कर्नाटक : कोडागु जिले के विराजपेट तालुक में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां एक कॉफी बागान में संदिग्ध परिस्थितियों में एक मादा जंगली हाथी की मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर मौजूद हाथी के बच्चे का अपनी मृत मां के पास खड़े होकर लगातार चीखना-चिल्लाना लोगों के लिए भावुक कर देने वाला दृश्य बन गया।
जानकारी के अनुसार, विराजपेट तालुक के आनंदपुर इलाके के पास कौरीकाडु एस्टेट के एक निजी कॉफी बागान में करीब 30 साल की मादा हथिनी मृत पाई गई। स्थानीय लोगों ने जब हथिनी के बच्चे को उसके शव के पास परेशान हालत में देखा तो उनका दिल भर आया। बच्चा अपनी मां को छोड़ने के लिए तैयार नहीं था और बार-बार उसके पास जाकर आवाजें निकाल रहा था।
ग्रामीणों के मुताबिक, शनिवार देर रात इलाके में हाथी के बच्चे के तेज रोने और चीखने की आवाज सुनाई दी। आवाज सुनकर कुछ ग्रामीण मौके पर पहुंचे। वहां उन्होंने कॉफी की फसल के बीच मादा हथिनी का शव पड़ा देखा, जबकि उसका बच्चा शव के आसपास घूम रहा था और लगातार अपनी मां को उठाने की कोशिश कर रहा था।
घटना की जानकारी तुरंत वन विभाग को दी गई। सूचना मिलने के बाद रविवार सुबह वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने मृत हथिनी की जांच शुरू की और मौत के कारणों का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू की।
विराजपेट जोनल फॉरेस्ट ऑफिसर शिवराम और अन्य वन अधिकारियों ने जब हथिनी के शव के पास पहुंचने की कोशिश की तो हाथी के बच्चे ने उन्हें रोक दिया। मां की मौत से परेशान बच्चा किसी को भी शव के करीब नहीं जाने दे रहा था। अधिकारियों ने कई बार कोशिश की, लेकिन बच्चा अपनी मां से दूर हटने को तैयार नहीं हुआ।
वन विभाग के कर्मचारियों के लिए यह स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण रही। हाथी का बच्चा अपनी मां के शव के पास ही रहना चाहता था और किसी भी तरह के हस्तक्षेप का विरोध कर रहा था। काफी प्रयासों के बाद वन विभाग की टीम ने जाल की मदद से बच्चे को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया और उसे नियंत्रित किया।
अधिकारियों का कहना है कि हाथी के बच्चे की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। मां की मौत के बाद बच्चे की देखभाल और उसके भविष्य को लेकर वन विभाग आगे की योजना तैयार कर रहा है। विशेषज्ञों की मदद से यह तय किया जाएगा कि बच्चे को जंगल में वापस छोड़ा जाए या कुछ समय तक उसकी विशेष निगरानी की जाए।
मादा हथिनी की मौत के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों द्वारा शव का परीक्षण कर मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि हथिनी की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या किसी अन्य वजह से।
कोडागु जिला अपने घने जंगलों और वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। यहां अक्सर हाथियों की आवाजाही देखने को मिलती है। जंगलों के आसपास बसे इलाकों और कॉफी बागानों में कई बार मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति भी बन जाती है। ऐसे में वन विभाग लगातार निगरानी और संरक्षण के प्रयास करता रहता है।
इस घटना ने एक बार फिर वन्यजीवों की भावनात्मक संवेदनाओं को सामने ला दिया है। वन विशेषज्ञों के अनुसार, हाथी बेहद सामाजिक और संवेदनशील जानवर होते हैं। वे अपने झुंड के सदस्यों के साथ मजबूत संबंध रखते हैं और किसी साथी या परिवार के सदस्य की मौत का असर उन पर साफ दिखाई देता है।
मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि हाथी के बच्चे को अपनी मां के शव के पास रोते देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो गया। कई लोगों ने वन विभाग से अपील की है कि बच्चे की उचित देखभाल की जाए ताकि वह सुरक्षित रह सके।
फिलहाल वन विभाग की टीम पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। मादा हथिनी की मौत की जांच जारी है और हाथी के बच्चे की स्थिति की भी लगातार निगरानी की जा रही है। इस घटना ने स्थानीय लोगों के बीच वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता और संवेदनशीलता को और बढ़ा दिया है।