया प्रोटोकॉल लागू होता है तो कर्नाटक सरकार की ओर से तिरुमाला जाने वाले योग्य प्रतिनिधियों और अधिकारियों को भगवान वेंकटेश्वर के सामने खड़े होकर पहली आरती लेने का अवसर मिल सकेगा।

तिरुमाला श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध और श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्रों में से एक है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में होने वाली दैनिक पूजा और आरती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

कर्नाटक सरकार का यह प्रस्ताव राज्य और मंदिर प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। हालांकि, नए प्रोटोकॉल को लागू करने से पहले संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान धार्मिक स्थलों के विकास और संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं होते, बल्कि वे संस्कृति और परंपराओं के केंद्र भी होते हैं। इसलिए सरकार धार्मिक स्थलों के विकास के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।

श्री षणमुख सुब्रमण्य मंदिर के निर्माण कार्य के शिलान्यास कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास से लोगों की आस्था को मजबूती मिलती है।

तिरुमाला मंदिर में कर्नाटक के लिए प्रस्तावित नए प्रोटोकॉल को लेकर अब आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। यदि यह आदेश लागू होता है तो कर्नाटक के कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को मंदिर की विशेष आरती में शामिल होने का अवसर मिल सकता है।

हालांकि, मंदिर प्रशासन की ओर से इस प्रस्ताव को लेकर अंतिम निर्णय और नियमों की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। नए प्रोटोकॉल के लागू होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन-किन श्रेणियों के लोगों को पहली आरती लेने की सुविधा दी जाएगी।

मुख्यमंत्री शिवकुमार के इस बयान के बाद धार्मिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा शुरू हो गई है। कर्नाटक सरकार इसे राज्य के प्रतिनिधियों के सम्मान से जोड़कर देख रही है, जबकि मंदिर से जुड़े नियमों और परंपराओं के पालन पर भी ध्यान दिया जाएगा।

आने वाले दिनों में सरकार की ओर से जारी होने वाला प्रोटोकॉल ऑर्डर इस पूरी व्यवस्था को स्पष्ट करेगा। इसके बाद तय होगा कि तिरुमाला मंदिर में कर्नाटक की ओर से पहली आरती लेने की सुविधा किन लोगों को मिल सकेगी।

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