कलबुर्गी। कर्नाटक के 71वें राज्योत्सव के अवसर पर राज्य के गृह, आईटी-बीटी एवं ई-गवर्नेंस मंत्री तथा कलबुर्गी जिले के प्रभारी मंत्री प्रियांक खड़गे ने कन्नड़ भाषा और संस्कृति के संरक्षण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कन्नड़ सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि यह भावनाओं, इतिहास, विचारों और संस्कृति का अनूठा संगम है। राज्य की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। रविवार, 1 नवंबर 2026 को कलबुर्गी में 71वें कन्नड़ राज्योत्सव के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने जिले के विकास की योजनाओं का भी खाका प्रस्तुत किया।

मंत्री ने कहा कि कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान बेहद समृद्ध और विविधतापूर्ण है। कन्नड़ भाषा की साहित्यिक परंपरा में लोक साहित्य, दास साहित्य, जैन साहित्य के साथ-साथ नवोदय, नव्य और बंदाया साहित्यिक आंदोलन शामिल हैं। इतनी विविध और समृद्ध साहित्यिक विरासत बहुत कम भाषाओं में देखने को मिलती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी भाषा, साहित्य, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।

कन्नड़ भाषा की पहचान को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने की जरूरत

प्रियांक खड़गे ने कर्नाटक की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य की पहचान केवल भाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की कला, साहित्य, खानपान, संगीत और क्षेत्रीय परंपराएं भी इसकी विशिष्टता को दर्शाती हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने हाल ही में दशहरा समारोह के दौरान 40 से अधिक विदेशी राजदूतों को आमंत्रित किया था। इस दौरान उन्हें विदेशी प्रतिनिधियों से बातचीत करने का अवसर मिला। विदेशी मेहमानों ने कर्नाटक की कला, साहित्य, भोजन और संस्कृति की सराहना की।

मंत्री के अनुसार, विदेशी प्रतिनिधि यह जानकर भी आश्चर्यचकित थे कि कन्नड़ भाषा का इतिहास करीब 2,000 वर्षों पुराना है। उन्होंने राज्य की साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक विविधता में भी गहरी रुचि दिखाई।

कलबुर्गी को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए नया ब्लूप्रिंट

राज्योत्सव समारोह के दौरान प्रियांक खड़गे ने कलबुर्गी के विकास को लेकर सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कलबुर्गी को केवल स्मार्ट सिटी ही नहीं, बल्कि टिकाऊ और सर्वांगीण विकसित शहर बनाने का संकल्प लिया गया है।

इसके लिए एक नया मास्टर प्लान और विकास का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है। इसमें विदेशी निवेश आकर्षित करने, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने, उद्योगों को प्रोत्साहित करने और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने को प्राथमिकता दी गई है।

उन्होंने विश्वास जताया कि विकास योजनाओं के सकारात्मक परिणाम अगले दो वर्षों में दिखाई देने लगेंगे। उनका कहना था कि कलबुर्गी को आर्थिक और औद्योगिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में एक साथ काम करने की आवश्यकता है।

युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मिलेगी मदद

मंत्री ने युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार की योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने के उद्देश्य से प्रबुद्ध अकादमी की स्थापना की गई है।

इस संस्थान का उद्देश्य उन युवाओं को बेहतर मार्गदर्शन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है, जो सरकारी सेवाओं और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करना चाहते हैं।

इसके अलावा कलबुर्गी नेक्स्ट फाउंडेशन की स्थापना भी की गई है। इसके माध्यम से जिले के विकास के लिए नए विचारों, नवाचार और निजी क्षेत्र के सहयोग से परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की संभावनाएं तलाश की जाएंगी।

मंत्री ने कहा कि शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराकर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

निजी निवेश और सरकारी योजनाओं से बदलेगी शहर की तस्वीर

प्रियांक खड़गे ने कहा कि कलबुर्गी के आर्थिक विकास के लिए सरकारी निवेश के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार द्वारा अप्पा झील के उद्घाटन का उल्लेख करते हुए इसे सरकार और निजी क्षेत्र के सहयोग का उदाहरण बताया।

उन्होंने कहा कि कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 17 सितंबर को मुख्यमंत्री ने कल्याण कर्नाटक इकोनॉमिक मिशन की घोषणा की थी। इस मिशन का उद्देश्य क्षेत्र में निवेश, उद्योग, कृषि और रोजगार के अवसरों का विस्तार करना है।

मंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में बेंगलुरु का योगदान लगभग 40 प्रतिशत है, जबकि कलबुर्गी जिले का योगदान करीब 1.9 प्रतिशत है। सरकार का लक्ष्य रोजगार के अवसर बढ़ाकर और लोगों की प्रति व्यक्ति आय में सुधार करके कलबुर्गी की आर्थिक हिस्सेदारी को मजबूत करना है।

कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और जैव-अर्थव्यवस्था पर जोर

कलबुर्गी और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक विकास की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए मंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा उद्योग और जैव-अर्थव्यवस्था से जुड़े अवसरों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि कल्याण कर्नाटक बायो-इकोनॉमी मिशन के माध्यम से नए आर्थिक अवसर पैदा करने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा स्थानीय कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और खेती में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जाएगा।

कलबुर्गी की तुअर दाल और कमलापुर केले जैसे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इससे किसानों की आय बढ़ाने और स्थानीय कारोबार को मजबूती देने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इस दिशा में इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

मलनाड से तटीय कर्नाटक तक अलग-अलग पहचान

प्रियांक खड़गे ने राज्य की क्षेत्रीय विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्नाटक का प्रत्येक क्षेत्र अपनी अलग पहचान और परंपरा रखता है। मलनाड क्षेत्र अपनी हरियाली के लिए प्रसिद्ध है, जबकि कल्याण कर्नाटक की पहचान तुअर दाल और सूफी संतों की परंपरा से जुड़ी है।

मांड्या क्षेत्र रेशम और दुग्ध उत्पादन के लिए जाना जाता है, वहीं तटीय कर्नाटक की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक कला, समानता, ज्ञान और युवाओं के अवसरों की धरती है।

विकास के लिए सभी से सहयोग की अपील

मंत्री ने अधिकारियों, शिक्षकों, पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से कलबुर्गी के विकास में सामूहिक भागीदारी निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिले को विकसित बनाने के लिए केवल योजनाएं तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी है।

उन्होंने शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, उद्योग और बुनियादी ढांचे में सुधार को जिले के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम में विधान परिषद सदस्य टिप्पन्नप्पा कमकनूर और शशिल नमोशी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर 71वें कन्नड़ राज्योत्सव के अवसर पर प्रियांक खड़गे ने भाषा और संस्कृति के संरक्षण के साथ कलबुर्गी के आर्थिक विकास का रोडमैप सामने रखा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तैयार किए गए ब्लूप्रिंट को कितनी तेजी से जमीन पर उतारा जाता है और इससे स्थानीय युवाओं, किसानों तथा उद्यमियों को कितना लाभ मिलता है।

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