रायचूर। कर्नाटक के रायचूर जिले के अस्किहाल गांव में सरकारी हाई स्कूल और प्राइमरी स्कूल के विद्यार्थियों को कक्षाओं की कमी के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल में पर्याप्त क्लासरूम उपलब्ध नहीं होने के कारण कई विद्यार्थियों को स्कूल परिसर के बाहर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। इसका सबसे ज्यादा असर प्राइमरी सेक्शन में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर पड़ रहा है।
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, स्कूल की पुरानी इमारत को तोड़े हुए करीब 18 महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक नए भवन का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। भवन के दोबारा निर्माण में देरी के कारण स्कूल में उपलब्ध कक्षाओं पर विद्यार्थियों का दबाव बढ़ गया है। नतीजतन बच्चों को वैकल्पिक स्थानों पर बैठाकर पढ़ाई करानी पड़ रही है।
दो शिफ्ट में चल रहा स्कूल
क्लासरूम की कमी के चलते स्कूल को दो शिफ्ट में संचालित किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अपर प्राइमरी की कक्षाएं सुबह 8:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक चलती हैं। इसके बाद दोपहर 12:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक प्राइमरी सेक्शन के विद्यार्थियों की कक्षाएं आयोजित की जाती हैं।
प्राइमरी सेक्शन में 180 से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं। सीमित कमरों के कारण सभी बच्चों के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ऐसे में कई विद्यार्थियों को स्कूल परिसर में बाहर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है।
स्कूल की दो शिफ्ट की व्यवस्था से भवन और कक्षाओं का इस्तेमाल अलग-अलग समय पर किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद विद्यार्थियों की संख्या और उपलब्ध स्थान के बीच अंतर बना हुआ है। खास तौर पर प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को इसका अधिक सामना करना पड़ रहा है।
मौसम की मार भी झेल रहे बच्चे
बाहर बैठकर पढ़ाई करने वाले बच्चों के लिए मौसम एक बड़ी चुनौती बन रहा है। विद्यार्थियों के अनुसार, उन्हें अलग-अलग मौसम में स्कूल परिसर में बैठकर पढ़ना पड़ता है। गर्मी, बारिश या अन्य मौसम संबंधी परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई जारी रखने की मजबूरी बच्चों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
एक छात्र ने बताया कि क्लासरूम की कमी के चलते कई बच्चों को स्कूल परिसर में बैठकर पढ़ना पड़ता है। विद्यार्थियों का कहना है कि खुले स्थान पर पढ़ाई करने के दौरान उन्हें मौसम की स्थिति के साथ-साथ पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में भी परेशानी होती है।
प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों की उम्र कम होती है। ऐसे में उनके लिए लंबे समय तक खुले स्थान में बैठकर पढ़ना और मौसम की स्थिति का सामना करना और भी कठिन हो सकता है।
18 महीने बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं
स्कूल की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे दक्षिण क्षेत्र के समन्वयक मोहसिन खान ने भी समस्या की गंभीरता का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कर्नाटक टीम ने रायचूर के अस्किहाल गांव में स्कूल का दौरा किया। टीम के अनुसार, स्कूल की इमारत तोड़े जाने के करीब 18 महीने बाद भी नए भवन के निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ है।
मोहसिन खान ने कहा कि टीम स्कूल का दौरा करने पहुंची थी और वहां पहुंचने पर यह स्थिति सामने आई कि भवन को तोड़े जाने के काफी समय बाद भी पुनर्निर्माण का काम शुरू नहीं किया गया है।
भवन निर्माण में देरी का सीधा असर स्कूल की मौजूदा व्यवस्था पर पड़ रहा है। पर्याप्त कमरे नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को शिफ्ट में पढ़ाना पड़ रहा है और कुछ बच्चों के लिए वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
प्राथमिक विद्यार्थियों पर सबसे ज्यादा असर
स्कूल में क्लासरूम की कमी का असर दोनों वर्गों के विद्यार्थियों पर पड़ रहा है, लेकिन प्राथमिक सेक्शन के बच्चों को अधिक परेशानी होने की बात सामने आई है। 180 से अधिक प्राइमरी विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध स्थान पर्याप्त नहीं होने के कारण उन्हें अलग व्यवस्था में पढ़ाया जा रहा है।
स्कूल में पढ़ाई का समय पहले से ही दो हिस्सों में बांटा गया है। सुबह अपर प्राइमरी के विद्यार्थियों की कक्षाएं होती हैं और उनके बाद प्राइमरी विद्यार्थियों की कक्षाएं संचालित की जाती हैं। इसके बावजूद सभी विद्यार्थियों को पर्याप्त कक्षा स्थान उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
स्थायी समाधान की जरूरत
स्कूल की समस्या का स्थायी समाधान नए भवन के निर्माण से जुड़ा हुआ है। जब तक पर्याप्त क्लासरूम उपलब्ध नहीं होते, तब तक स्कूल प्रबंधन को सीमित संसाधनों के साथ पढ़ाई संचालित करनी पड़ रही है।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि पुरानी इमारत को तोड़े हुए 18 महीने हो चुके हैं तो नए भवन का निर्माण अब तक शुरू क्यों नहीं हुआ। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में निर्माण कार्य में देरी के आधिकारिक कारणों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इसलिए इसके लिए किसी विभाग या अधिकारी को सीधे जिम्मेदार ठहराना फिलहाल उचित नहीं होगा।
विद्यार्थियों और स्कूल से जुड़े लोगों के लिए जरूरी है कि नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया जल्द आगे बढ़े, ताकि बच्चों को पर्याप्त और सुरक्षित कक्षाएं मिल सकें। खासकर प्राथमिक विद्यार्थियों के लिए ऐसा वातावरण जरूरी है जहां वे मौसम की चिंता के बिना नियमित रूप से पढ़ाई कर सकें।
अस्किहाल के सरकारी स्कूल की स्थिति शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी ढांचे की अहमियत को भी सामने लाती है। केवल शिक्षक और पाठ्यक्रम उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त कक्षाएं और सुरक्षित अध्ययन का माहौल भी जरूरी है। अब स्थानीय लोगों और विद्यार्थियों की नजर इस बात पर है कि स्कूल के नए भवन का निर्माण कब शुरू होता है और बच्चों को कब तक नियमित कक्षाएं उपलब्ध हो पाती हैं।