बेंगलुरु। विशेष सघन मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया के दूसरे चरण में नागरिकों को भेजे जाने वाले नोटिस की संख्या कम करने के उद्देश्य से मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने जनगणना फॉर्म की दोबारा जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि इस समीक्षा का मकसद रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों को दूर करना और केवल आवश्यक मामलों में ही नोटिस जारी करना है।
SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम रिकॉर्ड में कुछ श्रेणियों के तहत चिन्हित किए गए हैं। इनमें 43,81,335 मतदाताओं को ‘विसंगति/तार्किक विसंगति’ (Anomaly/Logical Discrepancy) श्रेणी में रखा गया है, जबकि 23,45,500 मतदाताओं के नाम ‘नो मैपिंग’ (No Mapping) श्रेणी में पाए गए हैं।
इन श्रेणियों में आने वाले मतदाताओं को अपनी नागरिकता संबंधी जानकारी और दस्तावेजों के सत्यापन के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं। नोटिस मिलने के बाद संबंधित मतदाताओं को जरूरी दस्तावेजों के साथ निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के सामने पेश होना पड़ रहा है।
नोटिस की संख्या घटाने की कोशिश
CEO कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, सभी मामलों में सीधे नोटिस जारी करने के बजाय पहले रिकॉर्ड की दोबारा जांच की जा रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कितने मामलों में वास्तव में सत्यापन की जरूरत है और कितने मामले केवल तकनीकी त्रुटियों के कारण सामने आए हैं।
अधिकारियों ने जनगणना फॉर्म और मतदाता सूची में दर्ज जानकारियों का मिलान शुरू किया है। इस प्रक्रिया के जरिए गलत वर्गीकरण या डेटा संबंधी त्रुटियों को दूर करने की कोशिश की जा रही है।
मतदाताओं में बढ़ी चिंता
SIR प्रक्रिया के तहत नोटिस मिलने के बाद कई मतदाताओं में चिंता और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। लोगों को डर है कि यदि वे समय पर दस्तावेज जमा नहीं कर पाए तो उनके नाम मतदाता सूची से प्रभावित हो सकते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि केवल नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाया जाएगा। नोटिस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल जानकारी का सत्यापन करना है।
दस्तावेजों के साथ ERO के सामने पेशी
जिन मतदाताओं को नोटिस भेजे जा रहे हैं, उन्हें संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे।
इन दस्तावेजों के आधार पर उनकी पात्रता और नागरिकता संबंधी जानकारी का सत्यापन किया जाएगा। निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों और तय मानकों के अनुसार की जा रही है।
‘नो मैपिंग’ श्रेणी का मतलब
अधिकारियों के अनुसार, ‘नो मैपिंग’ श्रेणी में वे मतदाता शामिल हैं, जिनकी जानकारी पुराने रिकॉर्ड या उपलब्ध डेटा से सही तरीके से जुड़ नहीं पाई है।
वहीं, ‘Anomaly/Logical Discrepancy’ श्रेणी में ऐसे मामले आते हैं, जहां उपलब्ध जानकारी में किसी तरह की असंगति पाई गई है।
इन मामलों में सत्यापन के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
निर्वाचन विभाग ने दी पारदर्शिता की जानकारी
CEO कार्यालय का कहना है कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से की जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया नहीं जाएगा।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाने के लिए यह प्रक्रिया चल रही है। सभी नागरिकों को अपनी जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर दिया जाएगा।
राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज
SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। कई लोग प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि निर्वाचन अधिकारी इसे मतदाता सूची को अपडेट करने की नियमित प्रक्रिया बता रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो।
आगे की प्रक्रिया पर नजर
फिलहाल CEO कार्यालय की ओर से जनगणना फॉर्म की दोबारा जांच जारी है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि समीक्षा के बाद केवल जरूरी मामलों में ही नोटिस जारी किए जाएं।
SIR के दूसरे चरण में आगे की कार्रवाई इसी समीक्षा के आधार पर तय की जाएगी। निर्वाचन विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया में नागरिकों के अधिकारों और पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखा जाएगा।