पेरियापटना। वोटरों की ‘स्पेशल इंटेंसिफाइड वेरिफिकेशन’ (SIR) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर राज्य सरकार फिलहाल अलग से कोई जांच शुरू नहीं करेगी। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शनिवार को कहा कि इस मामले की जांच चुनाव आयोग खुद कर रहा है, इसलिए राज्य सरकार की ओर से अलग जांच कराने की अभी कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की कार्रवाई देखने के बाद सरकार आगे कोई फैसला लेगी।

मुख्यमंत्री ने पेरियापटना तालुक के हिटनेहेब्बागली में हेलीकॉप्टर से पहुंचने के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही। वह यहां ‘प्रजा सेवा आंदोलन’ कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम में जाने से पहले मीडिया ने उनसे SIR प्रक्रिया में सामने आ रही कथित गड़बड़ियों और सरकार के अगले कदम को लेकर सवाल किए।

शिवकुमार ने कहा कि चुनाव आयोग स्वयं SIR से जुड़े मामले की जांच कर रहा है। ऐसे में राज्य सरकार को तत्काल समानांतर जांच शुरू करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार पहले चुनाव आयोग की जांच और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई का इंतजार करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा, “इस बारे में जानकारी सामने आ रही है कि एप्लीकेशन फॉर्म कहां छापे गए और वे बीजेपी तक कैसे पहुंचे। केंद्रीय चुनाव आयोग को भी इसकी सच्चाई पता है। देखते हैं आयोग क्या कार्रवाई करता है। हम बाद में कोई फैसला लेंगे।”

शिवकुमार के इस बयान के बाद साफ है कि सरकार फिलहाल इंतजार की रणनीति अपना रही है। सरकार की नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव आयोग कथित गड़बड़ियों को लेकर क्या निष्कर्ष निकालता है और उसके बाद किस तरह की कार्रवाई करता है।

SIR प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच एप्लीकेशन फॉर्म की छपाई और उनके कथित तौर पर बीजेपी तक पहुंचने का मुद्दा भी सामने आया है। मुख्यमंत्री ने इस विषय का उल्लेख जरूर किया, लेकिन इसे स्थापित तथ्य के रूप में पेश करने के बजाय सामने आ रही जानकारी के रूप में रखा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग भी इस मामले की वास्तविकता से अवगत है।

अब इस मामले में चुनाव आयोग की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आयोग की ओर से उठाए जाने वाले कदमों को देखने के बाद ही राज्य सरकार तय करेगी कि उसे अपने स्तर पर कोई अतिरिक्त कार्रवाई करनी है या नहीं।

SIR प्रक्रिया मतदाता सूची और मतदाताओं के सत्यापन से जुड़ी होने के कारण राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषय बन गई है। प्रक्रिया में किसी भी तरह की कथित अनियमितता के आरोप सामने आने पर निष्पक्षता और पारदर्शिता से जुड़े सवाल उठना स्वाभाविक हैं। इसी वजह से राज्य में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है।

हालांकि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी सरकार फिलहाल इस मामले में अलग जांच शुरू नहीं कर रही है। उनका कहना है कि जब चुनाव आयोग खुद मामले की पड़ताल कर रहा है तो पहले उसके निष्कर्ष और कार्रवाई सामने आने दी जानी चाहिए।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने SIR के मुद्दे पर चुनाव आयुक्त के साथ हुई अपनी हालिया मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव आयुक्त से मिलने के दौरान उन्होंने न तो कोई धरना दिया था और न ही किसी कानून का उल्लंघन किया था।

उनका यह बयान उस मुलाकात को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आया है। शिवकुमार ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने संबंधित मुद्दे पर अपनी बात रखी थी, लेकिन उनकी ओर से ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया जिसे धरना या कानून का उल्लंघन कहा जा सके।

मुख्यमंत्री की टिप्पणी से यह भी संकेत मिलता है कि सरकार SIR से जुड़े घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। भले ही फिलहाल अलग जांच नहीं कराई जा रही हो, लेकिन चुनाव आयोग की जांच पूरी होने के बाद परिस्थितियों के आधार पर सरकार अपने अगले कदम का फैसला कर सकती है।

शिवकुमार ने सीधे तौर पर यह नहीं बताया कि चुनाव आयोग की कार्रवाई से सरकार संतुष्ट नहीं होने की स्थिति में कौन सा कदम उठाया जाएगा। उन्होंने केवल इतना कहा कि आयोग क्या कार्रवाई करता है, इसे देखने के बाद सरकार कोई फैसला लेगी।

SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब उन एप्लीकेशन फॉर्म से जुड़ा है, जिनका उल्लेख मुख्यमंत्री ने अपने बयान में किया। उन्होंने कहा कि जानकारी सामने आ रही है कि ये फॉर्म कहां छापे गए और बीजेपी तक कैसे पहुंचे। हालांकि इन आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा।

ऐसे में मुख्यमंत्री के बयान को आरोपों पर सरकार की अंतिम राय के रूप में नहीं, बल्कि जांच के परिणाम का इंतजार करने वाले रुख के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय चुनाव आयोग को मामले की जांच करने का अवसर देने की बात कही है।

चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों में चुनाव आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। मतदाता सूची, मतदाता सत्यापन और चुनावी व्यवस्थाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करना आयोग की जिम्मेदारियों में शामिल है। इसीलिए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब संबंधित संस्था खुद जांच कर रही है तो अभी राज्य सरकार की अलग जांच की आवश्यकता नहीं है।

मुख्यमंत्री का यह बयान राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि SIR प्रक्रिया को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बन सकती है। ऐसे में सरकार की ओर से तत्काल जांच शुरू करने के बजाय चुनाव आयोग की कार्रवाई का इंतजार करने का फैसला मामले को नया मोड़ देता है।

शिवकुमार ने चुनाव आयुक्त के साथ अपनी मुलाकात का उल्लेख कर यह भी संदेश देने की कोशिश की कि उनकी ओर से मुद्दे को संस्थागत तरीके से उठाया गया है। उन्होंने धरना देने या कानून तोड़ने से साफ इनकार किया।

फिलहाल राज्य सरकार ने SIR में कथित गड़बड़ियों को लेकर किसी स्वतंत्र या अलग जांच की घोषणा नहीं की है। सरकार का कहना है कि चुनाव आयोग पहले से मामले की जांच कर रहा है और उसके सामने संबंधित जानकारी भी है।

आने वाले दिनों में अब सबसे ज्यादा नजर चुनाव आयोग की कार्रवाई पर रहेगी। यदि जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो आयोग क्या कदम उठाता है और उसके बाद राज्य सरकार की प्रतिक्रिया क्या रहती है, यह महत्वपूर्ण होगा।

कुल मिलाकर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने साफ कर दिया है कि SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार फिलहाल अलग जांच नहीं कराएगी। उन्होंने एप्लीकेशन फॉर्म की छपाई और उनके कथित तौर पर बीजेपी तक पहुंचने से जुड़े सवालों का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव आयोग मामले की सच्चाई जानता है। सरकार आयोग की कार्रवाई का इंतजार करेगी और उसके बाद जरूरत पड़ने पर आगे का फैसला लिया जाएगा।

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