कर्नाटक : प्रसिद्ध मैसूर दशहरा उत्सव की तैयारियों के बीच शुक्रवार को दशहरा हाथियों के पहले समूह का भव्य और पारंपरिक स्वागत किया गया। मैसूर पैलेस के ऐतिहासिक जयामार्तंडा गेट पर आयोजित समारोह में हाथियों के आगमन के साथ ही उत्सव का माहौल और भी खास हो गया।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। पारंपरिक रीति-रिवाजों, लोक कला प्रस्तुतियों और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ दशहरा हाथियों का स्वागत किया गया।

नौ दशहरा हाथी पहुंचे मैसूर पैलेस

दशहरा उत्सव के लिए पहले चरण में कुल नौ हाथी मैसूर पहुंचे। ये हाथी अरण्य भवन से पैदल यात्रा करते हुए अंबाविलास पैलेस तक पहुंचे।

हाथियों के साथ पारंपरिक वाद्ययंत्र बजाते कलाकार और लोक कला मंडलियां भी चल रही थीं। जुलूस जब पैलेस के जयामार्तंडा गेट पर पहुंचा तो वहां मौजूद लोगों ने उत्साह के साथ हाथियों का स्वागत किया।

इसके बाद हाथियों को पैलेस के प्रवेश द्वार के पास कतार में खड़ा किया गया और पारंपरिक प्रक्रिया के तहत उन्हें परिसर में प्रवेश कराया गया।

शुभ मुहूर्त में हुई विशेष पूजा

शुक्रवार सुबह 9.55 बजे तुला लग्न के शुभ मुहूर्त में जिला प्रशासन और पैलेस बोर्ड की ओर से विशेष पूजा-अर्चना की गई।

हाथियों के स्वागत के लिए आयोजित पूजा में धार्मिक परंपराओं का पालन किया गया। पूजा के बाद हाथियों को मैसूर दशहरा उत्सव के लिए औपचारिक रूप से शामिल किया गया।

मंत्री और गणमान्य लोग रहे मौजूद

हाथियों के स्वागत समारोह में कई प्रमुख लोग शामिल हुए। इस दौरान शहरी विकास मंत्री और मैसूर जिले के प्रभारी मंत्री यतिंद्र सिद्धारमैया तथा वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी समेत कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

उन्होंने दशहरा उत्सव की तैयारियों का जायजा लिया और पारंपरिक कार्यक्रमों में भाग लिया।

लोक कला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां

स्वागत समारोह को खास बनाने के लिए कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसमें कठपुतली नृत्य, कंसले और अन्य लोक कला प्रस्तुतियां शामिल थीं।

कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से कर्नाटक की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को प्रदर्शित किया। पारंपरिक संगीत और लोक नृत्यों ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।

दशहरा हाथियों की होती है अहम भूमिका

मैसूर दशहरा में हाथियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। हर साल होने वाली ऐतिहासिक जंबू सवारी में हाथी मुख्य आकर्षण होते हैं।

विशेष रूप से प्रशिक्षित ये हाथी दशहरा समारोह के दौरान शाही परंपरा का हिस्सा बनते हैं। इनमें से प्रमुख हाथी विजयादशमी के दिन होने वाली भव्य शोभायात्रा में शामिल होते हैं।

सुरक्षा और व्यवस्था के किए गए इंतजाम

दशहरा हाथियों के आगमन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए थे। हाथियों के रास्ते और पैलेस परिसर में अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई थी।

वन विभाग की टीम भी हाथियों के स्वास्थ्य और देखभाल को लेकर पूरी तरह सक्रिय रही।

मैसूर दशहरा की तैयारियां तेज

दशहरा हाथियों के आगमन के साथ ही मैसूर में उत्सव की तैयारियां और तेज हो गई हैं। पैलेस और शहर को सजाने का काम जारी है।

मैसूर दशहरा देश-विदेश में प्रसिद्ध है और हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक इस ऐतिहासिक उत्सव को देखने पहुंचते हैं।

परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है दशहरा

मैसूर दशहरा केवल धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि कर्नाटक की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। सदियों पुरानी परंपराओं को आज भी उसी भव्यता के साथ निभाया जाता है।

दशहरा हाथियों का आगमन इसी परंपरा की महत्वपूर्ण कड़ी है, जो उत्सव की शुरुआत का संकेत देता है।

नौ हाथियों के भव्य स्वागत के साथ मैसूर दशहरा उत्सव का रंग चढ़ने लगा है। अब लोगों को विजयादशमी के दिन होने वाली ऐतिहासिक जंबू सवारी और अन्य कार्यक्रमों का इंतजार है।

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