कावेरी विवाद पर डीके शिवकुमार बोले- किसानों का हित सर्वोपरि

Update: 2026-08-02 08:09 GMT

बेंगलुरु। कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कर्नाटक में सियासी हलचल के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार के लिए राजनीति से ज्यादा किसानों और आम जनता का हित महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि कावेरी जल विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राज्य के हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर काम करें।

मुख्यमंत्री ने यह बात रविवार को होम ऑफिस ‘कृष्णा’ में आयोजित सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। बैठक में कावेरी नदी के जल बंटवारे से जुड़े मौजूदा हालात और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

राजनीति से ऊपर राज्य हित को रखने की अपील

बैठक को संबोधित करते हुए डीके शिवकुमार ने कहा कि कावेरी जल विवाद कर्नाटक के लिए कोई नया मुद्दा नहीं है। राज्य लंबे समय से इस समस्या का सामना करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में राजनीतिक मतभेदों को अलग रखकर राज्य के हितों की रक्षा करना सभी दलों की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक में पहले भी कई मौकों पर सभी राजनीतिक दल राज्य के महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक साथ आए हैं। कावेरी विवाद भी ऐसा ही विषय है, जहां सभी को मिलकर राज्य के किसानों और लोगों के हित में आवाज उठानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। पानी की उपलब्धता और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार हर संभव कदम उठा रही है।

सर्वदलीय बैठक में बनी एकजुटता की सहमति

बैठक में शामिल नेताओं ने कावेरी जल विवाद पर राज्य के हितों को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक की जनता की जरूरतों और किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सभी दलों का साथ आना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि जल विवाद जैसे मुद्दे केवल राजनीतिक बहस का विषय नहीं होते, बल्कि इनका सीधा असर आम लोगों और कृषि व्यवस्था पर पड़ता है। इसलिए सभी जनप्रतिनिधियों को मिलकर राज्य के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।

CWRC और CWMA की बैठकों से पहले केंद्र को दी गई जानकारी

डीके शिवकुमार ने बताया कि कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) की बैठकों से पहले उन्होंने केंद्र सरकार के कई मंत्रियों और नेताओं से मुलाकात कर राज्य की स्थिति से अवगत कराया था।

उन्होंने कहा कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल, प्रह्लाद जोशी और वी. सोमन्ना के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और जगदीश शेट्टार से भी चर्चा की थी। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन नेताओं ने भी केंद्र स्तर पर कर्नाटक के पक्ष को मजबूती से रखने का भरोसा दिया।

उन्होंने सभी नेताओं का सहयोग के लिए धन्यवाद भी व्यक्त किया।

सांसदों की भूमिका की भी सराहना

मुख्यमंत्री ने दिल्ली में हुई बैठक का भी जिक्र किया, जिसमें कर्नाटक के सांसदों ने पार्टी लाइन से ऊपर उठकर राज्य के मुद्दे पर साथ खड़े रहने की बात कही थी।

उन्होंने कहा कि राज्य के हितों के लिए सांसदों की एकजुटता महत्वपूर्ण है। कावेरी जल विवाद जैसे विषयों पर केंद्र सरकार के सामने राज्य का पक्ष मजबूती से रखने के लिए सभी जनप्रतिनिधियों का सहयोग जरूरी है।

किसानों के हित पर सरकार का जोर

कर्नाटक में कावेरी नदी का पानी किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सिंचाई और पेयजल दोनों के लिए कावेरी पर निर्भरता के कारण जल बंटवारे का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील बना हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की चिंताओं को समझती है और राज्य के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कर्नाटक के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी और संवैधानिक रास्तों के तहत सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

कावेरी जल विवाद पर आयोजित इस सर्वदलीय बैठक के बाद राज्य सरकार को उम्मीद है कि सभी राजनीतिक दल मिलकर इस मुद्दे पर एक साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ेंगे।

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