सूखे का CM ने किया हवाई सर्वे अधिकारियों से बोले केंद्रीय टीम को सच बताएं
बेंगलुरु। कर्नाटक के कई जिलों में सूखे की बिगड़ती स्थिति के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को बेल्लारी, विजयनगर और बागलकोट जिलों का हवाई सर्वेक्षण कर हालात का जायजा लिया। इसके बाद मुख्यमंत्री बागलकोट पहुंचे और शिरूर गांव में खेतों का निरीक्षण किया। उन्होंने किसानों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और फसलों को हुए नुकसान के बारे में जानकारी हासिल की। जिला सूखा समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि केंद्रीय सूखा निगरानी टीम के सामने किसी भी तरह के गलत आंकड़े या जानकारी पेश नहीं की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक में देश का दूसरा सबसे बड़ा सूखा प्रभावित क्षेत्र है और सूखा एक प्राकृतिक चुनौती है, जिसका सामना सरकार, प्रशासन और लोगों को मिलकर करना होगा। उन्होंने फसल बीमा में अनियमितता रोकने के साथ किसानों को गुमराह करने वाले एजेंटों के खिलाफ भी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
तीन जिलों का किया हवाई सर्वेक्षण
राज्य में बारिश की कमी और फसलों पर उसके प्रभाव का आकलन करने के लिए मुख्यमंत्री ने बेल्लारी, विजयनगर और बागलकोट जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया।
हवाई सर्वे के दौरान उन्होंने कृषि क्षेत्रों और सूखे से प्रभावित इलाकों की स्थिति देखी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने जमीनी स्तर पर वास्तविक हालात समझने के लिए बागलकोट जिले का दौरा किया।
मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब कई क्षेत्रों के किसान बारिश की कमी और फसलों के नुकसान से परेशान हैं। सरकार विभिन्न जिलों से फसल और जल उपलब्धता से संबंधित जानकारी भी जुटा रही है।
शिरूर गांव में खेतों तक पहुंचे मुख्यमंत्री
हवाई सर्वेक्षण के बाद डीके शिवकुमार शिरूर गांव पहुंचे। यहां उन्होंने खेतों में जाकर फसलों की वास्तविक स्थिति देखी और किसानों से बातचीत की।
किसानों ने मुख्यमंत्री को बारिश की कमी, बुवाई, खेती पर हुए खर्च और फसल को पहुंचे नुकसान की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने किसानों की समस्याएं सुनने के साथ खेतों में मौजूद फसलों का निरीक्षण किया।
इस दौरान उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि कम बारिश और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण अलग-अलग फसलों पर कितना असर पड़ा है।
‘सूखा एक प्राकृतिक चुनौती’
जिला सूखा समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक में देश का दूसरा सबसे बड़ा सूखा प्रभावित इलाका है। उन्होंने सूखे को एक प्राकृतिक चुनौती बताते हुए कहा कि इससे निपटने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को गंभीरता से समझें और जमीनी स्तर से सही जानकारी एकत्र करें। किसानों को राहत पहुंचाने के लिए वास्तविक नुकसान का सही आकलन बेहद जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि केवल दस्तावेजों और रिपोर्टों के आधार पर स्थिति का आकलन पर्याप्त नहीं होगा। खेतों में वास्तविक स्थिति और किसानों की परेशानी को भी ध्यान में रखना होगा।
केंद्रीय टीम को गलत जानकारी न देने की चेतावनी
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विशेष रूप से केंद्रीय सूखा निगरानी टीम के सामने सही जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट शब्दों में कहा, “सच बताएं। सूखे की स्थिति के बारे में सही जानकारी दें।”
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि केंद्रीय टीम के सामने वास्तविक स्थिति छिपाने या गलत आंकड़े पेश करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। फसल नुकसान, बारिश की स्थिति और सूखे से प्रभावित क्षेत्रों से संबंधित तथ्य सही तरीके से रखे जाने चाहिए।
सही आंकड़े उपलब्ध होने पर सूखे की वास्तविक गंभीरता का आकलन करना आसान होगा और उसी के आधार पर आगे राहत संबंधी निर्णय लिए जा सकेंगे।
फसल बीमा में गड़बड़ी रोकने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान फसल बीमा योजना को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजना में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि पात्र किसानों को इसका उचित लाभ मिले।
फसल बीमा सूखा, बारिश की कमी और अन्य प्राकृतिक कारणों से नुकसान उठाने वाले किसानों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक सुरक्षा का माध्यम है। ऐसे में नुकसान के आकलन और बीमा दावों की प्रक्रिया पारदर्शी होना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से फसल बीमा से जुड़े मामलों की निगरानी करने और किसी तरह की अनियमितता सामने आने पर कार्रवाई करने को कहा।
किसानों को गुमराह करने वाले एजेंटों पर होगी कार्रवाई
बैठक में मुख्यमंत्री ने किसानों को कथित तौर पर गुमराह करने वाले एजेंटों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि कोई व्यक्ति फसल बीमा या राहत दिलाने के नाम पर किसानों को गलत जानकारी देता है या उनका फायदा उठाने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
सूखे जैसी स्थिति में पहले से आर्थिक संकट का सामना कर रहे किसानों को किसी तरह की धोखाधड़ी से बचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसके लिए किसानों को सही प्रक्रिया और योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा सकता है।
सही नुकसान का आकलन जरूरी
सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सरकारी राहत के लिए फसल नुकसान का सही आकलन बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि वास्तविक स्थिति रिपोर्ट में दर्ज नहीं होती तो प्रभावित किसानों को मिलने वाली सहायता पर असर पड़ सकता है।
इसी वजह से मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से वास्तविक आंकड़े तैयार करने पर जोर दिया। खेतों की स्थिति, बुवाई का क्षेत्र, फसल नुकसान और पानी की उपलब्धता जैसे पहलुओं का सही विवरण तैयार करने के निर्देश दिए गए।
किसानों की समस्याओं पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं सीधे उनके सामने रखीं। कई किसान फसल में हुए नुकसान और खेती पर पहले ही खर्च हो चुकी रकम को लेकर चिंतित हैं।
सरकार के सामने अब प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत आकलन कर राहत के विकल्प तय करने की चुनौती है। इसके साथ फसल बीमा का लाभ पात्र किसानों तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण होगा।
बेल्लारी, विजयनगर और बागलकोट का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री ने प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया है कि सूखे की गंभीरता से संबंधित वास्तविक जानकारी ही सरकार और केंद्रीय टीम के सामने रखी जाए। अब किसानों की नजर सूखे के आकलन के बाद सरकार द्वारा उठाए जाने वाले राहत कदमों पर रहेगी।