कर्नाटक राज्योत्सव के बीच बेलगावी में तनाव, रोक के बावजूद MES ने मनाया 'काला दिवस'
बेलगावी। कर्नाटक में एक नवंबर को कन्नड़ राज्योत्सव पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, ध्वजारोहण और समारोहों का आयोजन किया गया। वहीं, महाराष्ट्र की सीमा से लगे बेलगावी जिले में इस अवसर पर अलग तस्वीर देखने को मिली। महाराष्ट्र एकीकरण समिति (MES) के कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से अनुमति देने से इनकार किए जाने के बावजूद 'काला दिवस' मनाया। इस घटनाक्रम के कारण लंबे समय से चले आ रहे कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
जानकारी के अनुसार, बेलगावी जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से महाराष्ट्र एकीकरण समिति को एक नवंबर को 'काला दिवस' कार्यक्रम आयोजित करने और रैली निकालने की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद समिति के कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। प्रशासन की ओर से पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि किसी भी ऐसी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ने या सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की आशंका हो।
बेलगावी के जिलाधिकारी मोहम्मद रोशन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए MES के प्रस्तावित कार्यक्रम को अनुमति देने से इनकार किया था। अधिकारियों का उद्देश्य कन्नड़ राज्योत्सव के अवसर पर जिले में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना और किसी भी प्रकार के टकराव की स्थिति को रोकना था।
इसके अलावा, पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से आने वाले शिवसेना और महाराष्ट्र एकीकरण समिति के कुछ प्रमुख नेताओं को लेकर भी प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए थे। प्रशासन को आशंका थी कि बाहरी राजनीतिक नेताओं की मौजूदगी से सीमा विवाद को लेकर माहौल संवेदनशील हो सकता है। इसी कारण एहतियाती कदम उठाए गए।
महाराष्ट्र एकीकरण समिति लंबे समय से बेलगावी और आसपास के मराठी भाषी क्षेत्रों को महाराष्ट्र में शामिल करने की मांग करती रही है। समिति के समर्थक एक नवंबर को 'काला दिवस' के रूप में मनाते हैं। उनका विरोध वर्ष 1956 में हुए राज्यों के भाषाई पुनर्गठन से जुड़ा है। उस समय बेलगावी सहित कुछ मराठी भाषी आबादी वाले क्षेत्रों को तत्कालीन मैसूर राज्य में शामिल किया गया था, जिसे बाद में कर्नाटक नाम दिया गया।
MES का कहना है कि मराठी भाषी क्षेत्रों के लोगों की मांगों का समाधान नहीं हुआ है। दूसरी ओर, कर्नाटक का पक्ष है कि बेलगावी राज्य का अभिन्न हिस्सा है और भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के बाद निर्धारित सीमाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर दोनों राज्यों के बीच दशकों से राजनीतिक और कानूनी विवाद बना हुआ है।
एक नवंबर 2026 को बेलगावी में MES के कार्यकर्ताओं ने प्रतिबंध के बावजूद विरोध कार्यक्रम आयोजित किया। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, कार्यकर्ताओं ने संभाजी उद्यान से रैली निकाली, जो महाद्वार रोड, शाहपुर के एसपीएम रोड, महात्मा फुले रोड और बसवेश्वर सर्किल से होते हुए मराठा मंदिर कल्याण मंडप की ओर बढ़ी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मराठी भाषी क्षेत्रों को महाराष्ट्र में शामिल करने की मांग दोहराई।
प्रशासन ने सीमा पर भी सख्त निगरानी रखी। रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले से बेलगावी की ओर आ रहे शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के 50 से अधिक कार्यकर्ताओं को निपानी तालुका के कोगनोली चेकपोस्ट पर रोक दिया गया। इस समूह का नेतृत्व कोल्हापुर जिला इकाई के अध्यक्ष विजय देवणे कर रहे थे। कार्यकर्ताओं को कर्नाटक में प्रवेश करने से रोकने के बाद महाराष्ट्र के कागल पुलिस के हवाले किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इससे पहले 30 अक्टूबर को बेलगावी के पुलिस अधीक्षक ने जिला प्रशासन को सुरक्षा संबंधी रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में आशंका जताई गई थी कि महाराष्ट्र से आने वाले कुछ राजनीतिक कार्यकर्ता सीमा विवाद को लेकर कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। अधिकारियों ने चिंता व्यक्त की थी कि विवादित मुद्दे पर उत्तेजक भाषणों से कन्नड़ और मराठी भाषी समुदायों के बीच तनाव बढ़ सकता है।
इसी रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी मोहम्मद रोशन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया। यह आदेश एक नवंबर के लिए प्रभावी था। आदेश में विजय शामराव देवणे के अलावा संजय पवार, सुनील मोदी, सुनील शिंत्रे, विशाल देवकुले और मंजीत माने सहित संबंधित कार्यकर्ताओं के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी।
प्रशासन ने बेलगावी शहर के पुलिस आयुक्त और जिला पुलिस अधीक्षक को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य राज्योत्सव समारोह और प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम के बीच किसी भी प्रकार के टकराव को रोकना था।
कन्नड़ राज्योत्सव कर्नाटक के लोगों के लिए ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। एक नवंबर 1956 को भाषाई आधार पर कन्नड़ भाषी क्षेत्रों को मिलाकर तत्कालीन मैसूर राज्य का पुनर्गठन किया गया था। वर्ष 1973 में इसका नाम कर्नाटक रखा गया। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष एक नवंबर को राज्योत्सव मनाया जाता है।
वहीं, महाराष्ट्र एकीकरण समिति इस तारीख को विरोध दिवस के रूप में मनाती है। समिति का तर्क है कि राज्य पुनर्गठन के दौरान कुछ मराठी भाषी क्षेत्रों को महाराष्ट्र में शामिल नहीं किया गया। इसी मुद्दे को लेकर संगठन कई दशकों से आंदोलन करता रहा है।
कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच सीमा विवाद समय-समय पर राजनीतिक चर्चा का विषय बनता रहा है। दोनों राज्यों के नेताओं की ओर से अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं। यह विवाद न्यायिक प्रक्रिया का विषय भी रहा है। ऐसे में प्रशासन के सामने भाषाई भावनाओं, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती रहती है।
बेलगावी में पहले भी कन्नड़ राज्योत्सव के अवसर पर MES के विरोध कार्यक्रमों को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं। वर्ष 2025 में भी अनुमति के बिना रैली आयोजित करने के मामले में पुलिस ने MES से जुड़े 38 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। हालांकि, उस कार्रवाई को इस वर्ष की घटना से अलग माना जाना चाहिए।
एक नवंबर 2026 की घटना ने फिर यह स्पष्ट किया है कि बेलगावी सीमा विवाद का मुद्दा अब भी संवेदनशील बना हुआ है। प्रशासन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद MES ने अपना विरोध दर्ज कराया, जबकि पुलिस ने महाराष्ट्र से आने वाले कुछ कार्यकर्ताओं को सीमा पर रोक दिया।
फिलहाल इस वर्ष की रैली को लेकर कितने लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है, इसकी पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में किसी गिरफ्तारी या मुकदमे की संख्या का दावा करना उचित नहीं होगा।
कुल मिलाकर, कर्नाटक राज्योत्सव के उत्सवपूर्ण माहौल के बीच बेलगावी में महाराष्ट्र एकीकरण समिति का 'काला दिवस' कार्यक्रम एक बार फिर दोनों राज्यों के पुराने सीमा विवाद को चर्चा में ले आया है। प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, जबकि समिति अपनी क्षेत्रीय मांगों को लेकर विरोध जारी रखे हुए है।