बेंगलुरु। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दक्षिणी राज्यों को आर्थिक और राजनीतिक रूप से अधिक बराबरी देने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है, इसलिए उसे संसाधनों और केंद्रीय सहायता में उचित हिस्सा मिलना चाहिए। गुरुवार को आयोजित सदर्न जोनल काउंसिल की 31वीं बैठक को संबोधित करते हुए शिवकुमार ने दक्षिणी राज्यों की आर्थिक ताकत और राष्ट्रीय विकास में उनकी भूमिका को प्रमुखता से सामने रखा।

शिवकुमार ने कहा कि दक्षिणी राज्यों को अपने हिस्से के फंड और अपनी आवाज के मामले में न्याय चाहिए। उन्होंने केंद्र से उचित अनुदान उपलब्ध कराने और दक्षिण भारत को उसका उचित हिस्सा देने की मांग की।

देश की अर्थव्यवस्था में दक्षिण का बड़ा योगदान

अपने संबोधन में शिवकुमार ने दक्षिण भारत को भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रमुख चालक बताया। उन्होंने कहा कि देश की कुल आबादी में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले पांच दक्षिणी राज्य मिलकर देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP में करीब 33 प्रतिशत योगदान देते हैं।

उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा दक्षिणी राज्यों की आर्थिक क्षमता को दर्शाता है। दक्षिण भारत में उद्योग, आईटी, सेवा क्षेत्र, विनिर्माण, कृषि, निर्यात और तकनीकी नवाचार के कई महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ऐसे में राष्ट्रीय संसाधनों के वितरण और विकास योजनाओं में दक्षिणी राज्यों की भूमिका को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

शिवकुमार ने कहा कि आर्थिक योगदान और जनसंख्या के अनुपात के बीच अंतर को केवल आंकड़ों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि विकास और वित्तीय संसाधनों के आवंटन में भी इसका प्रभाव दिखाई देना चाहिए।

कर्नाटक को बताया विकास की मजबूत ताकत

कर्नाटक की आर्थिक भूमिका का उल्लेख करते हुए शिवकुमार ने कहा कि राज्य दक्षिण भारत और देश के आर्थिक विकास में प्रमुख भूमिका निभा रहा है। उन्होंने सॉफ्टवेयर निर्यात, विदेशी निवेश, एयरोस्पेस, कॉफी और नई तकनीकों के क्षेत्र में कर्नाटक के योगदान को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक दक्षिण भारत के विकास की मजबूत प्रेरक शक्तियों में से एक है। बेंगलुरु लंबे समय से आईटी और स्टार्टअप गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। इसके अलावा राज्य में एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, अनुसंधान और उभरती तकनीकों से जुड़े उद्योगों का भी विस्तार हुआ है।

भारत के सॉफ्टवेयर निर्यात में 42 प्रतिशत हिस्सेदारी

शिवकुमार के अनुसार, भारत के सॉफ्टवेयर निर्यात में कर्नाटक की हिस्सेदारी लगभग 42 प्रतिशत है। राज्य में करीब 1,100 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) मौजूद हैं। ये केंद्र बहुराष्ट्रीय कंपनियों के तकनीकी, अनुसंधान, वित्तीय और अन्य वैश्विक संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक ने वर्ष 2019 से 2025 के बीच भारत में आए कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI में 21 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आकर्षित किया है। इससे राज्य की निवेश क्षमता और वैश्विक कंपनियों के लिए उसकी अहमियत का पता चलता है।

देश की GDP में कर्नाटक का करीब 9 प्रतिशत योगदान

शिवकुमार ने राज्य की जनसंख्या और आर्थिक योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश की कुल आबादी में कर्नाटक की हिस्सेदारी करीब 5.5 प्रतिशत है, जबकि देश की GDP में राज्य का योगदान लगभग 9 प्रतिशत है।

उनके मुताबिक, यह अंतर इस बात का संकेत है कि कर्नाटक राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अपनी आबादी के अनुपात से अधिक योगदान दे रहा है। उन्होंने इसी आधार पर वित्तीय संसाधनों और केंद्रीय योजनाओं में राज्यों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार की आवश्यकता पर जोर दिया।

फंड और ग्रांट को लेकर उठाई मांग

शिवकुमार ने केंद्र से राज्यों को मिलने वाले फंड और अनुदान को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों को उनकी आर्थिक क्षमता और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान के अनुरूप संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

उनकी मांग केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं रही। उन्होंने व्यापक रूप से दक्षिण भारत के राज्यों के लिए उचित हिस्सेदारी की बात कही। उनके अनुसार, विकास की गति बनाए रखने और देश को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए राज्यों के बीच संतुलन जरूरी है।

आर्थिक योगदान के साथ राजनीतिक आवाज भी जरूरी

शिवकुमार ने आर्थिक बराबरी के साथ राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आवाज का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि दक्षिणी राज्यों को अपने हितों और विकास संबंधी आवश्यकताओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से रखने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, उद्योग और मानव विकास के कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। ऐसे राज्यों की आवश्यकताओं को राष्ट्रीय नीतियां तैयार करते समय उचित महत्व दिया जाना चाहिए।

दक्षिणी राज्यों के बीच समन्वय पर जोर

सदर्न जोनल काउंसिल की बैठक दक्षिणी राज्यों के बीच विभिन्न मुद्दों पर समन्वय और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच है। ऐसे में शिवकुमार का यह संबोधन क्षेत्रीय विकास, संसाधनों के वितरण और राज्यों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उन्होंने दक्षिणी राज्यों के आर्थिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि देश की समग्र प्रगति में इस क्षेत्र की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसलिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल के साथ-साथ वित्तीय संसाधनों के न्यायसंगत वितरण की आवश्यकता है।

शिवकुमार के बयान से एक बार फिर राज्यों को मिलने वाले केंद्रीय संसाधनों, आर्थिक योगदान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। कर्नाटक सरकार का तर्क है कि राज्य अपनी आबादी के अनुपात से अधिक आर्थिक योगदान दे रहा है और दक्षिणी क्षेत्र राष्ट्रीय विकास का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में उसे वित्तीय संसाधनों और केंद्रीय सहायता में उचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।

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