कलबुर्गी। कर्नाटक के कलबुर्गी जिले में आवारा कुत्तों का आतंक एक मासूम बच्चे की जान ले गया। शुक्रवार शाम धारियापुरा-कोटनूर GDA लेआउट में एक आवारा कुत्ते ने सड़क पर खेल रहे चार वर्षीय बच्चे पर अचानक हमला कर दिया। कुत्ते ने बच्चे को बुरी तरह नोच डाला, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। परिजन उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। बच्चे की मौत के बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों ने नगर निगम प्रशासन से आवारा कुत्तों की समस्या पर तत्काल कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की है।

मृतक बच्चे की पहचान मनोज शरणबसप्पा वागदारागी के रूप में हुई है। वह मूल रूप से कलबुर्गी तालुक के जंबागा (B) गांव का रहने वाला था। उसके पिता शरणबसप्पा पुजारी कलबुर्गी शहर में एक वॉचमैन के रूप में काम करते हैं। रोजगार के सिलसिले में परिवार शहर के धारियापुरा-कोटनूर इलाके में रह रहा था। शुक्रवार को मनोज घर के बाहर सड़क पर खेल रहा था। इसी दौरान अचानक एक आवारा कुत्ता वहां पहुंचा और उस पर हमला कर दिया।

सड़क पर खेलते समय अचानक किया हमला

जानकारी के अनुसार, मनोज गणदेवता मंदिर के पास सड़क पर खेल रहा था। तभी कुत्ते ने अचानक उस पर हमला कर दिया। हमले में बच्चे को शरीर के कई हिस्सों में गंभीर काटने और खरोंच के घाव आए। अचानक हुई इस घटना से आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। बच्चे की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और उसे बचाने का प्रयास किया।

घटना के बाद परिजन घायल बच्चे को तत्काल नजदीकी निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए आगे उपचार के लिए उसे गुलबर्गा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS) अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन चोटों की गंभीरता के कारण उसकी मौत हो गई।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

चार साल के मनोज की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिस बच्चे की उम्र खेलने-कूदने और परिवार के साथ खुशियां बिताने की थी, उसकी इस तरह दर्दनाक मौत ने सभी को झकझोर दिया है। पिता शरणबसप्पा शहर में वॉचमैन का काम करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। घटना के बाद परिवार को गहरा सदमा पहुंचा है।

बच्चे की मौत की खबर फैलते ही स्थानीय निवासियों में नाराजगी बढ़ गई। लोगों ने आरोप लगाया कि इलाके में आवारा कुत्तों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। बच्चों का घर के बाहर खेलना भी जोखिम भरा बन गया है। निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं।

नगर निगम के खिलाफ दर्ज हुआ मामला

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने नगर निगम की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना के संबंध में स्टेशन बाजार पुलिस थाने में नगर निगम के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है। स्थानीय निवासियों ने आवारा कुत्तों को रिहायशी इलाकों से हटाने और मृतक बच्चे के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है।

लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों और आवासीय क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी को लेकर प्रशासन को पहले से सतर्क रहना चाहिए। खासकर उन जगहों पर जहां बच्चे खेलते हैं और परिवारों की आवाजाही अधिक रहती है, वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम जरूरी हैं।

एक ही दिन में कुत्ते के हमले से 13 लोग घायल

कलबुर्गी में आवारा कुत्तों से जुड़ी चिंता केवल मनोज की मौत तक सीमित नहीं है। इसी दौरान शहर के देवनगर इलाके में एक अन्य कुत्ते ने कथित तौर पर 13 लोगों को काटकर घायल कर दिया। यह घटना शनिवार सुबह करीब छह बजे हुई। रिपोर्ट के अनुसार, कुत्ते ने घरों के सामने खड़े लोगों पर अचानक हमला किया।

घायलों के सिर, पेट, हाथ और पैरों में चोटें आईं। सभी को उपचार के लिए गुलबर्गा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया। लगातार सामने आई इन घटनाओं ने शहर में आवारा और संभावित रूप से संक्रमित कुत्तों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

पहले भी बच्चों पर हो चुके हैं हमले

कलबुर्गी और आसपास के क्षेत्रों में इससे पहले भी छोटे बच्चों पर आवारा कुत्तों के हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पिछले महीने सेदम तालुक के मीनाहबल गांव में चार वर्षीय बच्ची सान्वी पर कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया था। इस घटना में उसके चेहरे, होंठ और गाल पर गंभीर चोटें आई थीं। उसे उपचार के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।

इसके अलावा रायचूर शहर के मालियाबाद इलाके में भी चार वर्षीय बच्चे गोपाल पर कुत्ते ने हमला किया था। इस हमले में उसके सिर पर गंभीर चोटें आई थीं। लगातार हो रही घटनाओं के कारण अभिभावकों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।

आवारा कुत्तों पर नियंत्रण की मांग

मनोज की मौत के बाद स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन और नगर निगम से आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल घटना होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय नियमित निगरानी और प्रभावी प्रबंधन की व्यवस्था की जानी चाहिए।

शहरों में आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए नसबंदी, टीकाकरण और पशु चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करना महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही आक्रामक व्यवहार करने वाले या संदिग्ध रूप से संक्रमित कुत्तों की पहचान कर पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की सहायता से उचित कार्रवाई जरूरी है।

फिलहाल चार वर्षीय मनोज की मौत ने कलबुर्गी में बच्चों की सुरक्षा और आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग प्रशासन से जवाबदेही तय करने, प्रभावित परिवार को सहायता देने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

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