बेंगलुरु। कर्नाटक में कन्नड़ भाषा और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। कन्नड़ राज्योत्सव के अवसर पर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने घोषणा की है कि राज्य के पारंपरिक पीले और लाल रंग के झंडे के डिजाइन में बदलाव किया जाएगा। प्रस्तावित नए झंडे में एक और रंग जोड़ा जाएगा और बीच में कर्नाटक का आधिकारिक राज्य प्रतीक चिह्न लगाया जाएगा। इसके साथ ही सरकार सरकारी कार्यालयों और निजी कंपनियों में कन्नड़ ध्वज फहराना अनिवार्य करने की दिशा में भी तैयारी कर रही है। इस प्रस्ताव पर आगामी विधानसभा सत्र में चर्चा की जाएगी और इसके बाद आवश्यक मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

कर्नाटक में हर साल एक नवंबर को कन्नड़ राज्योत्सव मनाया जाता है। इसी अवसर पर डीके शिवकुमार ने राज्य की भाषा, संस्कृति और पहचान से जुड़े मुद्दों पर सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कन्नड़ भाषा, कन्नड़ भूमि और राज्य के ध्वज की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। दुनिया के अलग-अलग देशों में रहने वाले कन्नड़ भाषियों को भी उन्होंने राज्योत्सव की शुभकामनाएं दीं।

झंडे में जुड़ेंगे दो नए तत्व

कर्नाटक का पारंपरिक ध्वज लंबे समय से पीले और लाल रंगों के कारण पहचाना जाता है। यह ध्वज कन्नड़ अस्मिता और क्षेत्रीय सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माना जाता है। अब राज्य सरकार इसे नए स्वरूप में प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है।

प्रस्तावित डिजाइन में मौजूदा पीले और लाल रंगों के साथ तीसरा रंग जोड़ा जाएगा। इसके अलावा झंडे के मध्य भाग में कर्नाटक का आधिकारिक राज्य प्रतीक चिह्न लगाने का प्रस्ताव है। हालांकि, नए रंग का चयन, रंगों का क्रम, झंडे का आकार और अंतिम डिजाइन अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है।

सरकार का मानना है कि झंडे को लेकर स्पष्ट डिजाइन और दिशा-निर्देश होने चाहिए, ताकि राज्य के भीतर और बाहर इसका उपयोग एक समान तरीके से किया जा सके।

विधानसभा में होगी चर्चा, फिर केंद्र को भेजा जाएगा प्रस्ताव

डीके शिवकुमार ने कहा कि नए झंडे के डिजाइन और उसके इस्तेमाल को लेकर जल्दबाजी में फैसला नहीं लिया जाएगा। इसके लिए आगामी विधानसभा सत्र में विधायकों के साथ विस्तार से चर्चा की जाएगी। सरकार आम जनता और कन्नड़ संगठनों से भी सुझाव लेने की तैयारी कर रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि झंडा कैसा होना चाहिए, इसे कहां फहराया जाएगा और इसके इस्तेमाल के क्या नियम होंगे, इन सभी पहलुओं पर स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाएंगे। विधानसभा में चर्चा और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रस्ताव को केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

इसका मतलब है कि फिलहाल नया झंडा अंतिम रूप से स्वीकृत नहीं हुआ है। इसके डिजाइन और आधिकारिक इस्तेमाल को लेकर आगे की प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।

सरकारी कार्यालयों और निजी कंपनियों में भी फहराया जाएगा झंडा

उपमुख्यमंत्री ने सरकारी कार्यालयों के साथ निजी कंपनियों में भी कन्नड़ ध्वज फहराना अनिवार्य करने की तैयारी की जानकारी दी। इस प्रस्ताव के दायरे में आईटी और बीटी कंपनियां भी शामिल हो सकती हैं।

सरकार का उद्देश्य यह है कि राज्य में संचालित संस्थान कन्नड़ भाषा और स्थानीय संस्कृति के प्रति सम्मान प्रदर्शित करें। बेंगलुरु जैसे शहर में देश के अलग-अलग राज्यों और विदेशों से बड़ी संख्या में लोग काम करने आते हैं। ऐसे में सरकार कन्नड़ भाषा और सांस्कृतिक पहचान को संस्थागत स्तर पर बढ़ावा देना चाहती है।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ध्वज फहराने की नई अनिवार्यता अभी प्रस्तावित व्यवस्था है। इसके लागू होने का तरीका, समयसीमा और संबंधित नियम विधानसभा चर्चा तथा केंद्र की मंजूरी के बाद स्पष्ट होंगे।

कन्नड़ अस्मिता और भाषा की रक्षा पर जोर

डीके शिवकुमार ने कहा कि कन्नड़ केवल एक भाषा नहीं, बल्कि राज्य की पहचान और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कन्नड़ भाषा के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी परंपरा काफी पुरानी और समृद्ध है।

उन्होंने कन्नड़ भाषा को बढ़ावा देने वाले देश-विदेश में रहने वाले सभी लोगों के योगदान की सराहना की। उनके मुताबिक, राज्य की भाषा, संस्कृति और ध्वज का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।

सरकार की इस पहल को कन्नड़ भाषा के संरक्षण और क्षेत्रीय सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

कर्नाटक के अलग झंडे को लेकर पहले भी उठ चुका है मुद्दा

कर्नाटक के अलग राज्य ध्वज को लेकर पहले भी राजनीतिक और संवैधानिक स्तर पर चर्चा हो चुकी है। वर्ष 2018 में राज्य में अलग झंडे के डिजाइन को लेकर एक प्रस्ताव सामने आया था। उस समय पीले, सफेद और लाल रंगों के साथ राज्य के प्रतीक चिह्न वाला डिजाइन सुझाया गया था।

केंद्र सरकार ने दो जनवरी 2018 को संसद में स्पष्ट किया था कि भारतीय संविधान में राज्यों के अलग झंडे का कोई विशेष उल्लेख नहीं है। इसलिए कर्नाटक के प्रस्तावित झंडे को लेकर संवैधानिक और प्रशासनिक पहलुओं का परीक्षण महत्वपूर्ण माना जाता है।

अब 2026 में राज्य सरकार ने पारंपरिक कन्नड़ ध्वज में नया रंग और राज्य का प्रतीक चिह्न जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाया है। आने वाले विधानसभा सत्र में इस पर होने वाली चर्चा और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही नए डिजाइन की अंतिम तस्वीर सामने आएगी।

फिलहाल कर्नाटक सरकार की यह पहल कन्नड़ राज्योत्सव के अवसर पर चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है। अब देखना होगा कि प्रस्तावित नए झंडे को किस प्रकार का स्वरूप मिलता है और सरकारी तथा निजी संस्थानों में इसे अनिवार्य बनाने के लिए सरकार क्या नियम तैयार करती है।