बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने तंबाकू या निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला उत्पादों पर लगाए गए एक साल के प्रतिबंध को हटाने का फैसला किया है। प्रतिबंध लागू होने के महज दो दिन बाद ही सरकार ने इसे वापस लेने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अधिकारियों को प्रतिबंध आदेश वापस लेने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त ने तंबाकू या निकोटीन वाले गुटखा और पान मसाला उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण, परिवहन और बिक्री पर एक साल का प्रतिबंध लगाया था। यह आदेश राज्यभर में लागू किया गया था।
प्रतिबंध के आदेश के बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने नाराजगी जताई। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री इस बात से नाराज थे कि यह फैसला उनकी जानकारी के बिना जारी किया गया था। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी ली और प्रतिबंध हटाने का निर्देश दिया।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने प्रतिबंध के संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस फैसले से जुड़े कई पहलुओं पर विचार करने की जरूरत है। खासतौर पर किसानों और संबंधित कारोबार से जुड़े लोगों पर इसके असर को लेकर उन्होंने अधिकारियों को ध्यान देने को कहा।
कर्नाटक सरकार की ओर से प्रतिबंध हटाने का फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में तंबाकू उत्पादों को लेकर स्वास्थ्य और आर्थिक दोनों पहलुओं पर चर्चा चल रही है।
तंबाकू और निकोटीन युक्त उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने का उद्देश्य लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करना बताया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से गुटखा और पान मसाला जैसे उत्पादों के सेवन से होने वाली बीमारियों को लेकर चिंता जताते रहे हैं।
वहीं, दूसरी ओर इन उत्पादों के उत्पादन और बिक्री से जुड़े कारोबारियों तथा किसानों की अपनी चिंताएं हैं। सरकार का कहना है कि किसी भी नीति को लागू करने से पहले उसके सभी प्रभावों का आकलन करना जरूरी है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश में राज्य में गुटखा और पान मसाला उत्पादों की बिक्री और आपूर्ति पर रोक लगाने की बात कही गई थी। आदेश जारी होने के बाद संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे।
हालांकि, मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब इस प्रतिबंध को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों को आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाने को कहा गया है।
इस मामले ने राज्य सरकार के अंदर निर्णय प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद यह स्पष्ट हो गया कि बड़े नीतिगत फैसलों में विभागों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू नियंत्रण जैसे मुद्दों पर सरकार को स्वास्थ्य हितों के साथ-साथ आर्थिक प्रभावों पर भी संतुलित तरीके से विचार करना पड़ता है।
कर्नाटक में तंबाकू उत्पादों को लेकर पहले भी कई बार कार्रवाई की गई है। समय-समय पर सरकार और प्रशासन की ओर से इन उत्पादों के खिलाफ अभियान चलाए जाते रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि तंबाकू सेवन को कम करने के लिए जागरूकता और सख्त नियम दोनों जरूरी हैं। वहीं, व्यापार और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों की चिंताओं को भी ध्यान में रखना पड़ता है।
फिलहाल सरकार ने प्रतिबंध हटाने का फैसला कर लिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आगे तंबाकू और निकोटीन युक्त उत्पादों को लेकर राज्य सरकार क्या नीति अपनाती है।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के निर्देश के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग को आदेश वापस लेने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद राज्य में इन उत्पादों के संबंध में स्थिति पहले जैसी हो सकती है।