बेंगलुरु: कर्नाटक के रामनगर (अब बेंगलुरु दक्षिण) डिवीजन के साथनूर रेंज में चुंची फॉल्स के पास हाथी कॉरिडोर में कथित जमीन कब्जे के मामले में वन विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। लगभग सात एकड़ वन भूमि पर कब्जे के आरोपों को लेकर विभाग ने एक मिनी हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट से जुड़ी कंपनी को नोटिस जारी किया है।

यह मामला एक दशक से ज्यादा पुराना है। दिसंबर 2013 में वन विभाग ने साई स्पूर्ति पावर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ वन अपराध मामला (FOC) दर्ज किया था। कंपनी पर आरोप लगाया गया था कि उसने परियोजना के लिए मिली मंजूरी की शर्तों का उल्लंघन करते हुए वन भूमि पर कब्जा किया और हाथी कॉरिडोर क्षेत्र को प्रभावित किया।

वन विभाग के अनुसार, यह क्षेत्र वन्यजीवों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हाथी कॉरिडोर ऐसे प्राकृतिक रास्ते होते हैं, जिनका इस्तेमाल हाथी और अन्य जंगली जानवर अपने आवागमन के लिए करते हैं। इन क्षेत्रों में किसी भी तरह का निर्माण या अतिक्रमण वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से गंभीर माना जाता है।

विभाग ने आरोप लगाया कि मिनी हाइड्रो-इलेक्ट्रिक परियोजना के लिए तय शर्तों का पालन नहीं किया गया। वन भूमि के उपयोग और निर्माण गतिविधियों को लेकर जो अनुमति दी गई थी, उसमें निर्धारित नियमों का उल्लंघन किए जाने की बात कही गई है।

मामला दर्ज होने के बाद अब वन विभाग ने आगे की प्रक्रिया शुरू करते हुए कंपनी को नोटिस जारी किया है। विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि परियोजना के लिए इस्तेमाल की गई जमीन और निर्माण गतिविधियां कानूनी अनुमति के अनुरूप थीं या नहीं।

चुंची फॉल्स क्षेत्र कर्नाटक के प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में शामिल है। यह इलाका अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ जैव विविधता के लिए भी महत्वपूर्ण है। यहां के जंगलों में कई वन्यजीवों का आवास है और हाथियों की आवाजाही भी होती रहती है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि हाथी कॉरिडोर में किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण वन्यजीवों के प्राकृतिक रास्तों को प्रभावित कर सकता है। इससे मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति बढ़ने का खतरा भी रहता है।

वन विभाग ने अपने नोटिस में कंपनी से संबंधित दस्तावेज और जवाब मांगे हैं। विभाग यह तय करेगा कि आगे की कार्रवाई किस तरह की जाएगी। अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और अतिक्रमण हटाने जैसी प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

साई स्पूर्ति पावर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दर्ज वन अपराध मामले में विभाग पहले भी कार्रवाई कर चुका है। हालांकि, इतने लंबे समय बाद दोबारा नोटिस जारी होने से यह मामला फिर चर्चा में आ गया है।

वन अधिकारियों का कहना है कि वन क्षेत्रों और वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा प्राथमिकता है। किसी भी परियोजना को मंजूरी देते समय पर्यावरणीय संतुलन और वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखना जरूरी होता है।

कर्नाटक में विकास परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर कई बार विवाद सामने आते रहे हैं। बिजली उत्पादन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाएं जहां राज्य के विकास के लिए जरूरी हैं, वहीं वन क्षेत्रों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है।

हाथी कॉरिडोर में जमीन के कथित उपयोग को लेकर वन विभाग का यह कदम पर्यावरण संरक्षण के नजरिए से अहम माना जा रहा है। विभाग अब कंपनी के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।

इस मामले में अंतिम फैसला जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद लिया जाएगा। फिलहाल वन विभाग ने वर्षों पुराने मामले को फिर से सक्रिय करते हुए वन भूमि और वन्यजीव क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं।

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