चामराजनगर। कर्नाटक के चामराजनगर जिले में वन विभाग के कर्मचारियों के क्वार्टर और अवैध शिकार-रोधी कैंपों पर लगातार हो रहे हमलों के बाद सरकार ने अवैध हथियारों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की तैयारी की है। वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने गुरुवार को कहा कि सरकार ऐसे अवैध हथियारों को जब्त करने के लिए ऑपरेशन शुरू करेगी, जिनका इस्तेमाल वन्यजीवों के अवैध शिकार को बढ़ावा देने और वन विभाग के कर्मचारियों को निशाना बनाने में किया जा रहा है।
मंत्री का यह बयान हनूर तालुक में वन विभाग के कर्मचारियों के क्वार्टर पर हुए लगातार हमलों के कुछ दिनों बाद आया है। पत्रकारों ने उनसे शरारती तत्वों द्वारा कथित तौर पर जिलेटिन स्टिक का इस्तेमाल कर वन विभाग के आवासों और अवैध शिकार-रोधी कैंपों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने को लेकर सवाल किया था। इन घटनाओं ने वन विभाग के कर्मचारियों की सुरक्षा और क्षेत्र में अवैध शिकार के नेटवर्क को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
शाग्या गांव की घटना के बाद बढ़ा तनाव
बताया जा रहा है कि वन विभाग और संदिग्ध शिकारियों के बीच तनाव शाग्या गांव में हुई एक मुठभेड़ के बाद बढ़ा। इस घटना में तीन संदिग्ध शिकारी मारे गए थे। इसके बाद वन विभाग से जुड़े ठिकानों और कर्मचारियों के क्वार्टर को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आईं।
वन विभाग के अधिकारियों के लिए यह स्थिति इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि जंगल और उसके आसपास के क्षेत्रों में अवैध शिकार पर रोक लगाने के लिए तैनात कर्मचारी सीधे तौर पर ऐसे गिरोहों के संपर्क में आते हैं। यदि वन विभाग के कैंप और कर्मचारियों के आवास ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो वन्यजीव संरक्षण और अवैध शिकार रोकने के अभियान पर भी असर पड़ सकता है।
जिलेटिन स्टिक के इस्तेमाल का आरोप
पत्रकारों ने मंत्री से सवाल किया कि वन विभाग के क्वार्टर और एंटी-पोचिंग कैंपों को नुकसान पहुंचाने के लिए कथित तौर पर जिलेटिन स्टिक जैसे विस्फोटक पदार्थों का इस्तेमाल किया गया। इस पर रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि सरकार ऐसे अवैध हथियारों को जब्त करने के लिए अभियान चलाएगी।
हालांकि, इस तरह के पदार्थों के इस्तेमाल और हमलों में उनकी भूमिका को लेकर जांच एजेंसियां तथ्यों की पड़ताल कर रही हैं। जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि हमलों में कौन लोग शामिल थे और उन्हें ऐसे खतरनाक पदार्थ कहां से मिले।
अवैध शिकार पर रोक लगाने की चुनौती
चामराजनगर कर्नाटक के महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में वन्यजीव पाए जाते हैं। वन्यजीवों के संरक्षण के लिए वन विभाग की ओर से नियमित रूप से गश्त, निगरानी और एंटी-पोचिंग अभियान चलाए जाते हैं।
अवैध शिकार करने वाले गिरोहों के लिए जंगलों तक पहुंच और वन्यजीवों की गतिविधियों की जानकारी आर्थिक लाभ का माध्यम हो सकती है। ऐसे में वन विभाग के कर्मचारियों की सक्रियता अवैध शिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बनती है। इसी वजह से एंटी-पोचिंग कैंप और वनकर्मियों के ठिकाने कई बार ऐसे तत्वों के निशाने पर आ जाते हैं।
सरकार अब अवैध हथियारों के खिलाफ कार्रवाई के जरिए इस नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने की तैयारी कर रही है। अभियान के तहत हथियारों की अवैध खरीद-फरोख्त और उनके इस्तेमाल से जुड़े मामलों की भी जांच की जा सकती है।
वनकर्मियों की सुरक्षा पर भी सवाल
हमलों की घटनाओं ने वन विभाग के कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ाई है। जंगलों में तैनात कर्मचारी अक्सर सीमित संसाधनों के साथ काम करते हैं और उन्हें वन्यजीव तस्करों तथा शिकारियों से सीधे मुकाबला करना पड़ता है।
यदि एंटी-पोचिंग कैंपों या कर्मचारियों के क्वार्टर पर हमला होता है, तो इससे कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो सकता है। साथ ही, वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे अभियान की प्रभावशीलता पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।
ऐसे में सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ वन्यजीवों के अवैध शिकार को रोकना है, वहीं दूसरी तरफ वन विभाग के कर्मचारियों और संवेदनशील सरकारी परिसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है।
जांच में हमलावरों की पहचान पर जोर
वन विभाग और पुलिस के सामने अब उन लोगों की पहचान करना प्राथमिकता होगी, जो कथित तौर पर क्वार्टर और एंटी-पोचिंग कैंपों को नुकसान पहुंचाने में शामिल रहे हैं। इसके साथ ही यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि हमलों के पीछे कोई संगठित समूह है या स्थानीय स्तर पर सक्रिय कुछ लोगों ने घटनाओं को अंजाम दिया।
मंत्री के बयान से संकेत मिलता है कि सरकार अवैध हथियारों के इस्तेमाल को लेकर गंभीर है। हथियारों की जब्ती के साथ-साथ अवैध शिकार के नेटवर्क की आर्थिक और आपूर्ति श्रृंखला की जांच भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
सरकार की कार्रवाई पर नजर
रामलिंगा रेड्डी ने स्पष्ट किया है कि अवैध शिकार को बढ़ावा देने वाले हथियारों और उपकरणों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार के प्रस्तावित अभियान से उम्मीद है कि जंगलों में सक्रिय अवैध शिकारियों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।
फिलहाल शाग्या गांव की घटना और उसके बाद वन विभाग के ठिकानों पर हुए हमलों को लेकर जांच जारी है। तीन संदिग्ध शिकारियों की मुठभेड़ में मौत के बाद पैदा हुए तनाव ने वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों को भी सामने ला दिया है। अब सरकार के अभियान और जांच के जरिए यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि हमलों के पीछे कौन लोग हैं, अवैध हथियारों की आपूर्ति कहां से हो रही है और चामराजनगर क्षेत्र में अवैध शिकार के नेटवर्क को कैसे रोका जा सकता है।