जोग फॉल्स को सालभर पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी, 365 दिन पानी का प्रवाह बनाए रखने पर काम
बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने दुनिया भर में प्रसिद्ध जोग फॉल्स को केवल मानसून तक सीमित पर्यटन स्थल के बजाय पूरे साल आकर्षण का केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पर्यटन विभाग ने इसके लिए विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया है। योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसा तंत्र विकसित करना है, जिससे वर्ष के निर्धारित समय में जोग फॉल्स में पानी का प्रवाह बनाए रखा जा सके और पर्यटक साल के अलग-अलग मौसम में भी इस प्राकृतिक आकर्षण का आनंद ले सकें।
ऊर्जा एवं पर्यटन मंत्री के.जे. जॉर्ज ने हाल ही में आयोजित प्रगति समीक्षा बैठक में अधिकारियों को जोग फॉल्स से जुड़े विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तकनीकी अध्ययन, वैधानिक मंजूरियां और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर समयबद्ध तरीके से काम किया जाए। बैठक में पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने चल रहे कार्यों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।
जोग फॉल्स कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले में स्थित है और शरावती नदी पर बना यह जलप्रपात राज्य के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। इसकी ऊंचाई करीब 253 मीटर है। मानसून के दौरान यहां पानी का प्रवाह बढ़ने से झरने का भव्य रूप देखने को मिलता है, लेकिन बारिश कम होने के बाद इसकी खूबसूरती काफी हद तक पानी की उपलब्धता पर निर्भर हो जाती है। इसी वजह से सरकार अब इसे सालभर सक्रिय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है।
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव जोग फॉल्स के ऊपरी हिस्से तक पानी पंप करने से जुड़ा रहा। योजना के तहत पानी को ऊपर तक पहुंचाकर निर्धारित समय पर नीचे छोड़ा जा सकता है, ताकि सालभर के चुनिंदा घंटों में झरने का प्रवाह दिखाई देता रहे। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि इस प्रस्ताव को सीधे लागू नहीं किया जाएगा। पहले इसकी तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
मंत्री के.जे. जॉर्ज ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अध्ययन में यह पता लगाया जाए कि झरने का प्रवाह बनाए रखने के लिए कितने पानी की आवश्यकता होगी, कितनी क्षमता के पंप लगाने होंगे और पूरी व्यवस्था चलाने में कितनी बिजली खर्च होगी। इसके साथ ही संचालन लागत, रखरखाव खर्च और लंबी अवधि में परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता का भी आकलन किया जाएगा।
परियोजना के लिए बिजली की उपलब्धता एक अहम मुद्दा होगा। बड़े स्तर पर पानी को ऊंचाई तक पंप करने में पर्याप्त ऊर्जा की जरूरत पड़ेगी। इसी कारण अधिकारियों को कर्नाटक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और कर्नाटक विद्युत नियामक आयोग से आवश्यक मंजूरियां हासिल करने की प्रक्रिया तेज करने को कहा गया है।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जोग फॉल्स जैसे प्राकृतिक पर्यटन स्थल का विकास करते समय पर्यावरण, सुरक्षा और तकनीकी सीमाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पानी का कृत्रिम प्रवाह कब, कितनी देर और किस मात्रा में रखा जाए, इसका फैसला विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर ही किया जाएगा।
पर्यटन विभाग का मानना है कि यदि यह योजना सफल होती है तो जोग फॉल्स पर पर्यटकों की निर्भरता केवल बरसात के मौसम तक सीमित नहीं रहेगी। फिलहाल मानसून के दौरान यहां सबसे अधिक भीड़ देखी जाती है। वर्ष के बाकी हिस्सों में पानी का प्रवाह कम होने के कारण पर्यटकों की संख्या घट जाती है।
सरकार इस स्थिति को बदलना चाहती है। योजना के अनुसार जोग फॉल्स के आसपास पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल झरने में पानी बनाए रखना नहीं है, बल्कि पूरे इलाके को व्यवस्थित और सुविधाजनक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है।
जोग फॉल्स के विकास को लेकर बुनियादी ढांचे पर भी काम जारी है। पर्यटकों की सुविधा, सुरक्षा, पहुंच और पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाने से जुड़ी परियोजनाओं की समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही पुरातत्व विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों से जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र तथा मंजूरियां हासिल करने की प्रक्रिया को भी तेज करने को कहा गया है। सरकार चाहती है कि मंजूरी प्रक्रिया में देरी के कारण विकास परियोजनाओं की रफ्तार प्रभावित न हो।
पर्यटकों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जा रही है। जोग फॉल्स की ऊंचाई और आसपास की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले सुरक्षा अध्ययन करना जरूरी होगा। पानी के प्रवाह में बदलाव से नीचे के हिस्सों में क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका भी तकनीकी परीक्षण किया जाएगा।
के.जे. जॉर्ज ने बैठक में कहा कि जोग फॉल्स कर्नाटक के सबसे प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों में से एक है और इसकी क्षमता केवल मानसून तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सरकार का लक्ष्य ऐसा पर्यटन मॉडल विकसित करना है, जिससे वर्षभर पर्यटक यहां आ सकें।
इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेने से पहले मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ भी बैठक किए जाने की संभावना है। तकनीकी रिपोर्ट और विभिन्न विभागों से मिलने वाली मंजूरियों के आधार पर आगे की कार्ययोजना तय की जाएगी।
जोग फॉल्स को सालभर सक्रिय पर्यटन स्थल बनाने की अवधारणा नई नहीं है। पर्यटन विकास से जुड़े पुराने अध्ययनों में भी यहां वर्षभर पानी का प्रवाह सुनिश्चित करने और आसपास के क्षेत्र को एकीकृत पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की जरूरत बताई गई थी। अब राज्य सरकार इस दिशा में व्यावहारिक और तकनीकी विकल्पों पर नए सिरे से काम कर रही है।
योजना लागू होने से स्थानीय पर्यटन कारोबार को भी फायदा मिल सकता है। अभी होटल, होमस्टे, टैक्सी, भोजनालय और अन्य व्यवसाय मानसून के महीनों में ज्यादा सक्रिय रहते हैं। यदि पर्यटकों का आगमन सालभर बना रहता है तो स्थानीय रोजगार और कारोबार को भी स्थिरता मिल सकती है।
हालांकि सरकार ने अभी पानी पंप करने की व्यवस्था को अंतिम मंजूरी नहीं दी है। यह प्रस्ताव फिलहाल तकनीकी अध्ययन और स्वीकृति की प्रक्रिया में है। पानी की उपलब्धता, बिजली खर्च, सुरक्षा और संचालन लागत जैसे मुद्दों पर संतोषजनक रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे कदम उठाया जाएगा।
फिलहाल पर्यटन विभाग का फोकस जोग फॉल्स के चल रहे विकास कार्यों को तेजी से पूरा करने और सालभर निर्धारित समय पर जलप्रवाह बनाए रखने की संभावना का वैज्ञानिक आकलन करने पर है। यदि योजना व्यावहारिक साबित होती है तो आने वाले वर्षों में जोग फॉल्स केवल बरसात का आकर्षण न रहकर कर्नाटक का 365 दिन सक्रिय रहने वाला प्रमुख पर्यटन केंद्र बन सकता है।